किरन की कहानी
लेखिका: किरन अहमद


मेरा नाम किरन अहमद है और मैं ये कहानी अक्टूबर २००२ में लिख रही हूँ। मेरी उम्र सत्ताईस साल की है। गोरा चिट्टा रंग और पाँच फुट - तीन इंच की नॉर्मल हाईट। छरहरा जिस्म, चौंतीस डी - तीस - छत्तीस का मेरा फिगर है। लोग और मेरी सहेलियाँ कहती हैं कि मैं खूबसूरत हूँ। मेरी शादी को तकरीबन आठ महीने हुए हैं। शौहर के साथ सुहाग रात और बाकी की सैक्स लाईफ कैसे गुज़र रही है वो तो मैं आप को बताऊँगी ही लेकिन मैं आपको उस से पहले की कुछ और वाक़ये सुनाने जा रही हूँ।

मैं उस वक्त इंटर के दूसरे साल (बारहवीं) के इग्ज़ैम दे रही थी। उम्र होगी कोई सत्रह-अठारह साल के करीब। मेरे फायनल इग्ज़ैम से पहले प्रिप्रेटरी इग्ज़ैम होने वाले थे। जनवरी का महीना था बे-इंतहा सर्दी पड़ रही थी। मैं दो-दो रज़ाई ओढ़ के पढ़ रही थी।

उन दिनों, मेरे एक कज़न सुहैल जिनकी उम्र होगी कोई चौबीस-पच्चीस साल की, उन्होंने अपने शहर में कोई नया नया बिज़नेस शुरू किया हुआ था, तो वो कुछ खरिदारी के लिये यहाँ आये हुए थे और हमारे घर में ही ठहरे थे। हमारा घर एक डबल स्टोरी घर है, ऊपर सिर्फ़ एक मेरा रूम और दूसरा स्टोर रूम है जिस में हमारे घर के स्पेयर बेड, ब्लैंकेट्स, बेड-शीट्स वगैरह रखे रहते हैं। जब उनकी ज़रूरत होती है तो निकाले जाते हैं मौसम के हिसाब से। और एक दूसरा रूम जिस में मैं अकेली रहती हूँ और अपनी पढ़ाई किया करती हूँ। मेरा रूम बहुत बड़ा भी नहीं और बिल्कुल छोटा भी नहीं, बस मीडियम साईज़ का रूम था जिस में मेरा एक बेड पड़ा हुआ था। वो डबल बेड भी नहीं और सिंगल बेड भी नहीं बल्कि डबल से थोड़ा छोटा और सिंगल से थोड़ा बड़ा बेड था। इतना बड़ा तो था ही कि जब कभी-कभी मेरी फ्रैंड रात में मेरे साथ पढ़ने के लिये आती और रात में रुक जाती तो हम दोनों इतमिनान से सो सकते थे। और रूम में एक पढ़ाई की टेबल और चेयर रखी थी। एक मेरी कपबोर्ड और एक मीडियम साईज़ का अटैच्ड बाथरूम था जिस में वाशिंग मशीन भी रखी हुई थी। घर में नीचे तीन कमरे थे। एक मम्मी और डैडी का बड़ा सा बेडरूम, दूसरा एक बड़ा हाल जैसा ड्राईंग रूम जिसके एक कॉर्नर में डायनिंग टेबल भी पड़ी हुई थी। ये ड्राईंग कम डायनिंग रूम था और एक स्पेयर रूम किसी भी गेस्ट वगैरह के लिये था जिस में सुहैल को ठहराया गया था।

हाँ तो, मैं पढ़ाई में बिज़ी थी। सर्दी जम के पड़ रही थी। मैं अपना लिहाफ ओढ़े बेड पे बैठे पढ़ रही थी। बॉयलोजी का सब्जेक्ट था और मैं एक ज़ूलोजी की बुक पढ़ रही थी। इत्तेफाक से मैं रीप्रोडक्टिव सिस्टम ही पढ़ रही थी जिस में मेल और फीमेल ऑर्गन्स की डीटेल्स के साथ ट्रांसवर्स सेक्शन की फिगर बनी हुई थी। रात काफी हो चुकी थी और मैं अपनी पढ़ाई को फायनल टचेज़ दे रही थी। नोट्स के लिये कुछ फिगर्स देख के बनाये हुए थे और उस में ही कलरिंग कर रही थी और साथ में लेबलिंग कर रही थी।

रात के शायद ग्यारह बजे होंगे पर सर्दी होने की वजह से सब जल्दी ही सो गये थे जिससे लगाता था कि पता नहीं कितनी रात बीत चुकी हो। घर में मेरी मम्मी और डैडी नीचे ही रहते थे और डिनर के बाद अपनी दवाइयाँ खा के अपने रूम में जा के सो चुके थे। अचानक सुहैल मेरे कमरे में अंदर आ गये। मैं देख के हैरान रह गयी और पूछा कि, क्या बात है?

तो उसने बताया कि नींद नहीं आ रही थी और तुम्हारे रूम की लाईट्स जलती देखी तो ऐसे ही चला आया कि देखूँ तो सही कि तुम सच में अपनी पढ़ाई कर रही हो (एक आँख बंद कर के) या कुछ और।

मैंने कहा कि देख लो! अपने कोर्स का ही पढ़ रही हूँ, मेरे एक्ज़ाम्स हैं और मैं कोई खेल तमाशा नहीं कर रही हूँ।

उसने कहा कि लाओ देखूँ तो सही के तुम क्या पड़ रही हो, और मेरे नोट्स और रिकोर्ड बुक अपने हाथ में लेकर देखने लगा। सर्दी के मारे उसका भी बुरा हाल हो गया तो वो भी मेरे साथ ही लिहाफ के अंदर घुस आया और मेरे बगल में बैठ गया।

रिकॉर्ड बुक के शुरू में तो मायक्रोस्कोप की फिगर थी और फिर सेल का डायग्राम था। उसके बाद ऐसे हो छोटे मोटे डायग्राम और फिर फायनली उसने वो पेज खोल लिया जिस में मैंने मेल और फीमेल के रीप्रोडक्टिव सिस्टम का डायग्राम बनाया हुआ था। उसने मेरी तरफ़ मुस्कुरा के देखा और बोला कि, क्या ये भी तुम्हारे कोर्स में है?

मैंने कहा, हाँ! तो उसने कहा कि, अच्छा! मुझे भी तो समझाओ कि ये सिस्टम कैसे वर्क करता है।

मैं शरम से पानी-पानी हुई जा रही थी। मैंने कहा कि, मुझे नहीं पता, तुम खुद भी तो सायंस के स्टूडेंट थे, अपने आप ही पढ़ लो और समझ लो।

उसने फिर से पूछा कि, तुम्हारी समझ में नहीं आया क्या ये सिस्टम? तो मैंने कहा कि, नहीं!

उसने फिर पूछा कि मैं समझा दूँ? तो मेरे मुँह से अंजाने में "हूँ" निकल गया। उसने कहा, ठीक है, मैं समझाता हूँ, और मेरी बुक और मेरी रिकोर्ड बुक को खोल के पकड़ लिया।

हम दोनों बगल बगल में बैठे थे। मैं घुटने मोड़ के बैठी थी और वो पालती मार के बैठा था। अब उसने मुझे समझाना शुरू किया कि, ये है फीमेल का रीप्रोडक्टिव ऑर्गन, इसे ईंगलिश में वैजायना, पूसी या कंट कहते हैं और हिंदी में चूत कहते हैं।

मैं शरम के मारे एक दम से लाल हो गयी पर कुछ कहा नहीं। फिर उसने डिटेल में बताना शुरू किया कि, ये है लेबिया मजोरा जिसे पूसी के लिप्स कहते हैं और ये उसके अंदर लेबिया मायनोरा.... ये डार्क पिंक कलर का या लाल कलर का होता है और ये उसके ऊपर जो छोटा सा बटन जैसा बना हुआ है वो क्लिटोरिस या हिंदी में घुंडी या चूत का दाना भी कहते हैं और जब इसको धीरे-धीरे से रगड़ा जाता है या मसाज किया जाता है तो ये जो चूत का सुराख नज़र आ रहा है, इस में से पानी निकलना शुरू हो जाता है। या फिर अगर लड़की बहुत ही एक्साईटेड हो जाती है तो ये निकलने वाले जूस से चूत गीली हो जाती है जो कि रिप्रोडक्शन के इनिश्यल काम को आसान बना देती है।

इतना सुनना था कि मेरी चूत में से समंदर जितना जूस निकलने लगा और चूत भर गयी।

अब ये देखो दूसरी फिगर, ये मेल रीप्रोडक्टिव ऑर्गन है। इसे ईंगलिश में पेनिस या कॉक कहते हैं और हिंदी में लंड या लौड़ा कहते हैं। ये नॉर्मल हालत में ऐसे ही ढीला पड़ा रहता है जैसे कि पहली पिक्चर में है। और जब ये बेहद एक्साईटेड हो जाता है तो ये दूसरी फिगर की तरह खड़ा हो जाता है। ये पेनिस के अंदर जो ब्लड वैसल्स हैं, इन में लहू का बहाव बढ़ जाता है और उसकी वजह से मसल अकड़ के लंड लंबा मोटा और सख्त हो जाता है, और उसने मेरा हाथ पकड़ के अपने अकड़े हुए लंड पे रख दिया और कहा, ऐसे!

अब मेरी साँसें तेज़ी से चलने लगी थी और जिस्म में इतनी गर्मी आ गयी थी कि मुझे लग रहा था मानो मेरा जिस्म किसी आग में जल रहा हो। और ये देखो! उसने मेरा हाथ लंड के नीचे किया और कहा, इसके नीचे जो ये दो बॉल्स दिखायी दे रहे हैं, इन्हें ईंगलिश में टेस्टीकल्स या स्कोरटम और हिंदी में आँडे भी कहते हैं। ये असल में स्पर्म बनने की फ़ैक्ट्री है जहाँ स्पर्म बनते हैं। ये स्पर्म जब मेल के ऑर्गन से ट्राँसफर हो के फीमेल के ऑर्गन में जाता है तो बच्चा पैदा होता है।

मेरा तो मानो बुरा हाल हो गया था। कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या कहूँ और सुहैल था के बस एक प्रोफेसर की तरह से लेक्चर दिये जा रहा था। मैं अंजाने में उसका तना हुआ लंड अपने हाथ में पकड़े बैठी थी। मुझे इतना होश भी नहीं था कि मैं अपना हाथ उसके लंड पे से हटा लूँ।

जब मेल का ये इरेक्ट लंड फीमेल की चूत के अंदर जाता है और चुदाई करते-करते जब एक्साइटमेंट और मज़ा बढ़ जाता है तो अपना स्पर्म चूत के अंदर ये जो बच्चे दानी दिख रही है, उसके मुँह पे छोड़ देता है जिससे स्पर्म बच्चे दानी के खुले मुँह के अंदर चला जाता है और बच्चा पैदा होता है।

मुझे पता ही नहीं चला के उसका एक हाथ तो मेरी चूत पे है जिसका वो मसाज कर रहा है और मेरा हाथ उसके लंड को पकड़े हुए था और मैं अंजाने में उसके मोटे लंड को दबा रही थी। ये पहला मौका था कि मैंने किसी के लंड को अपने हाथों में पकड़ा हो। उसने फिर कहा कि देखो कैसी गीली हो गयी है तुम्हारी चूत, ऐसे ही हो जाती है एक्साइटमेंट के टाईम पे।

तब मुझे एहसास हुआ कि ये मैं क्या कर रही हूँ और एक दम से अपना हाथ उसके लंड पे से खींच लिया। लेकिन उसने अपने हाथ मेरी चूत पे से नहीं हटाया। मेरी नाइटी में हाथ डाले हुए ही था और मेरी चूत का मसाज करता ही जा रहा था जिससे मेरी चूत बहुत गीली हो चुकी थी।

सुहैल हंसने लगा और बोला के डरती क्यों हो, मैं तो तुम्हें थियोरी के साथ प्रैक्टीकल भी बता रहा था ताकि तुम अच्छी तरह से समझ सको।

बस इतना कहा उसने और बिजली चली गयी और बल्ब बुझ गया और कमरे में अंधेरा छा गया। मैं तो बेतहाशा गरम और गीली हो चुकी थी। साँसें तेज़ी से चल रही थी, दिमाग और जिस्म में सनसनाहट दौड़ रही थी। ब्लड सरक्यूलेशन सौ गुना बढ़ चुका था, चेहरा लाल हो गया था और मैं गहरी-गहरी साँस ले रही थी। उसने मुझे धीरे से पुश किया और मैं बेड पे सीधे लेट गयी। वो मेरी साईड में था और उसका हाथ अभी भी मेरी चूत पे था। मुझे इतना होश भी नहीं था के मैं उसका हाथ पकड़ के हटा दूँ। बस ऐसे ही चित्त लेटी रही और अंजाने में मेरी टाँगें भी खुल गयी थी और वो मेरी चूत का अच्छी तरह से मसाज कर रहा था। मुझे बहुत ही मज़ा आ रहा था। अब उसने फिर मेरा हाथ पकड़ के अपने अकड़े हुए लंड पे रख दिया और मेरे हाथ को अपने हाथों से ऐसे दबाया जैसे मैं उसका लंड दबा रही हूँ। बहुत मोटा, सख्त और गरम था उसका लंड। उसने इलास्टिक वाला जॉगिंग पैंट पहना था जिसको उसने अपने घुटनों तक खिसका दिया था और मेरे हाथ में अपना लंड थमा दिया था और मैंने हमेशा की तरह बिना पैंटी और बिना ब्रेज़ियर के नाइटी पहनी थी। मुझे क्या मालूम था कि ऐसे होने वाला है। मैं तो रोज़ रात को सोने के टाईम पे अपनी पैंटी और ब्रेज़ियर निकाल के ही सोती थी।

उसका हाथ मेरे सर के नीचे था। उसने दूसरे हाथ से मुझे अपनी तरफ़ करवट दिला दी। अब हम दोनों एक दूसरे की तरफ़ मुँह करके करवट से लेटे थे। उसने मुझे किस करना शुरू किया तो मेरा मुँह अपने आप खुल गया और जल्द ही उसकी ज़ुबान मेरे मुँह के अंदर घुस चुकी थी और मैं उसकी ज़ुबान को ऐसे एक्सपर्ट की तरह चूस रही थी जैसे मैं फ्रेंच किसिंग में कोई एक्सपर्ट हूँ। हालांकि ये मेरी ज़िंदगी का पहला टंग सकिंग फ्रेंच किस था। मेरे जिस्म में तो जैसे हल्के-हल्के इलेक्ट्रिक शॉक्स जैसे लग रहे थे।

मैं सुहैल के राइट साईड पे थी और वो मेरे लेफ़्ट साईड पे। अब उसने अपने पैरों को चलाते हुए अपनी जॉगिंग पैंट भी निकाल दी और अपनी टी-शर्ट भी। वो पूरा का पूरा नंगा हो गया था। उसके सीने के बाल मेरी नाइटी के ऊपर से ही मेरे बूब्स पे लग रहे थे और मेरे निप्पल खड़े हो गये थे। सुहैल ने मेरी राइट लेग को उठा के अपने लेफ़्ट जाँघ पे रख लिया। ऐसा करने से मेरी नाइटी थोड़ी सी ऊपर उठ गयी तो उसने मेरी जाँघों पे हाथ फेरते-फेरते नाइटी को ऊपर उठाना शुरू किया और मेरी मदद से पूरी नाइटी निकाल दी। मैं एक दम से अपने होश-ओ-हवास खो चुकी थी और वो जैसे कर रहा था, करने दे रही थी और पूरा मज़ा ले रही थी।

हम दोनों एक दूसरे की तरफ़ करवट लिये लेटे थे और मेरी एक टाँग उसकी जाँघ पे थी और अब उसने मेरे बूब्स को मसलना शुरू कर दिया और फिर उन्हें मुँह मे लेकर चूसने लगा। बूब्स को मुँह में लेते ही मेरे जिस्म में इलेक्ट्रिक करंट दौड़ गया तो मैंने उसका लंड छोड़ के उसका सर पकड़ के अपने सीने में घुसा दिया। वो ज़ोर-ज़ोर से मेरी चूचियों को चूस रहा था और उसका लंड जोश में हिल रहा था। लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के लिप्स को छू रहा था। लंड के सुराख में से प्री-कम भी निकल रहा था।

उसने मेरा हाथ अपने सर से हटाया और फिर से अपने लंड पे रख दिया और मैं खुद-ब-खुद ही उसको दबाने लगी और वो मेरी चूत का ऊपर से नीचे मसाज करने लगा। कभी चूत के सुराख में धीरे से उंगली डाल देता और कभी चूत के लिप्स के अंदर ही ऊपर से नीचे और जब कभी मेरी क्लीटोरिस को मसल देता तो मैं जोश में पागल हो जाती। मेरी एक टाँग उसकी जाँघों पे रखे रहने की वजह से मेरी चूत थोड़ी सी खुल गयी थी और लंड का सुपाड़ा चूत से छू रहा था तो मैंने उसके लंड को पकड़े-पकड़े अपनी चूत के अंदर रगड़ना शुरू कर दिया। मैं मस्ती से पागल हुई जा रही थी। मुझे लग रहा था जैसे मेरे अंदर कोई लावा उबल रहा है जो बाहर आने को बेचैन है। इसी तरह से मैं उसके लंड को अपनी चूत में रगड़ती रही और लंड में से निक्ल हुआ प्री-कम और मेरी चूत का बहता हुआ जूस मिल के चूत को और ज़्यादा स्लिपरी बना रहे थे और मेरा मस्ती के मारे बुरा हाल हो चुका था। अब मैं चाह रही थी के ये लंड मेरी चूत के अंदर घुस जाये और मुझे चोद डाले।

सुहैल ने मुझे फिर से चित्त लिटा दिया और मेरी टाँगों को खोल के बीच में आ गया और मेरी बे-इंतहा गीली चूत को किस किया तो मैंने अपने चूतड़ उठा के उसके मुँह में अपनी चूत को घुसेड़ना शुरू कर दिया। मेरी आँखें बंद हो गयी थी और मज़े का आलम तो बस ना पूछो। इतना मज़ा आ रहा था जिसको लिखना मुश्किल है। उसका मुँह मेरी चूत पे लगते ही मेरी टाँगें खुद-ब-खुद ऊपर उठ गयी और उसकी गर्दन पे कैंची की तरह लिपट गयी और मैं उसके सर को अपनी टाँगों से अपनी चूत के अंदर घुसेड़ रही थी और मुझे ऐसे लग रहा था जैसे मेरे अंदर उबलता हुआ लावा अब बाहर निकलने को बेचैन है। मेरी आँखें बंद हो गयी और उसकी ज़ुबान मेरी क्लीटोरिस को लगते ही मेरे जिस्म में सनसनी सी फैल गयी और मेरे मुँह से एक ज़ोर की सिसकरी निकली, आआआआहहहह सससस, और मेरी चूत में से गरम-गरम लावा निकलने लगा और पता नहीं कितनी देर तक निकलता रहा। जब मेरा दिमाग ठिकाने पे आया तब देखा कि सुहैल अभी भी मेरी चूत में अपनी ज़ुबान घुसेड़ के चाट रहा है और पूरी चूत को अपने मुँह में लेकर दाँतों से काट रहा है और मेरी चूत में फिर से आग लगने लगी। मैं सोच रही थी के बस अब सुहैल मेरी चुदाई कर दे लेकिन उस से बोलने में शरम भी आ रही थी। बस इंतज़ार ही करती रही कि कब ये मुझे चोदेगा।

सुहैल के हाथ मेरी गाँड के नीचे थे और वो मेरे चूतड़ों को उठा के चूत को चूस रहा था। मैं अपने चूतड़ों को उछाल-उछाल के अपनी चूत सुहैल के मुँह से रगड़ रही थी। चूत में फिर से गुदगुदी शुरू हो गयी थी। चूत बे इंतहा गीली हो चुकी थी और मस्ती में मेरी आँखें बंद थी और मैं सुहैल का सर पकड़े हुए अपनी चूत में घुसेड़ रही थी। अब शायद सुहैल से भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो वो अपनी जगह से उठा और मेरी टाँगों के बीच में बैठ गया और अपने लौड़े को अपने हाथ से पकड़ के उसके सुपाड़े को मेरी गीली और गरम जलती हुई चूत के अंदर, ऊपर से नीचे कर रहा था। मेरी टाँगें मुड़ी हुई थी। मुझसे भी अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था तो मैंने अपना हाथ बढ़ा के सुहैल का लोहे जैसा सख्त और मोटा तगड़ा लंड अपने हाथों से पकड़ के अपनी ही चूत में घिसना शुरू कर दिया। उसके लंड में से निकलते हुए प्री-कम से उसका लंड चूत के अंदर स्लिप हो रहा था और जब उसके लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के सुराख पे लगाता तो मेरे मुँह से मज़े की एक सिसकरी निकल जाती।

सुहैल अब मेरे ऊपर मुड़ गया और मेरे मुँह में अपनी ज़ुबान को घुसेड़ के फ्रेंच किस कर रहा था और मैं उसके लंड को अपनी चूत में घिस्स रही थी। मेरी टाँगें सुहैल की कमर पे लपटी हुई थी और सुहैल का लंड मेरी चूत के लिप्स के बीच में सैंडविच बना हुआ था। उसने अपने लंड को चूत के लिप्स के बीच में से ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया। चूत बहुत ही स्लिपरी हो गयी थी और ऐसे ही ऊपर नीचे करते-करते उसके लंड का मोटा सुपाड़ा मेरी छोटी सी चूत के सुराख में अटक गया और मेरा मुँह एक्साइटमेंट में खुला रह गया। उसने अपना लंड थोड़ा सा और पुश किया तो उसके लंड का सुपाड़ा पूरा चूत के अंदर घुस गया और मुझे लगा जैसे मेरी अंदर की साँस अंदर और बाहर की साँस बाहर रह गयी हो। मेरे मुँह से हल्की सी चींख, ऊऊऊईईई निकल गयी और मैंने अपने दाँत ज़ोर से बंद कर लिये।

उसने सुपाड़े को धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया तो मेरी चूत में एक अजीब सा मज़ा महसूस होने लगा और मैंने अपने दोनों हाथ बढ़ा कर सुहैल को अपनी बांहों में ज़ोर से जकड़ लिया। सुहैल ने लंड को थोड़ा और अंदर घुसेड़ा तो मेरी चूत का सुराख जैसे बड़ा होने लगा और मुझे तकलीफ होने लगी। मैंने कहा कि सुहैल, दर्द हो रहा है अब और अंदर मत डालो प्लीज़, तो उसने कहा अरे पगली... अभी तो थोड़ा सा भी अंदर नहीं गया और कहा कि अभी तुमको मज़ा आयेगा, थोड़ा वेट करो, और फिर वो मेरी चूचियों को चूसने लगा तो मेरे जिस्म में फिर से सनसनी सी फैलनी शुरू हो गयी और मैं उसकी कमर पे अपने हाथ फिराने लगी।

सुहैल अपने लंड के सुपाड़े को मेरी छोटी सी टाइट चूत के अंदर बाहर करने लगा। मेरी चूत में से जूस निकलने की वजह से उसके लंड का टोपा अब अंदर-बाहर स्लिप हो रहा था। ऐसे ही करते-करते उसने अपने लंड को बाहर निकाला और एक झटका मारा तो उसका लोहे जैसा सख्त लंड मेरी चूत के अंदर आधा घुस गया और मेरे मुँह से चींख निकल गयी, उउउउउउहहहह ईईईईईईई।

लंड अब आधा अंदर घुस चुका था और मेरी चूत के अंदर जलन शुरू हो गयी। मैं उस से ज़ोर से लिपट गयी। सारा जिस्म अकड़ गया तो सुहैल ने धक्के मारना बंद कर दिया और मेरी चूचियों को चूसने लगा। थोड़ी देर में ही फिर से मुझे अच्छा लगने लगा और मेरी ग्रिप सुहैल पे थोड़ी ढीली हो गयी। उसने अपना लंड मेरी चूत के अंदर ऐसे हो छोड़ दिया और चूचियों को चूसने लगा। मुझे फिर से मज़ा आने लगा और उसका आधा घुसा हुआ लंड अच्छा लगने लगा।

जब उसने देखा के मेरी चूत ने उसके मोटे लंड को अपनी छोटे से सुराख में एडजस्ट कर लिया है तो उसने अपना लंड धीरे-धीरे अंदर बाहर करना शुरू कर दिया जिससे मुझे बहुत मज़ा आने लगा। मेरी चूत में से जूस लगातार निकलने लगा जिससे मेरी चूत बहुत ही गीली हो चुकी थी। अब सुहैल ने अपने हाथ मेरी बगल से निकाल के मेरे कंधों को पकड़ लिया और मुझे फ्रेंच किस करने लगा। पोज़िशन ऐसी थी कि दोनों के जिस्म के बीच में मेरे बूब्स चिपक गये थे। सुहैल मुझ पे झुका हुआ था और उसका लंड मेरी चूत में आधा घुसा हुआ था। सुहैल ने धीरे-धीरे लंड को अंदर-बाहर कर के मेरी चुदाई शुरू की और मैं मज़े से पागल होने लगी। मेरी चूत में उसका मोटा लंड फँसा हुआ था और अंदर-बाहर हो रहा था। मुझे फिर से लगने लगा के मेरी चूत के काफी अंदर कोई लावा जैसा उबल रहा है और बाहर निकलने को बेचैन है। उतने में ही सुहैल ने अपने लंड को मेरी चूत से पूरा बाहर निकाल लिया तो मुझे अपनी चूत खाली-खाली लगने लगी और फिर देखते ही देखते उसने इतनी ज़ोर का झटका मारा और मेरे मुँह से चींख निकल पड़ी, ऊऊऊऊईईईईईई अल्लाह...आआआआआ ऊऊऊफफफ निकाल लो बाहर!! मार डाला..... ऊऊऊईईईई, और मुझे लगा जैसे मेरे जिस्म को चीरता हुआ कोई मोटा सा लोहे का सख्त डंडा मेरी चूत के रासते मेरी टाँगों के बीच में घुस गया हो और मैं सुहैल से लिपट गयी उसको ज़ोर से पकड़ लिया और फिर एक दम से टोटल ब्लैक ऑऊट! शायद मैं एक लम्हे के लिये बे-होश हो गयी। कमरे में तो पहले से ही अंधेरा था। मुझे कुछ नज़र ही नहीं आ रहा था और फिर अचानक ऐसे चूत फाड़ झटके से तो मैं एक दम से बेहोश हो गयी। मुझे लगा जैसे सारा कमरा मेरे आगे घूम रहा हो। मुँह खुला का खुला रह गया था और आँखें बाहर निकल आयी थी और आँखों में से पानी निकल रहा था। मेरा मुँह तकलीफ के मारे खुल गया था। लगाता था जिस्म में खून ही नहीं हो और दिमाग काम नहीं कर रहा था।

पता नहीं मैं कितनी देर उसको ज़ोर से चिपकी रही और कितनी देर तक बेहोश रही। जब होश आया तो देखा कि वो अपने लंड से मेरी फटी चूत को चोद रहा है उसका लंड अंदर-बाहर हो रहा है और मेरी चूत में जलन से जैसे आग लगी हुई हो। मेरी मुँह से ऊऊऊऊईईईईई आआआआहहहह औंऔंऔंऔं आआआईईईई जैसी आवाज़ें निकल रही थी लेकिन सुहैल था कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। लगाता था जैसे पागल हो गया हो। ज़ोर-ज़ोर से चुदाई कर रहा था और मेरी फटी चूत में दर्द हो रहा था। मेरा जो लावा निकलने को बेताब था पता नहीं वो कहाँ चला गया था और मुझे बे-इंतहा दर्द हो रहा था। लगाता था जैसे कोई छूरी से मेरी चूत को काट रहा हो। चूत के अंदर बे-इंतहा जलन और दर्द हो रहा था।

सुहैल मुझे चोदे ही जा रहा था। अंधेरे में उसे पता भी तो नहीं चल रहा था कि मैं कितनी तकलीफ में हूँ। मैं उसके जिस्म से चिपकी हुई थी और उसके झटकों से मेरे बूब्स आगे पीछे हो रहे थे। थोड़ी ही देर में जब मेरी चूत उसके मोटे लंड को अपने छोटे से सुराख में एडजस्ट कर चुकी तो मुझे भी मज़ा आने लगा और मेरी ग्रिप उस पे से ढीली पड़ गयी और वो अब दनादन चोद रहा था। उसका लंड अंदर-बाहर हो रहा था और मुझे बेहद मज़ा आ रहा था, ऐसा मज़ा जो कभी सारी ज़िंदगी नहीं आया था। उसके हाथ अभी भी मेरे कंधों को पकड़े हुए थे और वो अपनी गाँड उठा-उठा के लंड को पूरा सिरे तक बाहर निकलता और जोर के झटके से चूत के अंदर घुसेड़ देता। उसके चोदने की स्पीड बढ़ गयी थी और अब मेरा लावा जो पता नहीं कब से निकलने को बेताब था, मुझे लगा कि अब वो फिर से बाहर आने वाला है और मुझे अपनी चूत के अंदर ही अंदर उसका लंड फूलता हुआ महसूस हुआ। उसने बहुत ज़ोर ज़ोर से चोदना शुरू किया और फायनली लंड को पूरा चूत से बाहर निकाला और एक इतनी ज़ोर से झटका मारा कि मेरा सारा जिस्म हिल गया और मेरे जिस्म में जैसे बिजली कि झटके लगने लगे और सारा जिस्म काँपने लगा।

मैंने फिर से सुहैल को ज़ोर से अपनी बांहों में जकड़ लिया। उसके साथ ही उसके लोहे जैसे सख्त लंड में से गरम- गरम मलाई के फुव्वारे निकलने लगे और मेरी चूत को भरने लगा। बस उसी टाईम पे मेरा लावा जो चूत के बहुत अंदर उबल रहा था, ऐसे बाहर निकलने लगा जैसे बाँध तोड़ के दरिया का पानी बाहर निकल जाता है। मुझे लगा जैसे सारे जहाँ में अंधेरा छा गया हो। जिस्म में झटके लग रहे थे और दिमाग में सनसनाहट हो रही थी और बहुत ही मज़ा आ रहा था। सुहैल अभी भी धीरे-धीरे चुदाई कर रहा था। जितनी देर तक उसकी मलाई निकलती रही, उसके धक्के चलते रहे और फिर वो अचानक मेरे जिस्म पे गिर गया जिससे मेरे बूब्स हम दोनों के जिस्म के बीच में सैंडविच बन गये। हम दोनों गहरी गहरी साँसें ले रहे थे। मैं उसके बालों में हाथ फिरा रही थी और मेरी ग्रिप बिल्कुल ढीली पड़ गयी थी। टाँगें खुली पड़ी थी और मैं चित्त लेटी रही। सुहैल का लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर ही था पर अब वो धीरे-धीरे नरम होने लगा था और फिर एक प्लॉप की आवाज़ के साथ उसका लंड मेरी चूत के सुराख से बाहर निकल गया और मुझे लगा कि उसकी और मेरी मलाई जो चूत के अंदर जमा हो चुकी थी, वो बाहर निकल रही है और मेरी गाँड के क्रैक पे से होती हुई नीचे बेडशीट पे गिरने लगी।

सुहैल थोड़ी देर तक मेरे ऊपर ऐसे ही पड़ा रहा। जब दोनों को होश आया तो उसने मुझे एक फ्रेंच किस किया और बोला कि कल रात फिर तुम्हें रीप्रोडक्टिव सिस्टम का अगला हिस्सा पढ़ाने आऊँगा।

मैंने मुस्कुराते हुए कहा कि शैतान चलो भागो यहाँ से, तुम ने ये क्या कर डाला। अगर कुछ हो गया तो क्या होगा।

उसने कहा कि नहीं ऐसे नहीं होगा, तुम फ़िक्र ना करो। और वो अपने कपड़े पहन के नीचे सोने चला गया।

मैं सुबह देर तक सोती रही। नीचे से मम्मी आवाज़ें देती रही लेकिन मैं तो गहरी नींद सो रही थी तो मम्मी ने सुहैल से कहा कि जा बेटा ज़रा देख तो सही कि ये किरन की बच्ची अभी तक सोयी पड़ी है। कॉलेज भी जाना है उसने।

सुहैल ऊपर आया और मुझे जगाया। मैं जब जागी और अपने बेड से उठी तो देखा कि वो तो ब्लड से भरी पड़ी है। मैं तो एक दम से डर ही गयी पर सुहैल ने कहा कि डरने की कोई बात नहीं है, ये तुम्हारी हायमन थी जिसे झिल्ली भी कहते हैं, वो फट गयी और तुम्हारी चूत कि सील टूट गयी है। ये झिल्ली तो हर कुंवारी लड़की को होती है और पहली चुदाई में टूट जाती है और ये नॉर्मल है, तो मैंने इतमिनान की साँस ली और बेडशीट को लपेट के वाशिंग मसीन में धोने के लिये डाल दिया और मैं जब नहा धो के नीचे उतर रही थी तो मुझसे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था। मम्मी ने पूछा कि क्या हुआ, ऐसे क्यों चल रही है, तेरी तबियत तो ठीक है ना? तो मैंने कहा पता नहीं मम्मी! क्या हुआ!

सुहैल ने शरारत से मुस्कुराते हुए बीच में कहा कि शायद कोई चीज़ चुभ गयी होगी तो मैंने उसकी तरफ़ बनावटी गुस्से से देखा और मैंने मम्मी से कहा, हाँ मम्मी, हो सकता है कोई चीज़ चुभ गयी हो, कल रात बिजली भी तो चली गयी थी न और अंधेरा हो गया था तो हो सकता है कोई चीज़ सच में चुभ गयी हो तो मम्मी ने इतमिनान की साँस ली और कहा ठीक है, अगर दवाई लगानी हो तो लगा लो।

तो सुहैल ने मुस्कुराते हुए कहा कि आप फिक्र ना करें खाला, मैं इसे आज दर्द कम होने का इंजेक्शन लगा दुँगा जिससे इसका दर्द हमेशा के लिये खतम हो जायेगा! मम्मी ने कहा कि हाँ ये ठीक है, पर उन्हें क्या पता कि सुहैल कौन से इंजेक्शन की बात कर रहा है और ये इंजेक्शन वो मुझे कहाँ लगायेगा। ये तो बस मैं जानती थी या वो।

मैंने नाश्ता किया और कॉलेज चली गयी। कॉलेज तो चली गयी पर कहीं दिल ही नहीं लग रहा था। चूत में मीठी-मीठी खुजली हो रही थी। बार-बार मेरा हाथ मेरी चूत पे ही चला जाता था और सारे जिस्म में मीठा-मीठा सा दर्द हो रहा था। बार-बार अंगड़ाई लेने का मन कर रहा था। पता नहीं क्यों, आज कॉलेज कुछ अजीब सा लग रहा था । खैर कॉलेज का टाईम खतम हुआ और मैं घर आ गयी और लंच के बाद अपने रूम में जा के सो गयी। बहुत देर तक सोती रही और उठने का मन ही नहीं कर रहा था। सारे जिस्म में एक अजीब सी मिठास लग रही थी। शाम को देर से उठी और फ़्रेश हो के नीचे आ गयी और हम सब ने डिनर साथ किया। वहीं डिनर टेबल पे बैठ के हम सब बातें करने लगे मगर मेरा मन तो कहीं और ही था। मैं बातें सुन तो रही थी पर समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था। थोड़ी देर के बद मैंने कहा कि अब मैं जाती हूँ, मुझे पढ़ाई करनी है और मैं ऊपर अपने कमरे में चली गयी।

रात के करीब साढ़े दस हो गये थे और मुझे अभी भी नीचे से मम्मी डैडी और सुहैल की बातों की आवाज़ें आ रही थी। मैं आते ही अपने बेड पे लेट गयी और मेरा हाथ खुद-ब-खुद मेरी सलवार के अंदर चूत पे चला गया और मैं अपनी चूत को सहलाने लगी और चूत से खेलने लगी। मैंने देखा कि मेरी चूत पे थोड़ी-थोड़ी झांटें उग आयी हैं। वैसे तो मैं हर हफते अपनी झांटें साफ़ करती हूँ और अभी तीन ही दिन हुए थे मुझे झांटें साफ़ किये हुए और अब हल्की-हल्की सी महसूस हो रही थी। मैं बाथरूम में गयी और क्रीम लगा के बची खुची झांटों को साफ़ कर दिया। अब मेरी चूत मक्खन जैसी चिकनी हो गयी थी। मैं वापस बेड पे आके लेट गयी और कमरे की बिजली बंद कर दी और अंधेरे में ही एक बार फिर से अपनी चूत को सहलाने लगी। अब चूत एक दम से मक्खन की तरह चिकनी हो चुकी थी। ठंड बढ़ चुकी थी और मैं ब्लैंकेट तान कर लेट गयी और अब अंधेरे में मुझे मसाज करने में बहुत मज़ा आ रहा था। लड़कियाँ, खासकर कॉलेज जाने वाली लड़कियाँ जानती हैं कि सर्दी की रात हो और चूत मक्खन जैसी चिकनी हो तो चूत से खेलने में और मसाज करने में कितना मज़ा आता है और मैं भी अपनी चूत का मसाज करने लगी और मसाज करते-करते मेरी उंगली तेज़ी से चलने लगी। कभी उंगली चूत के सुराख में अंदर डाल के और कभी मैं क्लीटोरिस का मसाज कर रही थी और फिर अचानक मेरा हाथ तेज़ी से चलने लगा और जिस्म काँपने लगा और फिर मेरा लावा फिर से उबलने लगा और चूत में से जूस निकलने लगा। मेरी आँखें बंद हो गयी और दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था और दिमाग में सांय-सांय सी होने लगी और मस्ती में ना जाने मैं कब सो गयी।

मुझे अपनी चूत पे किसी का हाथ महसूस हुआ तो मेरी आँख खुल गयी। पता नहीं कितनी रात हो गयी थी। मेरी आँख खुली और मुझे होश आया तो समझ में आया कि वो सुहैल है। मैं उस से लिपट गयी और हम दोनों फ्रेंच किस करने लगे। हम एक दूसरे की ज़ुबान को चूस रहे थे। उसका एक हाथ मेरी चूत पे आ गया और वो मेरी चूत का मसाज मेरी सलवार के ऊपर से ही करने लगा। मुझे चूत में गर्मी महसूस होने लगी और गीली भी होने लगी। मैंने हाथ बढ़ा के उसके लंड को पकड़ा तो पता चला कि वो तो पूरा का पूरा नंगा लेटा है। मैं उसका नंगापन महसूस करके मुस्कुरा दी और उसके लंड को अपनी मुट्ठी में पकड़ के दबाने लगी। हम दोनों चित्त लेटे थे। उसका हाथ अब मेरी सलवार के अंदर घुस चुका था उसने सलवार का स्ट्रिंग खोल दिया था और चूत को मसाज कर रहा था। मेरी चिकनी चूत पे उसका हाथ बहुत अच्छा लग रहा था।

वो अपनी जगह से उठा और मेरी कमीज़ को मेरा हाथ ऊपर कर के निकाल दिया और मेरी टाँगों को खोल के टाँगों के बीच में आ के बैठ गया और मेरी सलवार को नीचे खींच के उतारने लगा तो मैंने अपनी चूतड़ उठा दिये और सलवार निकालाने में मदद की। अब हम दोनों नंगे थे और कमरे में अंधेरा था। घर के सारे लोग सो चुके थे। मैंने पूछा कि क्या टाईम हुआ है तो उसने बताया कि रात का एक बज रहा है और सर्दी के मारे मेरे मम्मी डैडी ब्लैंकेट तान के अपने कमरे में कब के सो चुके हैं।

सुहैल मेरे ऊपर ऐसे ही लेट गया। उसका अकड़ा हुआ लंड जिस में से प्री-कम निकल रहा था, मेरी चूत के ऊपर था। हम दोनों के जिस्म के बीच में उसका लंड और मेरी चूचियाँ दोनों सैंडविच बन गयी थी। हम दोनों किसिंग में बिज़ी हो गये। मेरी चूत के ऊपर उसका लंड लगने से चूत में खुजली शुरू हो चुकी थी और गीली भी हो चुकी थी। वो मेरी चूचियों को मसल रहा था और किसिंग कर रहा था। उसका लंड मेरी चूत के लिप्स के बीच में "हॉट डॉग" के सैंडविच की तरह से फँसा हुआ था। लंड के डंडे का निचला हिस्सा मेरी चूत को खोल के लिप्स के बीच में था। लंड के डंडे का निचला हिस्सा क्लीटोरिस से टच कर रहा था तो और मज़ा आ रहा था। अब उसने मेरी चूचियों को चूसना शुरू कर दिया जिससे मेरे जिस्म में बिजली दौड़नी शुरू हो गयी और मुझे लग रहा था कि सारे जिस्म से बिजली दौड़ती हुई चूत में आ रही है ऐसे जैसे कि मेरी चूत बिजली का न्यूकलियस हो या सैंट्रल पोइंट हो।

सुहैल अपने लंड के डंडे को चूत के लिप्स के बीच में ही ऊपर नीचे करने लगा। उसके लंड में से प्री-कम भी निकल रहा था जिससे उसके लंड का निचला हिस्सा जो मेरी चूत के लबों के बीच में था, स्लिपरी हो गया था और फिसल रहा था। मेरी टाँगें उसके चूतड़ पे क्रॉस रखी थी और मैं उसको अपनी तरफ़ खींच रही थी। मेरी चूत बे-इंतहा गीली हो चुकी थी। वो भी मस्ती में था। ऐसे ही लंड को चूत के अंदर ऊपर नीचे करते-करते उसका लंड मेरी चूत के सुराख में फंस गया और एक ही झटके में मेरी गीली चूत के अंदर आधा घुस गया तो मेरे मुँह से आआआहहहहह और ईईईईईई की सिसकरी निकल गयी और मेरी आँखें फटी रह गयी। उसने अब अपना लंड आधा ही अंदर बाहर करना शुरू कर दिया तो मुझे बहुत मज़ा आने लगा। मैं अपनी गाँड उठा-उठा के उसका लंड अपनी चूत के अंदर लेने की कोशिश करने लगी। सुहैल ने अब अपना पूरा लंड सुपाड़े तक चूत से बाहर निकाल के एक ज़ोरदार झटका मारा तो मेरे मुँह से आआआआईईईईईईईई की आवाज़ निकली और मैं उससे ज़ोर से लिपट गयी। मेरा अंदर का दम अंदर और बाहर का बाहर रह गया। चूत पूरी स्ट्रैच हो चुकी थी मेरी चूत में एक दफ़ा फिर से जलन होने लगी।

सुहैल थोड़ी देर तक तो ऐसे ही लंड को चूत के अंदर घुसाये हुए लेटा रहा और मुझे फ्रेंच किस करने लगा। दोनों एक दूसरे की ज़ुबान चूस रहे थे। थोड़ी ही देर में चूत के अंदर की जलन खतम हो गयी और मुझे उसका लोहे जैसा सख्त लंड अपनी चूत के अंदर बेहद अच्छा लगने लगा। सुहैल ने चुदाई शुरू कर दी। वो पूरा लंड बाहर तक निकाल-निकाल के चोद रहा था। उसके पैर पीछे को थे और बेड की लकड़ी की पट्टी से टिके हुए थे और मेरी टाँगें उसके चूतड़ पे कैंची की तरह से जकड़ी हुई थी। वो लकड़ी की बैक का सहारा लेकर अपने लंड को पूरा चूत में से बाहर निकाल-निकाल के ज़ोर-ज़ोर से चुदाई कर रहा था। जैसे ही उसका लंड चूत से बाहर निकलता तो मुझे लगाता जैसे मेरी चूत एक दम से खाली हो गयी हो और फिर जब लंड चूत के अंदर घुस जाता तो लगाता जैसे चूत पूरी तरह से भर गयी है और वो मुझे चोदता ही चला गया। वो ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था और उसकी दोनों कोहनियाँ मेरे जिस्म के दोनों तरफ़ थीं। उसके पैर पीछे और मेरे पैर उसकी गाँड पे क्रॉस थे। मुझे अब बहुत ही मज़ा आने लगा था उसकी चुदाई से।

उसके हर धक्के से मेरी चूचियाँ आगे पीछे होने लगी तो उसने अपने मुँह से उनको चूसना शुरू कर दिया। मस्ती से मैं पागल हो गयी थी। मेरी छोटी सी टाइट चूत के अंदर उसका इतना बड़ा लोहे का डंडा बहुत मज़ा दे रहा था। चुदाई में बहुत ही मज़ा आ रहा था। मेरी चूत में से जूस लगातार निकल रहा था और फच-फच की आवाज़ें कमरे में गूँजने लगी। मुझे ये चुदाई का म्युज़िक बहुत मस्त लग रहा था। मैं अपनी गाँड उठा-उठा के उस से चुदवा रही थी जैसे म्युज़िक की ताल से ताल मिला रही होऊँ।

सुहैल के धक्के तेज़ हो चुके थे और मुझे भी लग रहा था कि मेरी चूत के अंदर कोई तूफान उठ रहा हो। मैं उससे लिपट गयी। सुहैल इतनी ज़ोर-ज़ोर से चोद रहा था कि मुझे ऐसे महसूस हो रहा था जैसे उसका लंबा मोटा लोहे जैसा सख्त लंड मेरी चूत को फाड़ के मेरे पेट तक घुस चुका है। वो दीवानों की तरह से चोद रहा था। मैं उससे ज़ोर से लिपट गयी और दोनों की साँसें तेज़ी से चल रही थी। मुझे लगा कि मेरी चूत में जो तूफान मचा हुआ था वो अब बाहर निकलने को मचल रहा हो और ठीक उसी वक्त सुहैल के लंड में से मलाई के फुव्वारे छूटने लगे - एक दो तीन चार पाँच - उफफफफ मुझे तो मस्ती में पता ही नहीं चला के कितनी मलाई निकल रही है जबकि उसकी पहली मलाई के फुव्वारे ही से मेरी चूत में से तूफानी लावा निकलने लगा। मैं उससे ज़ोर से लिपट गयी थी। उसके धक्के अब धीमे होने लगे और वो अपना लंड मेरी चूत के अंदर ही छोड़ के मेरे ऊपर गिर गया। मेरी चुदी हुई चूत हम दोनों की मलाई से भर चुकी थी पर अभी तक बाहर नहीं निकली थी क्योंकि चूत के सुराख पे उसके लंड का टाइट ढक्कन लगा हुआ था। दोनों ऐसे हे गहरी-गहरी साँसें लेते रहे और मेरी ग्रिप भी अब लूज़ हो गयी थी। उसका लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर ही था। ऐसे लग रहा था जैसे चूत के अंदर ही फूल के और मोटा हो रहा हो। अंधेरे कमरे में हमारी तेज़ी से चलती हुई साँसें सुनायी दे रही थी। मेरी आँखें बंद थी और सारे जिस्म में एक अजीब सी सनसनाहट हो रही थी। मेरे दिल और दिमाग का टोटल ब्लैक-आऊट हो गया था। शायद एक दो या तीन मिनट के लिये मैं सो गयी थी या पता नहीं मस्ती में बेहोश हो गयी थी।

मुझे थोड़ा सा होश आया तो महसूस हुआ कि सुहैल मेरे ऊपर पलट के आ चुका है और उसके लंड में से टपकती हुई हम दोनों की मिक्स मलाई के ड्रॉप्स मेरे लिप्स पे गिर रहे हैं। शायद वो अपना लंड चूत में से बाहर निकालते ही पलट के सिक्स्टी-नाईन पोज़िशन में आ गया था। मेरी टाँगें मुड़ी हुई थी और सुहैल मेरी चूत को चाटना शुरू कर चुका था। मेरे बंद लिप्स पे जब मलाई गिरी तो खुद-ब-खुद मेरी ज़ुबान बाहर निकली और मैंने मलाई को टेस्ट किया और फिर जैसे खुद-ब-खुद ही मेरा मुँह खुल गया और मैं सुहैल के आधे अकड़े हुए लंड को चूसने लगी। दोनों की मिक्स मलाई उसके लंड पे लगी हुई थी और मैं चाट रही थी और वो मलाई को मेरी चूत में से चाट रहा था। इस तरह से मैंने उसके लंड को साफ़ किया और उसने मेरी चूत को साफ़ किया।

अब फिर से सुहैल मेरे बगल में आ के लेट गया। वो मेरी पीठ के पीछे था और मेरी पीठ से उसका सीना लग रहा था। मैं ऐसे करवट से लेटी थी और वो मेरे पीछे मुझसे लिपटा हुआ करवट से लेटा था। मेरे चूतड़ पे उसका लंड महसूस हो रहा था। पर अभी तक मेरा दिमाग ठिकाने नहीं आया था और अभी तक कमरा मेरे आँखों के सामने घूम रहा था और मैं पूरी तरह से संतुष्ट हो चुकी थी।

उसका लंड मेरे चूतड़ से लग रहा था और उसने मेरे बगल से हाथ डाल के मेरी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया। मेरे निप्पल बहुत सेंसटिव हो चुके थे और उसका हाथ लगने से कड़क हो गये थे। मैं अपनी टाँगों को मोड़ कर के ऐसे लेटी थी कि मेरे घुटने मेरी चूचियों के करीब थे और सुहैल मेरे पीछे से लंड को चूत पे टच कर रहा था और आहिस्ता-आहिस्ता से धक्के मार मार के पीछे से ही लेटे लेटे लंड के सिर को चूत के सुराख में घुसाने की कोशिश कर रहा था।

उसके लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के सुराख में लगते ही चूत में जैसे फिर से जान आने लगी और वो गीली होना शुरू हो गयी। वो मेरी चूचियों को मसल रहा था और धक्के मार मार के लंड के सुपाड़े को पीछे से ही चूत के अंदर घुसा रहा था। थोड़ी ही कोशिश के बाद मेरी चूत में उसका लंड आधा और फिर पूरा अंदर घुसने लगा। उसका लंड पूरी तरह से अकड़ गया था और फिर से एक दम से लोहे जैसा सख्त हो गया था।

मुझे फिर से मज़ा आने लगा था वो जोश में लंड को फिर से सुपाड़े तक निकाल-निकाल के पीछे से ही मुझे चोद रहा था। मेरा पूरा जिस्म रिलैक्स हो गया था। चूत में से जूस भी निकलने लगा था और चूत अंदर से स्लिपरी हो गयी थी। उसका लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था और मैं फिर से मज़े लेने लगी थी। अचानक जब उसने अपना लंड पूरा बाहर खींच के अंदर घुसाने की कोशिश की तो वो चूत में से बाहर निकल के गाँड के सुराख में घुस गया मेरे मुँह से फिर से एक ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍.... ऊऊऊऊईईईईईईईई चींख निकल गयी पर गाँड के मसल तो रिलैक्स थे। किसे पता था कि लंड गाँड में घुस जायेगा। बस लंड मेरी चूत के जूस से गीला हो गया था और एक ही झटके में अचानक ही मेरी गाँड को फाड़ता हुआ अंदर घुस चुका था। मैं उछल के आगे हो रही थी कि उसी वक्त सुहैल ने मुझे टाइट पकड़ लिया और मैं उसके लोहे जैसे लंड को अपनी छोटी सी गाँड के सुराख से बाहर नहीं निकाल पायी। अब वो मेरी गाँड मार रहा था। मुझे बहुत तकलीफ हो रही थी। इतना मोटा लंबा लंड मेरी छोटी सी गाँड में घुस चुका था और मुझे लग रहा था कि मेरी गाँड फट गयी है।

अपने लंड को गाँड के अंदर रखे-रखे ही उसने मुझे पलट दिया। मैं उलटी लेट गयी और वो मेरे ऊपर आकर मेरी गाँड मारने लगा। मुझे बहुत ही तकलीफ हो रही थी। मेरी आँख से आँसू निकल रहे थे पर वो मेरी एक नहीं सुन रहा था और गाँड मारने में बिज़ी था। मेरे पेट के नीचे उसने एक तकिया जैसा कुशन रख दिया था जिससे मेरी गाँड थोड़ी ऊपर उठ गयी थी और वो गाँड में अपना लंड पेल रहा था। वो अपने लंड को पूरा निकाल-निकाल के मेरी छोटी सी गाँड में घुसेड़ रहा था और फिर उसकी स्पीड बढ़ गयी। जैसे-जैसे उसके झटके तेज़ हो रहे थे, तकलीफ के मारे मेरी जान ही निकली जा रही थी और फिर अचानक मुझे उसकी मलाई अपनी गाँड में गिरती महसूस हुई और थोड़ी ही देर में अपने लंड की मलाई मेरी गाँड में गिरा के वो शाँत पड़ गया और मेरे बगल में आकर लेट गया। पर मेरी गाँड तो दर्द के मारे फटी जा रही थी। जितना मज़ा चुदाई में आया था अब उतनी तकलीफ हो रही थी। मैं सुहैल से बोली कि आगे से कभी मेरी गाँड नहीं मारना, मुझे बहुत ही दर्द हो रहा है।

वो हंसा और कहा कि वो तो मेरा लंड गलती से तुम्हारी गाँड में घुस गया तो मुझे मज़ा आया और मैंने गाँड मार दी, नहीं तो मेरा इरादा तो तुम्हारी गाँड मारने का नहीं था। ठीक है अगर तुम्हें पसंद नहीं तो अगली बार नहीं मारूँगा। फिर थोड़ी देर के बाद एक और टाईम उसने मुझे चोदा जिससे मेरी गाँड में तकलीफ खतम हो गयी और चूत में फिर से मज़ा आ गया और पता नहीं ऐसी चुदाई के बाद मैं कब सो गयी।

सुबह उठी तो देर हो चुकी थी। आज कॉलेज नहीं जाना था। नाश्ता कर के थोड़ी देर नीचे ही हम सब बातें करते रहे और बस ऐसे ही सारा दिन गुज़र गया। मैं और सुहैल अगले एक हफते तक खूब चुदाई करते रहे रोज़ रात को वो मम्मी डैडी के सो जाने के बाद ऊपर आ जाता और हम जम कर चुदाई करते। एक हफते के बाद वो चला गया और जाने से पहले मैं उससे लिपट के खूब रोयी। मुझे लगा जैसे कोई मेरा लवर मुझे छोड़ के जा रहा है। वो मेरे सारे जिस्म पे हाथ फेरता रहा और प्यार करता रहा और कहा, सुनो किरन, अगर तुम्हारे पीरियड्स में कोई गडबड़ हो जाये तो मुझे फ़ौरन फोन कर देना, मैं कुछ इंतज़ाम कर दुँगा! पर अगले ही महीने में मेरे पीरियड्स टाईम से कुछ पहले ही शुरू हो गये तो मैंने इतमिनान की साँस ली और सुहैल को फोन कर के बता दिया। फिर जब कभी सुहैल आता तो हम खूब चुदाई करते।

मैंने अपनी ग्रेजुयेशन पूरी कर ली और एक दिन मुझे पता चला के मेरा निकाह किसी अशफाक नाम के आदमी से फिक्स हो गया है। उसके घर वाले हमारे घर आये थे और मुझे पसंद भी कर गये और फिर निकाह की डेट फिक्स कर के मेरा निकाह कर दिया गया।

मैं अभी निकाह की डीटेल्स में नहीं जाना चाहती और डायरेक्ट अपनी सुहाग रात के बारे में बता देती हूँ। निकाह हो गया और मैं अपने ससुराल आ गयी। सारा घर अच्छी तरह से सजा हुआ था। घर बहुत बड़ा भी नहीं और बिल्कुल छोटा भी नहीं था, बस ठीक ठाक ही था। उसके घर को पहुँचते-पहुँचते रात हो चुकी थी। डिनर तो कर ही चुके थे मैरिज हॉल में। अशफाक का कमरा भी ठीक ठाक ही था। बेड पे चमेली के फूल बिखरे पड़े थे। पिंक कलर का नरम बेड बहुत अच्छा लग रहा था। सारे कमरे में चमेली के फूलों कि भीनी भीनी खुशबू आ रही थी। बेहद अच्छा लग रहा था। एक दम से ऐसे ही रोमैंटिक था जिसकी हर लड़की ख्वाहिश करती है।

अशफाक कि छोटी बहन, रुखसाना ने मुझे बेड पे बिठा के मुस्कुराते हुए कहा कि भाई जान अभी आ जायेंगे, आप थोड़ा रेस्ट ले लें और कमरे से चली गयी। मुझे अपनी सहेलियों के किस्से याद आने लगे जिनकी शादी हो चुकी थी। किसी ने कहा कि मेरी तो रात भर चुदाई हुई और सुबह मुझसे चला भी नहीं जा रहा था। किसी ने कहा था कि बस ऐसे ही रहा, कोई खास मज़ा नहीं आया था। किसी ने कहा कि अपने लौड़े को चूत के अंदर डालने से पहले ही चूत के ऊपर अपनी मलाई निकाल के सो गया था। मैं काफी एक्साईटेड थी कि पता नहीं मेरा क्या हशर होगा क्योंकि सुहैल से चुदवाये हुए भी तकरीबन एक साल से ज़्यादा ही हो चुका था। चूत के मसल फिर से टाइट हो गये थे। थोड़ी ही देर में वो कमरे में आ गया। अशफाक बहुत स्मार्ट लग रहा था। गोरा रंग, मीडियम हाईट और मीडियम बिल्ट। सब मिलाकर एक अच्छा स्मार्ट आदमी लग रहा था। मुझे अपनी फ्रैंड्स की बातें याद आ रही थी जिनकी शादी हो चुकी थी, जैसे कि सुहाग रात को क्या होता है और कैसे हसबैंड अपनी वाइफ को अपनी बातों से पता के चोद डालता है और लड़की को कितना मज़ा आता है। और साथ में ही मुझे सुहैल भी याद आ गया और सुहैल के साथ हुई मेरी पहली चुदाई भी मुझे याद आ गयी तो मस्ती से मेरा जिस्म टूटने लगा और एक लंबे मोटे लंड का सपना लिये बैठी रही, जो मेरी चूत में घुस के मुझे चोदेगा, मेरी प्यासी चूत की प्यास को बुझायेगा और मज़ा देगा।

अशफाक कमरे के अंदर आ गया और बेड पे बैठ गया। पहले तो मेरी खूबसूरती को निहारता रहा, मेरे गालों पे हाथ फेरता रहा और फिर गाल पे किस किया तो मेरे जिस्म में बिजली दौड़ने लगी और जिस्म जलने लगा। थोड़ी देर में वो उठा और अपने कपड़े चेंज कर के बेड पे आ गया और बहुत धीमी रोशनी वाला लाइट पिंक कलर का नाइट लैंप जला दिया। मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। सारे जिस्म से पसीना छूटने लगा और मुँह से गरम-गरम साँसें निकलने लगी। अब अशफाक चेंज कर के आ गया और हम दोनों लेट गये। पहले तो मेरी खूबसुरती को निहारता रहा और धीरे-धीरे उसके हाथ मेरी चूचियों पे आ गये और वो उनको दबाने लगा तो जिस्म में सनसनी सी फैल गयी। ऐसे ही बातें करते-करते वो मेरे कपड़े उतारता चला गया। सारे कपड़े निकाल के मुझे नंगा कर दिया। मेरे मुँह से एक बात भी नहीं निकल रही थी। नये घर में नये लोगों के साथ रहने से एक नयापन ही लग रहा था। सुहैल तो फिर भी कज़न था, उतना नयापन नहीं महसूस हुआ था लेकिन यहाँ तो हर कोई अजनबी था। शरम भी आ रही थी और एक्साइटमेंट भी थी। मैं बेड पे नंगी लेटी रही। शरम से बुरा हाल था पर क्या करती, ज़माने के रिवाज यही थे कि पहली रात को हसबैंड अपनी वाइफ को चोद देता है और सारी उम्र के लिये वो सिर्फ़ अपने हसबैंड की ही होके रह जाती है। वो थोड़ी देर तक मेरे नंगे जिस्म को देखता रहा और अपने हाथ मेरे सारे जिस्म पे फेरता रहा। मेरे सारे जिस्म में जैसे चिंटियाँ घूमने लगी हों। चूत में भी अब खुजली शुरू हो गयी थी।

वो मेरे नंगे जिस्म पे हाथ फेर रहा था। वो मेरी चूचियों को दबा रहा था और कभी-कभी चूचियों को चूस लेता। धीरे-धीरे उसका हाथ मेरी चूत पे आ गया और वो मेरी उसी दिन की शेव की हुई मक्खन जैसी चिकनी चूत पे आ गया और वो चूत का मसाज करने लगा। मेरे जिस्म में बिजली दौड़ रही थी और मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने दिल में सोचा कि ये तो खिलाड़ी लग रहा है, शायद चुदाई का एक्सपीरियंस होगा और उसका हाथ मेरी चूत पे लगते ही जैसे मेरी चूत में फ्लड आ गया और वो बे-इंतहा गीली हो गयी और रस से भर के अब रसीली चूत हो गयी।

अशफाक ने अपने कपड़े भी निकाल दिये और नंगा हो गया। मैंने एक तिरछी नज़र उसके लंड पे डाली तो दिल धक से रह गया। उसका लंड बस ऐसे ही था, कोई खास नहीं था, टोटल इरेक्ट होने के बाद शायद चार इंच या पाँच इंच का ही होगा। मैंने सोचा कि शायद थोड़ी देर के बाद वो और अकड़ के बड़ा हो जायेगा। खैर अब वो मेरी चूचियों को चूस रहा था और हाथ से मेरी चूत का मसाज कर रहा था। कभी-कभी चूत के अंदर अपनी उंगली डाल देता तो मैं ससससीसीसी ईईईईई कर के सिसकरी ले लेटी।

अब उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर अपने लंड पे रख दिया। मैं कुछ देर तक ऐसे ही अपना हाथ उसके लंड पे रखी रही तो उसने मेरे हाथ को अपने हाथ से पकड़ के दबाया तो मैं समझ गयी कि शायद वो चाहता है कि मैं उसका लंड अपनी मुट्ठी में लेकर दबाऊँ। मैंने उसके लंड को एक या दो बार ही दबाया था कि उसने मेरा हाथ हटा दिया और सीधा मेरे ऊपर चढ़ आया और मेरी टाँगों को फैला के मेरे ऊपर लेट गया। लंड को मेरी चूत के लिप्स के अंदर सुराख पे सटाया और झुक के मुझे किस करने लगा और एक ही झटके में उसका लंड मेरी समंदर जैसे गीली चूत के अंदर घुस चुका था और वो अचानक ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा और बस चार या पाँच ही धक्के लगाया था कि उसके मुँह से ऊऊऊऊहहहह की आवाज़ निकली और उसकी मलाई मेरी चूत में गिर गयी। मुझे तो उसका लंड अपनी चूत के अंदर सही तरीके से महसूस भी नहीं हुआ और उसकी चुदाई पूरी हो चुकी थी। मेरी कुछ फ्रैंड्स ने बताया था कि कभी-कभी एक्साइटमेंट की वजह से और कभी चूत की गरमी से लंड से मलाई जल्दी ही निकल जाती है पर कुछ दिनों में जब चुदाई डेली करते रहते हैं तो फिर ठीक हो जाता है और अच्छी तरह से चोदने लगाता है और ये कि ऐसा अगर कभी हो तो कोई फिक्र की बात नहीं है। यही सोच के मैं खामोश हो गयी कि हो सकता है कि एक्साइटमेंट या चूत की गर्मी से वो जल्दी ही झड़ गया हो पर बाद में अच्छी तरह से चोद डालेगा।

मैंने भी सोचा कि शायद एक्साइटमेंट में उसकी क्रीम जल्दी निकल गयी होगी और ये कोई नयी बात नहीं होगी। वो गहरी-गहरी साँसें लेता हुआ मेरे जिस्म पे पड़ा रहा और मेरी चूत में पहले से ज़्यादा तूफ़ान उठ रहा था और मेरा मन कर रहा था कि किसी तरह से सुहैल आ जाये और मुझे इतना चोदे कि मेरी चूत फट जाये पर ऐसा हो नहीं सकता था ना। मैं कुछ नहीं कर सकती थी। इंतज़ार किया कि शायद अशफाक के लंड में फिर से जान पड़ेगी और वो कुछ सही ढंग से चुदाई करेगा पर ऐसा कुछ नहीं हुआ और वो मेरे बगल में लेट के गहरी नींद सो गया और एक ही मिनट में उसके खर्राटे गूँजने लगे।

सुबह हुई तो उसकी बहन रुखसाना कमरे में आयी और मुस्कुराते हुए एक आँख बंद कर के पूछा, क्यों भाभी जान! रात सोयी या भाई जान ने सारी रात जगाया? मैं उस पगली को क्या बताती कि उसका भाई मेरी चूत में आग लगा के सो गया और मैं सारी रात जागती रही और इंतज़ार करती रही कि हो सकता है कि उसका लंड फिर से जाग जाये पर ऐसा कुछ हुआ नहीं और रुखसाना से कैसे बताती कि उसके भाई को आग लगाना तो आता है पर उस आग को बुझाना नहीं आता। मैंने बनावटी शर्म से नज़र नीचे कर ली और मुस्कुरा दी और दिल में सोचा कि पता नहीं इसे कैसा शौहर मिलेगा, पहली रात को चोद-चोद के चूत का भोंसड़ा बना देगा या मेरी तरह चूत में आग लगा के सो जायेगा। तब मैं पूछूँगी उससे कि रात कैसी गुजरी, रात भर चुदाई होती रही या खुद मलाई निकाल के सो गया और तुम्हारी चूत में आग लगा के तुम्हें सोने नहीं दिया। लेकिन अभी इस सवाल को पूछने के लिये तो टाईम है।

इसी तरह से एक हफ्ता हो गया और मुझे कोई खास मज़ा नहीं आया। बस वो अपने हिसाब से चोदता रहा और हर बार चोद के मुझसे पूछता कि "मज़ा आया किरन?" तो मैं मुँह नीचे कर के चुप हो जाती और वो समझता कि शायद मैं उसकी चुदाई को इंजॉय कर रही हूँ। पता नहीं क्या प्रॉबलम था उसको कि चुदाई से पहले उसका लंड अकड़ता तो था लेकिन चूत की गर्मी से उसकी मलाई दूध बन के निकल जाती थी। ऐसा लगाता था कि लंड चूत के अंदर सिर्फ़ मलाई छोड़ने के लिये ही जाता है। मुश्किल से दो या तीन ही धक्कों में उसका काम तमाम हो जाता था। शुरू-शुरू में तो मैं समझी कि शायद एक्साइटमेंट की वजह से होगा और वक्त के साथ ठीक हो जायेगा पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। शादी के बाद पूरे दो हफ्ता उसके घर रह कर हम शहर में चले आये जहाँ उसका बिज़नेस था।

अशफाक के घर वाले शहर के आऊटर में रहते हैं और अशफाक एक बिज़नेसमैन है। उसका रेडीमेड गार्मेंट्स का बिज़नेस है जो काफी अच्छा चलता है। वो अपने बिज़नेस के लिये डेली आऊटर से शहर में नहीं आ सकता था और इसी लिये उसने एक शानदार फ्लैट शहर में ले रखा था जिस में हम दोनों ही रहते हैं। घर में किसी चीज़ की कमी नहीं थी। कभी-कभी उसके मम्मी और डैडी आ जाते या कभी उसकी बहन रुखसाना आ जाती तो एक या दो दिन रह के चले जाते। घर में मैं अकेली ही रहती हूँ।

वक्त ऐसे ही गुजरता रहा। वो मेरी चूत में सारी रात आग लगाता रहता और खुद सुबह सुबह उठ के चला जाता और मैं जलती हुई चूत के साथ सारा दिन गुजारती रहती। करती भी तो क्या करती। इसी तरह से तीन महीने गुज़र गये। बहुत बोर होती रहती थी घर में बैठे-बैठे। सब नये -ये लोग थे। किसी से भी कोई जान पहचान नहीं थी। हमारे घर के करीब ही एक लेडी रहती थी। उनका नाम था सलमा। वो होंगी कोई छत्तीस या सैंतीस साल की। काफी खुश अखलाक़ और तहज़ीब याफ्ता औरत थीं। वो अक्सर हमारे घर आ जाया करती हैं और इधर उधर की बातें करती रहती हैं। मैं उन्हें आँटी कहने लगी। वो जब आती तो दो-तीन घंटे गुज़ार के ही जाती। कभी खाना पकाने में भी मदद कर देती और कभी-कभी तो हम दोनों मिल के खाना भी खा लेते। वो अपने अपियरेंस का बेहद ख़याल रखती थीं और हमेशा सलीके से कपड़े, गहने वगैरह पहने होती थीं और हल्के से मेक अप में बेहद खूबसूरत दिखती थीं। मैंने भी उनसे काफी कुछ सीखा।

अशफाक तो बिज़नेस के सिल सिले में शहर से बाहर जाते ही रहते हैं और जब कभी किसी दूर के शहर जाना होता तो वो तीन-चार दिन के लिये जाते और मैं घर मैं अकेली ही रहती हूँ। कई बार आँटी ने कहा कि किरन तुम अकेली रहती हो, अगर तुम कहो तो मैं तुम्हारे पास आ के सो जाया करूँ!

मैंने हमेशा हँसते हुए उनके इस इरादे को टाल दिया और अब वो मेरे साथ सोने की बात नहीं करती। कभी-कभी अगर बातें करते-करते रात को देर भी हो जाती तो वो अपने घर चली जाती थी। उनके शौहर मर्चेंट नेवी में इंजीनियर थे और साल में दो-तीन दफ़ा कुछ हफ़्तों की छुट्टियों में आते थे। उनकी बारह साल की एक बेटी थी जो बोर्डिंग स्कूल में पढ़ती थी। उनके पास एक बड़ा सा कुत्ता था जिसे वो दिल-ओ-जान से चाहती थीं। सलमा आँटी अपने कुत्ते के साथ अकेली रहती थीं।

एक दिन आँटी दोपहर के वक्त आ गयीं। मैं उसी वक्त बाहर से कुछ शॉपिंग करके वापस लौटी थी और चाय पी कर थोड़ा सुस्ताने का दिल कर रहा था क्योंकि आज बादल छाये हुए थे और कभी भी बारिश हो सकती थी और ठंडी हवा चल रही थी। हकीकत में मौसम सुहाना हो रहा था पर मुझे रात के गैर तसल्ली बक्श सैक्स से सारा जिस्म टूटा जा रहा था । मैंने घर में कदम रखा ही था और अभी सैंडल भी नहीं उतारे थे कि ठीक उसी टाईम पे आँटी आ गयी। आँटी ने पूछा कि मैं कहीं जा रही हूँ क्या तो मैने कहा. नहीं आँटी! बल्कि अभी-अभी आयी हूँ तो आँटी ने पूछा के थक गयी होगी... कहो तो मैं तुम्हारा जिस्म दबा दूँ तो मैंने हँस के कहा कि नहीं आँटी, ऐसी कोई बात नहीं। इतनी देर में एक दम से बहुत ज़ोरों की बारिश शुरू हो गयी। मेरे इस घर में आने के बाद ये पहली बारिश थी तो मेरा जी चाह रहा था कि मैं ऊपर जा के बालकोनी से बारिश देखूँ। इसी लिये मैंने आँटी से कहा कि चलिये ऊपर चल के बैठते हैं और बारिश का मज़ा लेते हैं।

हम दोनों बालकोनी में आ गये। हमारा फ्लैट आठवीं मंज़िल पर बिल्डिंग का सबसे ऊपर वाला फ्लैट है और हमारी बिल्डिंग के सामने सड़क थी और दूसरी तरफ छोटी सी मार्केट थी जहाँ सब्ज़ी, दूध और तकरीबन डेली इस्तेमल की सभी चीज़ें मिल जाया करती थी। इतनी बारिश की वजह से सारा मार्केट सुना पड़ा हुआ था। कभी-कभी कोई इक्का दुक्का सायकल वाला या कोई आदमी बरसाती ओढ़े गुज़र जाता था। हम दोनों बालकोनी में रखी कुर्सियों पे बैठ गये और बाहर का सीन देखने लगे। कभी-कभी बारिश का थोड़ा सा पानी हमारे ऊपर भी गिर जाता था। मौसम ठंडा हो गया था और ऐसा अंधेरा था कि शाम के पाँच बजे ही ऐसा लग रहा था जैसे रात के आठ-नौ बज रहे हों। मैं चाय़ बनाने उठी तो आँटी ने कहा कि, ऐसे मौसम में जिन या रम पीने में बहुत मज़ा आता है! मैं उनकी बात सुनकर चौंक पड़ी। हालांकि मैं खुद अशफाक के कहने पर उसके साथ कभी-कभी बियर पी लेती थी पर आँटी पीने का शौक रखती होंगी, इस बात की मुझे उम्मीद नहीं थी। मैंने आँटी से कहा कि जिन या रम तो नहीं है क्योंकि अशफाक व्हिस्की पीना पसंद करते हैं... तो आँटी ने कहा कि वही ले आओ।

मैं जा के दो ग्लास और अशफाक की अलमारी से व्हिस्की की बोतल ले आयी। व्हिस्की पीने का ये मेरा पहला मौका था। हम दोनों पैग पीते-पीते बाहर का सीन देखते रहे और इधर उधर की बातें करते-करते बारिश के मज़े लेने लगे। एक छोटा सा पैग पीने से ही जिस्म में थोड़ी सी गर्मी आ गयी। आँटी तो इतनी देर में एक बड़ा पैग पी चुकी थीं और दूसरा पैग खतम होने को था। उन्होंने जोर देकर मेरे लिये अपने जैसा ही बड़ा सा पैग बना दिया। वो मेरे लेफ़्ट साईड में बैठी थीं और ईधर-उधर की बात करते-करते पता नहीं आँटी को क्या सूझा कि मुझसे मेरी सैक्स लाईफ के बारे में पूछने लगी। मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या बताऊँ और व्हिस्की का हल्का सा सुरूर भी छाने लगा था। आँटी एक्सपीरियंस्ड थीं। शायद मेरी खामोशी को ताड़ गयीं और धीरे से पूछा, रात को मज़ा नहीं आता ना??

मैंने ना में सर हिलाया लेकिन कुछ ज़ुबान से बोली नहीं। उन्होंने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और धीरे से दबाया और कहा कि मुझे भी नहीं आता, मैं भी ऐसे ही तड़पती रहती हूँ। और मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर उसका मसाज करने लगी। उन्होंने अपनी सुहाग रात के बारे में बताया जो मेरी सुहाग रात की ही तरह हुई थी और फिर बताया कि कैसे वो अपनी सैक्स की प्यास को बुझाती हैं। मैं हक्की बक्की उनकी कहानी सुन रही थी। उन्होंने बताया कि उनका एक दूर का भाँजा है जो शहर में ही कॉलेज में पढ़ता है और हॉस्टल में रहता है। वो कभी-कभी आँटी की चुदाई करके उनकी प्यासी चूत की प्यास को बुझा देता है। मैं आँटी की कहानी सुन के हैरत में पड़ गयी और सोचने लगी कि मैं अपनी प्यासी चूत की प्यास बुझाने के लिये क्या करूँ।

अब ठंड थोड़ी सी बढ़ गयी पर व्हिस्की के सुरूर और गर्मी से बहुत अच्छा लग रहा था और हम बैठे व्हिस्की पीते हुए बारिश के मज़े ले रहे थे और अपनी अपनी चुदाई कि कहानियाँ एक दूसरे को सुना रहे थे। आँटी अपनी कुर्सी घुमा के मेरी तरफ मुँह करके बैठ गयीं और बीच-बीच में मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर मसल रही थीं और अपनी टाँग बढ़ा कर मेरी सलवार ऊपर खिसकाते हुए अपने सैंडल को मेरी मेरी टाँगों पर हल्के-हल्के फिरा रही थीं और मेरे जिस्म में गर्मी आ रही थी। फ्लैट आठवीं मंज़िल पर होने की वजह से कोई हमें सड़क से देख नहीं सकता था और वैसे भी सड़क इतनी बारिश की वजह से सुनसान ही थी। वैसे मैं इस वक्त थोड़े नशे में थी और इतनी मस्त हो चुकी थी कि मुझे किसी बात का खयाल भी नहीं था। ऊपर से अपनी टाँगों पर उनके सैंडल का प्यारा सा लम्स और बाहर का ठंडा मौसम। फिर आँटी ने सुहाग रात की और अपनी चुदाई की दास्तान शुरू करके मेरे जिस्म में फिर से आग लगा दी थी।

मुझे सुहैल से चुदवाई हुई वो रातें याद आ रही थी जब मेरी चूत में सुहैल का लंबा मोटा लंड घुस के धूम मचा देता था और चूत-फाड़ झटके मार-मार के मेरी चूत को निचोड़ के अपने लंड का सारा रस मेरी चूत के अंदर छोड़ के कैसे मज़ा देता था। मेरा पूरा दिल और दिमाग सुहैल की चुदाई में था। मुझे पता ही नहीं चला के कब आँटी का पैर मेरी सलवार के ऊपर से जाँघों पे फिसलने लगा और मेरे सारे जिस्म में एक मस्ती का एहसास छाने लगा और बे-साख्ता मेरी टाँगें खुल गयीं और मैंने महसूस किया के आँटी का हाई-हील वाला सैंडल मेरी जाँघ से फिसल के टाँगों के बीच सलवार के ऊफर से चूत पे टिक गया और वो चूत का धीरे-धीरे मसाज करने लगी और मुझे मज़ा आने लगा।

मेरी प्यासी चूत पे आँटी के सैंडल के लम्स और मसाज से मुझे अपने स्कूल का एक किस्सा याद आ गया। हम उन दिनो ग्यारहवीं क्लास में थे। सुहैल से चुदाई से पहले की बात है। हुआ ये था कि मेरी क्लासमेट, ताहिरा, मेरे पड़ोस में ही रहती थी और कभी वो मेरे घर आ जाती और हम दोनों मिल कर रात में पढ़ाई करते और एक ही बेड में सो जाते। कभी मैं उसके घर चली जाती और साथ पढ़ाई करते और मैं वहीं उसके साथ उसके बेड में ही सो जाती। एक रात वो मेरे घर आयी हुई थी और हम रात को पढ़ाई कर के मेरे बेड पे लेट गये। मेरा रूम घर में ऊपर के फ़्लोर पे था और मम्मी और डैडी का नीचे। मैं ऊपर अकेली ही रहती थी तो हमें अच्छी खासी प्राईवेसी मिल जाती थी। दोनों पढ़ाई खतम कर के सोने के लिये लेट गये। ताहिरा बहुत ही शरारती थी। उसने अपने मम्मी डैडी को चोदते हुए भी कई बार देखा था। कभी सोने का बहाना कर के कभी विंडो में से झाँक कर और फिर मुझे बताती थी कि कैसे उसके डैडी नंगे हो कर उसकी मम्मी को नंगा कर के चोदते हैं, कभी लाईट खुली रख के तो कभी लाईट बंद कर के। वो चुदाई देखती रहती थी और मुझे बता देती थी कि उसके डैडी ने आज उसकी मम्मी को कैसे चोदा और ये भी बताती कि उसकी मम्मी ने कैसे उसके डैडी के लंड को चूसा और सारी मलाई खा गयी।

हाँ तो वो मेरे साथ बेड मैं थी। हम ऐसे ही बातें कर रहे थे। वो अपने मम्मी और डैडी के चुदाई के किस्से सुना रही थी और अचानक उसने पूछा, किरन तेरा साईज़ क्या है? मैंने पूछा, कौन सा साईज़?, तो उसने मेरी चूचियों को हाथ में पकड़ लिया और पूछा अरे पागल इसका! और हँसने लगी। उसका हाथ मेरे बूब्स पे अच्छा लग रहा था और उसने भी अपना हाथ नहीं हटाया और मैंने भी उससे हाथ निकालने को नहीं कहा और वो ऐसे ही मेरी चूचियों को दबाने लगी। रात तो थी ही और हम ब्लैंकेट ओढ़े हुए थे और लाईट बंद थी। ऐसे में मुझे उसका मेरी चूचियों को दबाना अच्छा लग रहा था। मैंने उसका हाथ नहीं हटाया। मैंने बोला कि मुझे क्या मालूम!, तो उसने कहा ठहर मैं बताती हूँ तेरा क्या साईज़ है! मैंने बोला, तुझे कैसे मालूम? तो वो हँसने लगी और बोली मुझे सब पता है, और वो मेरे ऊपर उछल के बैठ गयी। मैं सीधे ही लेटी थी और वो मेरे ऊपर बैठ कर मेरे बूब्स को मसल रही थी। अब उसने मेरी शर्ट के अंदर हाथ डाल के मसलना शुरू कर दिया तो मुझे और मज़ा आने लगा। मैंने बोला, हाय ताहिरा, ये क्या कर रही है? तो वो बोली कि मेरे अब्बू भी तो ऐसे ही करते हैं मेरी अम्मी के साथ.... मैंने देखा है जब अब्बू ऐसे करते हैं तो अम्मी को बहुत मज़ा आता है..... बोल तुझे भी आ रहा है या नहीं? मैंने कहा, हाँ मज़ा तो आ रहा है...! तो उसने कहा कि बस तो ठीक है, ऐसे ही लेटी रह ना, मज़ा ले बस, और वो ज़ोर ज़ोर से मेरी चूचियों को मसलाने लगी।

मेरे ऊपर बैठे-बैठे ही उसने अपनी शर्ट भी उतार दी और मुझसे बोली कि मैं भी उसके बूब्स को दबाऊँ तो मैं भी हाथ बढ़ा के उसके बूब्स को अपने हाथ में लेकर मसलने लगी। ताहिरा की चूचियाँ मेरी चूचियों से थोड़ी सी बड़ी थीं। लाईट बंद होने से कुछ दिखायी नहीं दे रहा था, बस दोनों एक दूसरे की चूचियों को दबा रहे थे। ऐसे ही दबाते-दबाते वो मेरी टाँगों पे आगे पीछे होने लगी। हमारी चूतें एक दूसरे से मिल रही थीं और एक अजीब सा मज़ा चूत में आने लगा। अब वो मेरे ऊपर लेट गयी और मेरी चूँची को चूसने लगी। मेरे मुँह से आआआआआहहहहह निकल गयी और मैं उसके सर को पकड़ के अपनी चूचियों में घुसाने लगी। थोड़ी देर ऐसे ही चूसने के बाद वो थोड़ा आगे हटी और अपनी चूँची मेरे मुँह में घुसेड़ डाली और मैं चूसने लगी। वो भी आआआआहहहह की आवाज़ें निकाल-निकाल के मज़े लेने लगी।

अब हम दोनों मस्त हो चुके थे। वो थोड़ा सा पीछे खिसक गयी और मेरी चूत पे हाथ रख दिया तो मेरी गाँड अपने आप ही ऊपर उठ गयी। हम अब कोई बात नहीं कर रहे थे बस एक दूसरे से मज़े ले रहे थे। उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और साथ में अपना भी और खुद अपने घुटनों पे खड़ी हो के अपनी सलवार निकाल दी और नंगी हो गयी और मेरी सलवार को भी पकड़ के नीचे खिसका दिया। मैंने भी अपनी गाँड उठा के उसको निकालने में मदद की। अब हम दोनों नंगे थे। अभी हमारी चूतों पे ठीक से बाल आने भी नहीं शुरू हुए थे। एक दम से चिकनी चूतें थीं हम दोनों की। अब फिर से वो ऐसे बैठ गयी जिससे हम दोनों की चूतें टच हो रही थी। वो आगे पीछे होने लगी और बताया कि मेरी अम्मी जब अब्बू के ऊपर बैठती है तो ऐसे ही हिलती रहती है।

हमारी चूतें एक दूसरे से रगड़ खा रही थी और हमें बहुत ही मज़ा आ रहा था। दोनों की चिकनी-चिकनी बिना बालों वाली मसके जैसी चूतें आपस में रगड़ रही थी। फिर वो थोड़ा सा नीचे को हो गयी और मेरी चूत पे किस कर दिया तो मैं पागल जैसी हो गयी और मैंने उसका सर पकड़ के अपनी चूत में घुसा दिया और वो किस करते-करते अब मेरी चूत के अंदर जीभ डाल कर चूसने लगी तो मेरे जिस्म में लहू तेज़ी से सर्क्यूलेट होने लगा और दिमाग में साँय-साँय होने लगा। मुझे लगा जैसे कोई चीज़ मेरी चूत के अंदर से बाहर आने को बेताब है पर नहीं आ रही है और मुझे लगा जैसे सारा कमरा गोल-गोल घूम रहा हो। इतना सारा मज़ा आ गया और मैं अपनी चूत उसके मुँह में रगड़ती रही। थोड़ी देर में ये कंडीशन खतम हो गयी तो वो बगल में आकर लेट गयी और मुझे अपनी टाँगों के बीच में लिटा लिया और मेरा सर पकड़ के अपनी चूत में घुसा दिया। उसकी मक्खन जैसी चिकनी चूत को किस करना बहुत अच्छा लग रहा था और अब उसने मेरे सर को पकड़ के अपनी चूत में घुसाना शुरू कर दिया और मेरे मुँह में अपनी चूत को रगड़ने लगी। उसकी चूत का टेस्ट मुझे कुछ नमकीन लगा पर वो टाईम ऐसा था के हम दोनों मज़े ले रहे थे और फिर उसने मेरे मुँह में अपनी चूत को और भी तेज़ी से रगड़ना शुरू कर दिया और मुँह से अजीब आवाज़ें निकालने लगी और फिर वो शाँत हो गयी। मेरा खयाल है कि स्कूल के दिनो में ऐसी फ्रैंड्स जो एक दूसरे के घर रात बिताती हैं, ये चूचियों को दबाना या चूत को मसाज करना या किस करना सब नॉर्मल सी बात होगी क्योंकि ताहिरा ने मुझे अपनी और दो फ्रैंड्स के बारे में बताया कि वो भी ऐसे ही करती हैं। शायद ये उम्र ही ऐसी होती है।

खैर तो मैं कह रही थी कि आँटी का सैंडल वाला पैर मेरी चूत पे लगने से मेरे जिस्म में एक आग जैसी लग रही थी। मेरा दिल और दिमाग अब ताहिरा और मेरी गुजरी हुई पुरानी हर्कतों से हट कर आँटी की तरफ़ आ गया था। पता नहीं आँटी ने अब तक क्या बोला..... मैं तो अपनी और ताहिरा की गुजरी हुई बातें ही याद कर रही थी। तब के बाद आज किसी फिमेल का लम्स मेरी चूत में महसूस हो रहा था। असल में मुझे ये फीमेल और फीमेल का सैक्स यानी लेस्बियनिज़्म पसंद नहीं है पर वो वक्त ऐसा ही था कि मैं फिर से बहक गयी और आँटी को अपनी चूत दे बैठी।

हम दोनों बालकोनी में ही लगभग आमने-सामने बैठे थे। अब आँटी के सैंडल की हील सलवार के ऊपर से ही मेरी चूत के लिप्स को खोल के ऊपर नीचे हो रही थी। आँटी कभी चूत के सुराख में सैंडल की हील डाल देती तो कभी क्लीटोरिस को मसल देती तो मेरा मस्ती के मरे बुरा हाल हो जाता। चूत में से लगातार जूस निकल रहा था और चूत पूरी तरह से गीली हो चुकी थी। हालांकि मैंने दूसरा पैग पीने के बाद और नहीं लिया था पर अब मेरा नशा और बढ़ने लगा था और मुझसे कुर्सी पर ठीक से बैठा नहीं जा रहा था। आँटी ने तो मुझसे भी ज्यादा व्हिस्की पी रखी थी पर उन्हें आदत थी। इसलिये नशा होने के बावजूद वो मुझसे बेहतर हालत में थीं। मुझे झूमते हुए देख कर उन्होंने मुझे सहारा देकर पहले ज़मीन पर बिठा दिया और मेरी सलवार और पैंटी उतार कर मुझे तकरीबन नंगा कर दिया और फिर मेरी चूत में उंगली करने लगीं। मैं तो नशे में मस्त थीं और बालकोनी में अपनी इस नंगी हालत की मुझे कोई फिक्र नहीं थी। मुझे पता भी नहीं चला कि कब आँटी ने भी अपने सारे कपड़े उतार दिये और मेरा हाथ लेकर अपनी चूत पे रख दिया। जब मेरा हाथ उनकी चूत में लगा तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा हाथ किसी जलती हुई भट्टी या गरम चुल्हे में लगा दिया हो..... इतनी गरम थी आँटी की चूत। मैंने भी आँटी की चूत का मसाज शुरू कर दिया और कभी अपनी उंगली अंदर डाल के सुराख में घुसेड़ देती तो कभी क्लीटोरिस को मसल देती तो आँटी के मुँह से आआआहहहह ऊऊऊऊईईईई जैसी आवाज़ें निकल जाती। दोनों ज़ोर-ज़ोर से एक दूसरे की चूतों का मसाज कर रहे थे और मज़े से दोनों की आँखें बंद हो चुकी थी।

सलमा आँटी ने मुझे लिटा दिया और मेरे पैरों के बीच में बैठ गयीं और झुक कर मेरी टाँगें और पैर चूमने-चाटने लगीं। मैंने गर्दन उठा कर देखा तो दंग रह गयी कि वो मेरे पैरों में बंधे सैंडलों को भी बड़ी शिद्दत से चाट रही थीं। फिर वो मेरी सैंडल की लंबी हील को मुँह में लेकर इस तरह चूसने लगीं जैसे लंड चूस रही हों। ये नज़ारा देख कर मेरी चूत और भी फड़कने लगी। फिर उन्होंने आगे झुककर चूत पे किस किया और अपनी जीभ मेरी चूत के अंदर डाल कर चाटना शुरू किया तो मेरी मुँह से आआआआआआ आआआहहहहह की सिसकरी निकल गयी और मैंने आँटी का सर पकड़ के अपनी चूत में दबा दिया और उसी वक्त मेरी अंगारे जैसी गरम चूत झड़ने लगी। मेरी आँखें बंद हो चुकी थी और मस्ती में मैं गहरी-गहरी साँसें ले रही थी। फिर आँटी मेरे ऊपर सिक्स्टी-नाईन की पोज़िशन में आ गयी और मेरे मुँह पे अपनी चूत को रगड़ने लगी तो मेरा मुँह खुल गया और सलमा आँटी की चूत का इस्तक़बाल किया। उनकी गरम चूत में से नमकीन गाढ़ा जूस निकलने लगा। मैंने आँटी की पूरी चूत को अपने मुँह में लेकर दाँतों से काट डाला तो उनके मुँह से चींख निकल गयी, आआआआहहहाह्ह ओंहओंहओंहओंहओंह आआआआआ ईईईईईईई ऊऊऊऊहहहहह, और उनकी चूत में से जूस निकलने लगा और वो झड़ने लगी। बहुत देर तक हम बिना कोई बात किये ऐसे ही सिक्स्टी-नाईन की पोज़िशन में लेटे रहे। फिर थोड़ी देर के बाद आँटी ने कहा कि आज मैं बहुत दिनों बाद इतना झड़ी हूँ और बहुत मज़ा आया! मेरा भी कुछ ऐसा ही हाल था। अशफाक तो मेरी चूत में आग लगा के खुद झड़ के सो जाते थे और मैं रातों में तड़पती रहती थी। ऐसे में आँटी की चूत को चूसने से बहुत सकून मिला। उस दिन के बाद जब कभी आँटी को झड़ना होता तो वो अपनी चूत को अच्छी तरह से शेव करके मेरे पास आती और फिर हम दोनों व्हिस्की पी कर घंटों तक एक दूसरे की चूत चाटते और आपस में अपनी चूतें रगड़ कर मज़ा करते। सलमा आँटी के पास दो तरह के डिल्डो भी थे। एक तो करीब दो फुट लंबा डबल डिल्डो था जिसके दोनों तरफ लंड थे और दूसरा बेटरी से चलने वाला नौ इंच लंबा डिल्डो था। सलमा आँटी किसिंग में तो बेहद माहिर थीं और उनके रसीले होंठों को चूमना और आपस में एक दूसरे के मुँह में ज़ुबाने डाल कर चूसना मुझे बेहद अच्छा लगता था। इसके अलावा सलमा आँटी को ऊँची हील के सैंडलों का बेहद जुनून था और मेरे साथ लेस्बियन चुदाई के वक़्त खुद भी हाई हील के सैंडल पहने रहती और मुझे भी सैंडल पहने रखने को कहतीं। उन्हें मेरे पैर और सैंडल चाटने में बेहद मज़ा आता था और फिर मुझे भी इसमें मज़ा आने लगा।

हकीकत में, उसके कुछ ही दिनों बाद मेरी चुदाई अपने बॉस के साथ होने लगी थी लेकिन मैं आँटी को इस बात का पता नहीं चलने देना चाहती थी। मैं अपना हर सीक्रेट उन्हें नहीं बताना चाहती थी, इसी लिये आँटी से नहीं कहा और उनके सामने ऐसी बनी रहती जैसे मेरी चूत बरसों कि प्यासी हो और उनके साथ मुझे बहुत ही मज़ा आता था।

हुआ यूँ कि मैं घर में अकेले रहते-रहते बोर होने लगी थी। सिवाय खाना पकाने के और कोई काम ही नहीं था। हर दूसरे दिन एक धोबन आ के हमारे कपड़े धो जाया करती थी। बोर होने की वजह से मैंने अशफाक से कहा कि अगर वो बुरा ना माने तो मैं कोई जोब कर लूँ ताकि मैं बिज़ी रह सकूँ। अशफाक को भी अपने बिज़नेस से फ़ुर्सत नहीं मिलती थी और अब तक तो उसको पता चल ही गया था कि मेरी चूत उसके लंड से और उसकी चुदाई से मुतमाईन नहीं है तो उसने कहा, ठीक है मेरा एक फ्रैंड है, वो अपनी खुद की कंपनी चलाता है, मैं उससे बात कर लूँगा, तुम घर बैठे ही उसका काम कर देना ताकि तुम बिज़ी भी रहो और तुम्हारा दिल भी लगा रहे। फिर एक दिन अशफाक ने बताया कि उसने अपने दोस्त को डिनर पे बुलाया है और साथ में काम की भी बात कर लेते हैं, तो मैं खुश हो गयी और अच्छे से अच्छा खाना बना के अपने होने वाले बॉस को खिलाना चाहती थी इसलिये मैं किचन में डिनर की तैयारी में बिज़ी हो गयी।

रात के खाने के टाईम से पहले ही अशफाक का दोस्त आ गया। कॉलबेल बजी तो अशफाक ने दरवाजा खोला और हेलो, हाऊ आर यू, कह कर अंदर बुला लिया। मैं देख के दंग रह गयी। वो तो एक अच्छा खासा स्मार्ट आदमी था। तकरीबन छः फ़ुट के करीब उसकी हाईट होगी, गोरा रंग, चौड़े कंधे। हट्टा कट्टा मज़बूत जवान लग रहा था। उसे देखते ही मेरी चूत में एक अजीब एक्साइटमेंट सी होने लगी और मुझे लगा के मेरी चूत गीली हो रही है। मुझे खुशी हुई कि मैंने उस दिन ठीक से मेक-अप करके चूड़ीदार सलवार और स्लीवलेस कमीज़ पहनी थी जिसका गला भी लो-कट था। खुशकिस्मती से मैंने चार इंच उँची हील के सैंडल पहने हुए थे जिससे मेरी हाईट बढ़ कर पाँच फुट सात इंच के करीब हो गयी थी उसकी ऊँचाई के मुनासिब लग रही थी। अशफाक ने इंट्रोड्यूस करवाया और कहा कि ये मेरे बचपन का दोस्त और क्लासमेट सुशांत कुमार श्रीवास्तव है जो अपनी फायनेंस कंपनी चलाता है। दोनों स्कूल से कॉलेज खतम होने तक क्लास-मेट रहे हैं और एक दूसरे से बहुत ही फ्री हैं। ऑफिस में वो एस-के के नाम से फेमस है। और फिर अशफाक ने कहा, एस-के! ये मेरी वाइफ है किरन! हम दोनों ने एक दूसरे को सलाम किया और हम सब अंदर ड्राईंग रूम में आ के सोफ़े पे बैठ गये। अशफाक और एस-के बैठ के व्हिस्की पीते हुए बातें करने लगे। अशफाक के कहने पर मैंने भी एक पैग पिया और फिर मैं खाना टेबल पे रखने के लिये चली गयी।

टेबल रेडी हो गयी तो मैंने दोनों से कहा कि चलिये डिनर रेडी है! वाश बेसिन पे हाथ धो के वो दोनों आ गये। सब मिलकर खाना खाने लगे। एस-के मेरे बनाये हुए खाने की बहुत तारीफ कर रहे थे। खाने में परांठे, दम का चिकन, आलू गोश्त का कोरमा, कबाब, टमाटर की चटनी, पुलाव बना के उस पे उबले अंडों को आधा काट कर सजा के रखा था और कस्टर्ड और आईसक्रीम थी। खाना सच में बहुत लज़ीज़ था। अशफाक कभी मुझे कुछ देता तो कभी एस-के कि प्लेट में कुछ डाल देता। खाना खाने के बाद फिर से वो दोनों ड्राईंग रूम में जा के सोफ़े पे बैठ गये और मैं टेबल साफ़ कर के वहीं आ गयी और हम सब साथ बैठ के व्हिस्की पीने लगे और बातें करने लगे।

अशफाक ने कहा, यार एस-के! देखो तो किरन घर में अकेली रहती है और अकेले रहते-रहते बोर हो गयी है..... वो अपने आप को मसरूफ रखने के लिये कोई काम करना चाहती है...... तुम्हारे पास अगर कोई ऐसा काम हो तो बताना।

एस-के ने कहा, ये तो बहुत अच्छी बात है, मेरे पास डेटा एंट्री करने का काम पड़ा हुआ है। मेरे पास डेटा एंट्री का जो क्लर्क था वो चला गया। किरन ऑफिस से इनवोयस और वाऊचर घर ला सकती है और घर बैठे-बैठे ही मेरा काम कर सकती है। ऑफिस तो तुम्हारे घर के करीब ही है। किरन ऑफिस आके, डेली या वीकली, काम लेकर आ सकती है और घर बैठे ही काम कर सकती है। मैं शुरू में डेली आके चेक करता रहुँगा और उसको गाईड करता रहुँगा। मेरे पास ऑफिस में एक एक्स्ट्रा कंप्यूटर भी है, मैं वो भी किरन के पास भेज दुँगा..... यहीं किसी रूम में रख लेना और वो आराम से घर बैठे ही काम कर लेगी।

अशफाक ने कहा कि ये तो बहुत अच्छी बात है, किरन कल ही तुम्हारे ऑफिस अआ जायेगी और काम भी देख लेगी!

दूसरे दिन मैं बेहद अच्छे से तैयार हो के एस-के के ऑफिस गयी। मैं साड़ी कुछ खास मौकों पर बहुत कम पहनती हूँ लेकिन उस दिन मैंने फिरोज़ी रंग की साड़ी इस तरह बांधी थी की मेरी पतली कमर और नाभी दिखायी दे और मेरा स्लीवलेस ब्लाऊज़ भी काफी लो-कट और लगभाग बैकलेस था। मैंने ब्रा नहीं पहनी थी क्योंकि मेरा ब्लाऊज़ किसी ब्रा से ज्यादा बड़ा नहीं था। साथ ही मैं चार इंच ऊँची हील के काले रंग के स्ट्रैपी सैंडल पहनना नहीं भूली क्योंकि एक तो इससे मेरी हाईट पौने छ: फुट के करीब हो गयी थी और दूसरा ये कि उँची हील के सैंडलों से मेरा फिगर और कयामत-खेज़ हो गया था क्योंकि मेरी छातियाँ बाहर को उघड़ रही थीं और चूतड़ भी और ज्यादा उभर आये थे और चाल में भी नज़ाकत आ गयी थी। मैंने अपने लंबे बाल खुले ही रखे थे।

ऑफिस अच्छा खासा बड़ा था और नीट और क्लीन था। सारे ऑफिस में कार्पेट बिछी हुई थी और एस-के का ऑफिस तो एक दम से शानदार था। एक बहुत बड़ी सेमी-सर्क्यूलर टेबल थी जिसके एक साईड में छोटी सी कंप्यूटर टेबल भी थी जिस पर कंप्यूटर, एल-सी-डी मॉनिटर और नीचे प्रिंटर भी रखा हुआ था। डोर को अंदर से लॉक करने ये खोलने के लिये उसके पास आटोमेटिक बटन था। उसके रूम के बाहर एक छोटा सा कैमरा था जिससे उसको पता चल जाता था कि बाहर कौन वेट कर रहा है और उसको मिलना हो तो वो आटोमेटिक लॉक का बटन प्रेस कर देता जिससे दरवाजा खुल जाता और फिर अंदर से खुद-ब-खुद बंद भी हो जाता। ऑफिस सेंट्रली एयर कंडिशंड था। सब मिलाकर बहुत शानदार ऑफिस था। ऑफिस का सारा स्टाफ अपने-अपने काम में बिज़ी था।

मैं ऑफिस गयी तो एस-के ने मुझे फौरन अंदर बुला लिया और अपनी चेयर से खड़ा हो के मुझसे शेक हैंड किया तो उसका गरम हाथ मेरे हाथ में आते ही मेरे जिस्म में बिजली दौड़ने लगी और मेरी चूत गीली होने लगी। मैंने कहा कि सर आपका ऑफिस तो वंडरफुल है, एक दम से शानदार। उसने कहा कि देखो किरन मुझे ये सर वगैरह कहने की ज़रूरत नहीं है। तुम मेरे लिये किरन हो और मैं तुम्हारे लिये सुशांत, तुम मुझे सब की तरह एस-के भी कह सकती हो लेकिन अगली बार से सर नहीं कहना, ठीक है? मैंने मुस्कुराते हुआ कहा, ठीक है सर! और हम दोनों हँस पड़े। एस-के ने कॉफी के लिये ऑर्डर दे दिया जो थोड़ी ही देर में आ गयी। कैपेचिनो कॉफी की फ़र्स्ट क्लास खुशबू से सारा ऑफिस महक उठा। दोनों कॉफी पीने लगे। उसके बाद उसने किसी को बुला के एक कंप्यूटर, मॉनिटर और प्रिंटर अपनी कार में रखने के लिये कहा और थोड़ी देर के बाद वो मुझे अपनी कार में लेकर मेरे घर आ गया।

हमारे घर में एक स्पेयर रूम भी है जिस में कंप्यूटर रख दिया गया। कंप्यूटर की स्पेशल टेबल तो नहीं है लेकिन घर की ही एक टेबल पे रख दिया गया और एस-के ने कंप्यूटर के कनेक्शन लगा दिये और कंप्यूटर स्टार्ट कर के मुझे बता दिया। कनेक्शन लगाने के बाद वो हाथ धोने के लिये बाथरूम में चला गया तो मैं कॉफी बनाने लगी। हम दोनों ड्राईंग रूम में आ के बैठ गये और कॉफी पीने लगे। एस-के और मैं इधर-उधर की बातें करने लगे। वो अपने स्कूल और कॉलेज के किस्से सुनाने लगे कि कैसे वो कॉलेज में बदमाशियाँ किया करते थे और लड़कियों को छेड़ते रहते थे। मैंने कहा कि आप पर तो लड़कियाँ मरती होंगी! तो वो हँस पड़ा और कहा नहीं ऐसी बात नहीं है, बस हमारे कुछ क्लासमेट और कुछ जूनियर लड़कियाँ थीं, हम (एक आँख दबा के बोला) मस्ती करते थे। इतनी देर में लंच का टाईम हो गया तो मैंने कहा कि यहीं रुक जायें और साथ में खाना खा कर ही जाना तो उसने कहा कि किरन तुम जैसी क्यूट लड़की के साथ किसे लंच या डिनर करना पसंद न होगा, पर सच में मुझे थोड़ा सा काम है..... हम किसी और दिन लंच या डिनर ले लेंगे साथ में। जब उसने मुझे क्यूट लड़की कहा तो मेरा चेहरा शरम से लाल हो गया जिसको उसने भी नोट किया। उसने कहा कि मैं कल ऑफिस आ जाऊँ, तब तक वो सारी चीज़ें रेडी रखेगा मेरे लिये।

दूसरे दिन मैं फिर सजधज कर ऑफिस गयी तो उसने मुझे अपने कंप्यूटर के प्रोग्राम पर ही बता दिया के कैसे एंट्रिज़ करनी हैं और कहा कि ये प्रोग्राम, मेरे पास जो कंप्यूटर भेजा है, उस पर भी है। काम उतना मुश्किल नहीं था, जल्दी ही समझ में आ गया। हाँ कुछ चीज़ें ऐसी थी जो कि समझ में नहीं आ रही थी। कुछ केलक्यूलेशन थे कुछ एडिशन और सबट्रेक्शन थे पर उसने कहा कि जो भी मैं कर सकती हूँ करूँ और जो मेरी समझ में नहीं आ रहा है, वो लंच टाईम पे मेरे पास आ कर मुझे समझा देगा। मैं इनवोयस का बंडल उठा के घर चली आयी।

ऑफिस से घर, तकरीबन पंद्रह-बीस मिनट की वॉक है। घर आने के बाद सारे इनवोयस और वाऊचर को अपने सामने रख कर पहले तो ऐसे ही समझने की कोशिश करती रही और थोड़ी देर के बाद एंट्री करना शुरू किया। नया-नया काम शुरू किया था तो काम करने में मज़ा आ रहा था और जोश के साथ काम कर रही थी। मुझे टाईम का पता ही नहीं चला। शाम के साढ़े तीन हो गये और जब एस-के ने बेल बजायी तो मैंने टाईम देखा। उफ़ ये तो साढ़े तीन हो गये।

मैंने डोर खोला। एस-के अंदर आ गया और हम दोनों कंप्यूटर वाले रूम में चले आये। पता नहीं एस-के की पर्सनैलिटी में क्या था कि मैं उसको देखते ही अपने होश खो बैठती और गीली होना शुरू हो जाती। उसने काम देखना शुरू किया। कुछ मैंने गलत किया था कुछ सही किया था। उसने केलक्यूलेशन वगैरह करना सिखाया और कुछ देर बैठ कर कॉफी पी कर चला गया। जितनी देर वो मेरे पास बैठा रहा, उसके जिस्म से हल्की उठती हुई पर्फ़्यूम की खुशबू से मैं मस्त होती रही। उसके साथ बैठना मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मैं तो ये सोचने लगी के एस-के यहीं मेरे साथ ही रहे तो कितना अच्छा हो और मेरी गरम और प्यासी चूत को चोद-चोद के अपनी क्रीम चूत के अंदर डाल के उसकी प्यास बुझा दे और मेरी गरम चूत को ठंडा कर दे। पर ये मुमकिन नहीं था। एक तो वो मैरिड था और रात मेरे साथ नहीं रह सकता था, दूसरे ये कि ऑफिस के दूसरे काम भी तो देखने होते हैं। मैं एस-के को अपने दिल की बात ना कह सकी पर मेरा दिल चाह रहा था के वो मेरे साथ ही रहे। वो मेरा काम देख के और कुछ काम समझा के अपने घर चला गया और मैं पता नहीं क्यों उदास हो गयी।

इसी तरह से एक हफ़्ता गुज़र गया। कोई खास बात नहीं हुई बस ये कि मैं उसके लिये हर रोज़ अच्छे से तैयार होती और जितनी देर वो मेरे करीब रहता, मैं मस्त रहती और पूरे मूड में रहती, पर उसके चले जाने के बाद मैं उदास हो जाती। मैं ऑफिस से तकरीबन दो हफ़्तों का काम ले आयी थी तो ऑफिस भी नहीं जाना था। सुबह उठ के नाश्ता कर के, फिर अच्छे से तैयार होकर, काम शुरू करती और काम के बीच-बीच में अपने काम भी करती रहती, जैसे खाना बनाना या और भी छोटे-मोटे काम। धोबन तो हर दूसरे दिन आ कर कपड़े धो जाया करती थी। इसी तरह से रुटीन चलने लगी। सलमा आँटी को भी पता चल गया था के मैं दिन में बिज़ी रहती हूँ तो वो भी मुझे दिन के टाईम पे डिस्टर्ब नहीं करती और कभी उनका मन करता तो वो शाम को या रात को किसी टाईम पे आ जाती और गप्पें लगाने लगती और साथ में हम वही करते जो बालकोनी में किया था और फिर आँटी चली जाती और मैं मस्त हो के सो जाती। पहले भी जब अशफाक मेरी चूत में आग लगा देता और बुझा नहीं पता तो मैं कभी-कभी बैंगन, मोमबत्ती या लंड की शक्ल की कोई और चीज़ अपनी चूत में डालकर मज़ा ले लेती थी पर आजकल काम में बिज़ी रहने के बावजूद मेरी ये हरकत बहुट बढ़ गयी थी। कंप्यूटर पर डेटा ऐंट्री करते-करते एस-के की याद आ जाती तो उसके लंड का तसव्वुर करते हुए मैं खुद ही अपनी चूत को कोई भी लंड के शक्ल की चीज़ से चोद-चोद कर झड़ जाती और फिर अपना काम में लग जाती।

एक दिन ऐसे हुआ के मैं काम कर रही थी और एस-के आ गये और मेरे पीछे खड़े हो कर काम देखने लगे। कभी-कभी कोई मिस्टेक हो जाती तो बता देते। मैं काम में बिज़ी थी। बीच में मुड़ कर देखा तो एस-के मेरे पीछे नहीं थे। मैंने सोचा कि शायद कुछ काम होगा और चले गये होंगे और मैं उठ कर बाथरूम में गयी। बाथरूम का डोर खोल के अंदर पैर रखते ही एक शॉक लगा। एस-के वहाँ खड़ा पेशाब कर रहा था और उसने अपना इतना मोटा गधे जैसा बे-खतना लौड़ा हाथ में पकड़ा हुआ था। पूरा हाथ में पकड़ने के बाद भी उसका लंड उसके हाथ से बाहर निकला हुआ था और अभी वो इरेक्ट भी नहीं था। मैं एक ही सेकेंड के अंदर पलटी और ओह सॉरी कह कर बाहर निकल गयी और सोचने लगी के अभी उसका लंड अकड़ा नहीं है तो ये हाल है उसके लौड़े का और जब अकड़ जायेगा तो क्या हाल होगा और ये तो लड़कियों की चूतें फाड़ डालेगा। इसी सोच के साथ मैं दूसरे बाथरूम में चली गयी और पेशाब करके वापस आ गयी और अपने काम में लग गयी। एस-के फिर से मेरे पीछे आ कर खड़ा हो गया और मेरा काम देखने लगा। मैं काम तो कर रही थी पर मेरा सारा ध्यान उसके लंड में था और उसका लंड जैसे ही मेरे ज़हन में आया, मेरी चूत गीली होनी शुरू हो गयी। एस-के को भी पक्का यकीन था के मैंने उसके लंड को देख लिया है और औरों की तरह मैं भी हैरान रह गयी हूँ।

मैं काम में बिज़ी थी और वो पीछे खड़ा था। अब उसने मेरे कंधे पे हाथ रख दिया और कहा कि किरन तुम्हारा ध्यान किधर है? मैं घबड़ा गयी और सोचने लगी के उसको कैसे पता चला कि मैं दिल में क्या सोच रही हूँ। मैं खामोश रही तो उसने कहा कि देखो तुमने कितनी एंट्रिज़ गलत कर दी हैं। मैं और घबरा गयी क्योंकि सच में मेरा दिल काम में था ही नहीं। मेरा दिमाग तो एस-के के लंड में ही अटक के रह गया था। मैं घर में होने के बावजूद मैं काफ़ी सजधज कर और अच्छे कपड़े पहन कर काम करती थी क्योंकि एस-के कभी भी आ सकता था। लो-कट गले वाले स्लीवलेस और टाईट सलवार-कमीज़ और साथ में उँची हील के सैंडल पहनना नहीं भूलती थी। कभी-कभार साड़ी भी पहनती थी|

उस दिन भी मैंने स्काई ब्लू कलर की स्लीवलेस कमीज़ और सफेद सलवार पहनी थी जो मेरे जिस्म पे बहुत अच्छी लग रही थी। मेरी कमीज़ का गला भी काफी लो-कट था और चूछियों का क्लीवेज काफी हद तक नुमाया हो रहा था। मेरे कंधे खुले हुए थे और एस-के के दोनों हाथ मेरे कंधों पे थे। उसके गरम हाथों के लम्स से मेरा सारा जिस्म जलने लगा और मेरी ज़ुबान लड़खड़ाने लगी। मैं कुछ बोलना चाहती थी और ज़ुबान से कुछ और निकल रहा था। मेरे सारे जिस्म में जैसे बिजली का करंट दौड़ रहा था और दिमाग में साँय साँय होने लगी थी।

एस-के के दोनों हाथ अब मेरे कंधों से स्लिप हो के मेरी चूचियों पे आ गये थे और मेरी आँखें बंद होने लगी थी। पहले कमीज़ के ऊपर से ही दबाता रहा और फिर बिना हुक खोले ऊपर से ही कमीज़ के अंदर हाथ डाल दिये। क्योंकि मैंने लो-कट कमीज़ के नीचे ब्रा नहीं पहनी थी तो उसके हाथ डायरेक्ट मेरी चूचियों के ऊपर आ गये और वो उनको मसलने लगा। मेरी कुर्सी सेक्रेटरी चेयर टाइप कि थी जिस में नॉर्मल कुर्सी की तरह से बैक-रेस्ट नहीं था बल्कि पीठ की जगह पर एक छोटा सा रेस्ट था और कुर्सी के बैठने कि जगह से बैक-रेस्ट तक पतली सी प्लास्टिक की पट्टी लगी हुई थी जिससे मेरा पीछे से सारा जिस्म एक्सपोज़्ड था, सिर्फ मेरी पीठ का वो हिस्सा छोड़कर जहाँ बैक रेस्ट का छोटा सा कुशन था। एस-के मेरे और करीब आ गया तो उसकी पैंट में से उसके लंड का लम्स मुझे मेरे जिस्म पे महसूस होने लगा। मैं तो उसका हाथ चूचियों पे महसूस कर के पहले से ही गीली हो चुकी थी और जब लंड मेरे जिस्म से लगा तो मैं अपनी जाँघें एक दूसरे से रगड़ने लगी और एक ही मिनट में झड़ गयी और मेरे मुँह से एक लंबी सी आआआआहहहहह निकल गयी और मैं अपनी कुर्सी पे थोड़ा सा और आगे को खिसक गयी और मेरे पैर खुद-ब-खुद खुल गये। मेरी जाँघें और टाँगें मेरे चूत के रस से भीग गयीं और मेरी आँखें बंद हो गयीं और मैं रिलैक्स हो गयी। मेरी सलवार बिल्कुल भीग गयी और मुझे अपना रस टाँगों से बह कर अपने पैरों के तलवों और सैंडलों के बीच में चूता हुआ महसूस हुआ। इतना रस था कि ऐसा लग रहा थ जैसे मेरा पेशाब निकल गया हो। अब मुझे यकीन हो गया कि आज मेरे दिल कि मुराद पूरी होने वाली है।

एस-के मेरी चूचियों को मसल रहा था और मैं इतनी मस्त हो चुकी थी कि दिखावे की मुज़ाहमत भी नहीं कर सकी और मेरे हाथ उसके हाथ पे आ गये और मैं उसके हाथों को सहलाने लगी। उसने मेरी दोनों चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगा और निप्पलों को पिंच करने लगा। मैं इतनी मस्त हो चुकी थी कि अपने ही हाथों से अपनी कमीज़ के हुक खोलने लगी। हुक खोल कर कमीज़ ढीली करते हुए ज़रा नीचे खिसका दी और अब वो मेरी चूचियों को अच्छी तरह से मसल रहा था और कह रहा था कि, आअहह किरन! क्या मस्त चूचियाँ हैं, लगाता है अशफाक इन्हें दबाता नहीं है। मैं कुछ नहीं बोली और खामोश रही। वो मेरे पीछे से ही झुक कर मेरी गर्दन पे किस करने लगा और उसके लिप्स मेरे जिस्म पे लगते ही मेरे जिस्म में एक करंट सा दौड़ने लगा। फिर ऐसे ही किस करते-करते वो झुके हुए ही मेरी चूचियों को किस करने लगा तो मेरे हाथ बेसाखता उसकी गर्दन पे चले गये और मैं उसको अपनी तरफ़ खींचने लगी।

अब एस-के मेरे पीछे से हट कर मेरे सामने आ गया था। उसकी पैंट में से उसका लंड बाहर निकलने को बेताब था। उसने मेरा हाथ पकड़ा और मेरे हाथ को अपने लंड पे रख दिया और सच मानो, मैं अपना हाथ वहाँ से हटा ही नहीं सकी और उसने मेरे हाथ को ऐसे दबाया जैसे मेरा हाथ उसके लंड को दबा रहा हो। उसने अपनी पैंट की ज़िप खोल दी और बोला कि, किरन! इसे बाहर निकाल लो, तो मैंने उसका अंडरवीयर नीचे को खींच दिया और उसका लंड बाहर निकाला तो वो एक दम से उछल के मेरे मुँह के सामने आ गया और मैं तो सच में डर ही गयी। इतना लंबा मोटा बिला-खतना लंड और उसका मशरूम जैसा चिकना सुपाड़ा चमक रहा था और जोश के मारे हिल रहा था। मेरे मुँह से निकल गया, हाय अल्लाह!! ये क्या है एस-के? इतना बड़ा और मोटा..... ये तो किलर है.... ये तो जान ही ले लेगा! तो वो हँसने लगा और बोला कि आज से ये तुम्हारा ही है, जब चाहो ले लेना और फिर उसने अपनी पैंट नीचे करके उतार दी।

उसका लंड इतना मोटा और लंबा वो भी बिला-खतना लंड देख कर मैं तो सच में घबरा गयी थी और मन में ही सोचने लगी कि ये तो मेरी चूत को फाड़ के गाँड में से बाहर निकल जायेगा। इतना मस्त लंड और उसका सुपाड़ा भी बहुत ही मोटा था, बिल्कुल हेलमेट की तरह से, जैसे कोई बहुत बड़ा चिकना मशरूम हो और लंड के सुपाड़े का सुराख भी बहुत बड़ा था। मैंने कभी इतना बड़ा और मोटा लंड नहीं देखा था। और पहली दफा बिला -खतना लंड देख रही थी| उसका लंड बहुत गरम था। हाथ में लेते ही मुझे लगा जैसे कोई गरम-गरम लोहे का पाइप पकड़ लिया हो। लगाता है वो झांटें शेव करता था। उसका लंड एक दम से चिकना था और बिना झाँटों वाला लंड बेहद दिलकश लग रहा था। उसने अपनी शर्ट भी उतार दी तो मैं उसके नंगे जिस्म को देखती ही रह गयी। सारे जिस्म पे हल्के-हल्के से नरम-नरम बाल जो बहुत सैक्सी लग रहे थे और मसक्यूलर बॉडी। उसने मुझे चेयर पे से उठाया और मेरे हाथ पीछे कर के मेरी कमीज़ को निकाल दिया और साथ में मेरी सलवार का नाड़ा उसने एक ही झटके में खोल दिया और मेरी टाँगों से चिपकी हुई भीगी सलवार एक-एक करके मेरी दोनों टाँगों और सैंडलों से नीचे खींचते हुए उतार दी।

मैं एक दम से नंगी हो चुकी थी और वो भी। चार इंच ऊँची हील के सैंडल पहने होने के बाद भी मेरी हाईट एस-के की हाईट से काफी कम थी और जब उसने मुझे खींच के अपने जिस्म से लिपटा लिया तो उसका लंड मेरे पेट में घुसता हुआ महसूस होने लगा। वो लोहे की तरह से सख्त था और मेरे पेट में ज़ोर से चुभ रहा था और मेरी चूचियाँ हम दोनों के जिस्म के बीच में चिपक गयी थीं। उसका नंगा जिस्म मेरी चूचियों को टच होते ही मेरे निप्पल खड़े हो गये। इसी तरह से वो मुझसे लिपटा रहा। मैं भी ज़ोर से उसको पकड़े रही और अपनी ग्रिप टाइट कर ली। मेरी चूत का हाल तो मत पूछो। उस में से जूस ऐसे निकल रहा था जैसे कोई नल खुला हो और उस में से पानी निकल-निकल के बह रहा हो। उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड से लगाया तो मेरे जिस्म में झुरझुरी सी आ गयी। पहले तो मैंने डर के मारे अपना हाथ हटा लिया पर एस-के ने फिर से मेरा हाथ अपने लंड पे रखा तो मैं उसको धीरे से दबाने लगी और दिल में सोचने लगी कि आज मेरी छोटी सी चूत की खैर नहीं। आज तो ज़रूर मेरी चूत फटने वाली है। एस-के के हाथ मेरे जिस्म पे फिसल रहे थे, कभी चूचियों पर तो कभी गाँड पर, और जब उसका हाथ मेरी चिकनी चूत पे लगा तो मैं बहुत ज़ोर से काँपने लगी और साथ में ही झड़ने लगी तो एस-के बोला, वॉव किरन, तुम्हारी चूत तो मक्खन जैसी चिकनी और समंदर जैसी गीली है..... मज़ा आयेगा इसे चोदने में। और जब उसने अपनी मोटी उंगली मेरी छोटी सी चूत के अंदर डाली तो मानो ऐसे महसूस हुआ कि कोई छोटा सा लंड ही घुस गया हो। वो मेरा जूस उंगली में लेकर चूसने लगा और बोला, वाह तुम्हारी मीठी चूत का जूस भी बहुत मीठा है, और फिर से मेरी चूत में अपनी उंगली डाल के मेरी चूत का जूस निकाल के मेरे मुँह में दे दिया और कहा कि तुम भी टेस्ट करो कि तुम्हारी चूत का जूस कितना मीठा है। मैंने अपनी चूत का जूस चाट तो लिया पर मस्ती में मेरी कुछ समझ में नहीं आया कि टेस्ट कैसा है।

कंप्यूटर की टेबल काफी बड़ी थी। कंप्यूटर रखने के बाद भी काफी जगह रहती थी तो एस-के ने मुझे मेरे बगल से पकड़ कर उठा लिया और मुझे टेबल पे बिठा दिया और वो नीचे खड़े-खड़े मेरी चूचियों को दोनों हाथों से मसलने लगा और एक के बाद दूसरी चूँची को चूसने लगा और निप्पलों को काटने लगा। मैं बहुत ही मस्त और गरम हो गयी और उसके अकड़े हुए लंबे लंड को अपने हाथों से पकड़ लिया। मैं उसके लंड को अपने दोनों हाथों से पकड़े हुए थी लेकिन उसका लंड फिर भी मेरे दोनों हाथों के थोड़ा सा बाहर निकल रहा था और मैं उसके लंड को अपने पूरे हाथ में पकड़ नहीं पा रही थी। कितना मोटा और बड़ा था उसका लंड जो मेरे हाथ में नहीं आ रहा था। मैं उसके लंड को दोनों हाथों से पकड़ कर आगे पीछे करने लगी। वो मेरे सामने खड़ा था और उसका लंड मेरे जाँघों पे लग रहा था। मैं खुद थोड़ा सा टेबल पे सामने को खिसक गयी और टेबल के किनारे पे आ गयी तो उसका लंड अब मेरी चूत पे लगने लगा जिसमें से निकलता हुआ प्री-कम मेरी चूत के अंदरूनी हिस्से को चिकना कर रहा था। मैंने अपनी टाँगें थोड़ी और खोल लीं और उसके बैक पे क्रॉस कर लीं और उसे अपनी तरफ़ खींचने लगी। उसके लंड के सुपाड़े को अपनी चूत के लिप्स के अंदर रगड़ना शुरू कर दिया और इतना एक्साइटमेंट था कि उसके प्री-कम से चिकने लंड का सुपाड़ा चूत के अंदर लगने से मैं जल्दी ही झड़ने लगी। इतना बड़ा तगड़ा लंड देख के डर भी लग रहा था और मज़ा भी आ रहा था।

वो कभी मेरी चूचियों को मसलता तो कभी मेरी गाँड को दबाता। मेरा तो मस्ती के मारे बुरा हाल था। उसने चेयर को टेबल के करीब खींच लिया और उसपे बैठ गया और मेरी टाँगों और जाँघों पे अपने होंठ रख दिये। मैं टेबल के पूरे किनारे पे आ गयी और अपने हाथों से उसका सर पकड़ के अपनी चूत पे दबा दिया और अपनी टाँगें उसके कंधों पे रख के उसको अपनी तरफ़ खींचने लगी। उसका मुँह मेरी चूत पे लगते ही मैं फिर से झड़ने लगी। मैं आज बहुत मस्ती मैं थी, एक तो ये कि आज से पहले कभी इतना बड़ा और इतना मस्त लंबा-मोटा और लोहे जैसा सख्त लंड देखा भी नहीं था और दूसरे ये कि अशफाक तो बस आग लगाना ही जानता था, आग बुझाना नहीं। आज मुझे पक्का यकीन था के मेरी इतने महीनों से जलती चूत में लगी आग आज इस तगड़े लंड से बुझ जायेगी। मेरे हाथ उसके सर को पकड़े हुए थे और मैं उसके सर को चूत के जितना करीब हो सकता था, दबा लेना चाहती थी। वो चाटता रहा और उसकी ज़ुबान मेरी चूत के अंदर बहुत मज़ा दे रही थी। कभी-कभी तो पूरी चूत को अपने दाँतों से पकड़ के काट लेता तो मेरी सिसकरी निकल जाती। मेरी आँखें बंद थी। ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओहहहह, बेइंतेहा मज़ा आ रहा था। चूत बेहद गीली हो चुकी थी और जूस लगातार निकल रहा था। पता नहीं कितने टाईम मैं झड़ गयी और एस-के सारा जूस पीता रहा।

थोड़ी देर के बाद एस-के खड़ा हो गया और मुझे उठा लिया तो मेरी टाँगें उसकी बैक पे लिपट गयीं और मैं उसके बंबू जैसे लंड पे बैठ गयी और वो मुझे ऐसे ही उठाये-उठाये बेडरूम में ले आया और मुझे ऐसे आधा बेड पे लिटा दिया कि हाई हील सैंडल पहने मेरे पैर ज़मीन पर थे और मेरे घुटने मुड़े हुए थे और मेरा आधा जिस्म बेड के किनारे पे था। अब एस-के फिर से ज़मीन पे बैठ गया और मेरी चूत को सहलाने लगा और कहने लगा कि, वॉव किरन, क्या मक्खन जैसी चिकनी चूत है.... मस्त मलाई जैसी चूत.... लगाता है आज ही झाँटें साफ़ की हैं तुमने। मैं कुछ भी नहीं बोल सक रही थी। मस्ती में आँखें बंद थी और गहरी-गहरी साँसें ले रही थी। थोड़ी देर ऐसे ही चूत को सहलाते-सहलाते उसने मेरी चूत को एक बार फिर से मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और चूत में से जूस लगातार निकलने लगा और मेरी चूत में आग लगने लगी। मेरी टाँगें उसकी गर्दन पे थीं और मैं उसके सिर को पकड़ के अपनी चूत पे दबा रही थी और अपनी गाँड हिला-हिला के अपनी चूत उसके मुँह में रगड़ रही थी। मेरी चूत में से जूस निकलता रहा और मैं झड़ती रही। थोड़ी देर के बाद वो अपनी जगह से उठा और अपने लंड के मशरूम जैसे सुपाड़े को मेरी चूत के लिप्स के बीच में रख दिया तो मैं तभी उसके लंड को अपने हाथ में लेकर अपनी चूत में रगड़ने लगी। लंड का प्री-कम और चूत का जूस, दोनों मिल कर मेरी नाज़ुक चूत को गीला कर चुके थे और मेरी चूत बेहद गीली और स्लिपरी हो चुकी थी।

वो अपने लंड के सुपाड़े को चूत के दरवाजे पे रख कर मेरे ऊपर झुक गया और मुझे किस करने लगा। दोनों एक दूसरे की ज़ुबानें चूस रहे थे। मेरी गाँड बेड के किनरे पे थी और मेरी टाँगें उसके बैक पे लपटी हुई थी और वो ज़मीन पे खड़ा हुआ था। वो धीरे-धीरे अपने लंड का दबाव बढ़ा रहा था और उसके लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के होल में स्लिप हो कर अटक गया और अभी सिर्फ़ सुपाड़ा ही अंदर गया था कि मैं चींख उठी, ऊऊऊऊईईईईईईई अल्लाह....आआआआआ धीरे! एस-के धीरे! वो फिर से किस करने लगा और सिर्फ़ अपने लंड के सुपाड़े को ही चूत के अंदर-बाहर करने लगा तो मुझे बेहद मज़ा आने लगा और मैं झड़ने लगी। फिर ऐसे ही सुपाड़ा अंदर-बाहर-अंदर-बाहर करते-करते उसने एक धक्का मारा तो लंड थोड़ा और अंदर घुस गया और मेरे मुँह से चींख निकल गयी, ऊऊऊऊऊऊऊईईईईईई ईईईईईईईईईईईई आंआंआंआंआं ईईईईईईईंईंईंईंईं और मैं उसको अपने ऊपर से धकेलने लगी क्योंकि चूत में जलन होने लगी थी। वो एक दम से रुक गया और झटका देना बंद कर दिया। मेरी आँख से आँसू निकल गये और जैसे ही उसका लंड मेरी चूत के अंदर घुसा वैसे ही मेरी आँखें बाहर निकलने लगी और मुझे लगा के मेरी आई बॉल्स अपने सॉकेट में से बाहर निकल गयी हों। थोड़ी देर वो ऐसे ही मेरे ऊपर झुका-झुका मुझे फ्रेंच किस करने लगा तो थोड़ी देर के बाद मेरी चूत ने उसके लंड को अपने अंदर एडजस्ट कर लिया। अब वो ऐसे ही तकरीबन आधे से कुछ कम लंड को अंदर-बाहर करने लगा जिससे मुझे मज़ा आने लगा और चूत के जूस से उतना लंड आसनी से फिसल के अंदर-बाहर होने लगा। उसके हाथ मेरी बगल में से निकल कर मेरे कंधों को ज़ोर से टाइट पकड़े हुए थे। अब मेरी चूत उसके लंड को एडजस्ट कर रही थी। उसका लंड अंदर-बाहर स्लिप हो रहा था और कभी-कभी वो सुपाड़े तक निकाल के अंदर घुसाता तो कभी ऐसे ही छोटे-छोटे धक्के से अंदर बाहर करता। फिर उसने देखा कि मेरी ग्रिप उसके ऊपर कुछ लूज़ होने लगी और मेरी चूत उसके लंड को अपने अंदर एडजस्ट कर चुकी है तो वो समझ गया कि बाकी का लंड खाने के लिये अब मैं रेडी हूँ। फिर उसने मुझे टाइट पकड़ कर लंड को पूरा सुपाड़े तक बाहर निकाल के एक इतना ज़ोरदार झटका मारा कि मेरे मुँह से चींख निकल गयी, ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओ ईईईईईईईईईईईईईई ईंईंईंईंआंआंआंआंआंऊंऊंऊंऊंऊं मैं मर गयी...ईईईईईईईई, और उसका लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ मेरे पेट में घुस चुका था। मेरा अंदर का दम अंदर और बाहर का दम बाहर रह गया और मुझे लगा मानो किसी ने मेरी चूत को किसी तेज़ चाकू से काट डाला हो। चूत में बहुत ज़ोर की जलन होने लगी और एस-के के जिस्म पे मेरी ग्रिप बहुत ही टाइट हो गयी। मेरे मुँह से ऊऊऊफफफफ और आआआहहहह की तेज़ आवाज़ें निकलने लगीं जैसे किसी बकरे को हलाल करने के टाईम पे बकरे के मुँह से निकलती है और फिर मेरी ग्रिप एस-के के जिस्म से एक दम से लूज़ हो गयी और मेरे हाथ बेड पे गिर गये और मेरे सैंडल ज़मीन पर टकराये और फिर ऐसे लगा जैसे टोटल ब्लैक ऑऊट, और मैं शायद चार या पाँच मिनट के लिये बेहोश हो गयी थी। मेरा सारा जिस्म पसीने से भीग चुका था। साँसें तेज़ी से चल रही थी और मेरी आँख खुली तो सारा कमरा धुँधला सा नज़र आ रहा था और धीरे-धीरे मुझे साफ़ नज़र आने लगा और मैं होश में आ गयी।

और जब होश आया तो एस-के मेरे ऊपर लेटा था और लोहे जैसा सख्त लंड मेरी छोटी सी नाज़ुक चूत को फाड़ के अंदर घुस चुका था, लेकिन धक्के नहीं लगा रहा था। शायद एस-के को पता था कि मेरा टोटल ब्लैक ऑउट हो गया है और मैं बेहोश हो चुकी हूँ। फिर थोड़ी देर के बाद जब मेरे जिस्म में कुछ जान वापस आयी तो मैंने फटी आँखों से एस-के की तरफ़ देखा जैसे मेरी आँखें एस-के से कह रही हों कि तुम बड़े ज़ालिम हो, हथोड़े जैसे लंड से मेरी नाज़ुक चूत को फाड़ डाला। पर शायद वो मेरी नज़रों को समझ नहीं पाया और थोड़ा सा मुस्कुरा दिया और किस करने लगा। उसका लंड मेरी चूत में फँसा हुआ था। मेरी चूत पूरी तरह से खुल चुकी थी और मुझे लग रहा था जैसे मेरी चूत के अंदर कोई रेल इंजन का पिस्टन घुसा हो जिससे मेरी चूत के अंदर की सारी हवा निकल गयी हो। मुझे लग रहा था कि मेरे जिस्म के दो टुकड़े हो गये हों।

थोड़ा और होश आया और मेरी आँखें खुली तो एस-के ने पूछा, क्यों मेरी रानी, अभी तक तकलीफ हो रही है क्या?? मेरे मुँह से एक शब्द भी नहीं निकला, मैंने बस सिर हिला के हाँ मैं जवाब दिया तो वो मुझे किस करने लगा और कहा, अभी सब ठीक हो जायेगा, तुम फिक्र ना करो, और धीरे से लंड को बाहर खींचने लगा। जैसे-जैसे वो अपने लंड को बाहर खींचता, मुझे लगाता जैसे मेरे जिस्म में से कोई चीज़ बाहर निकल रही हो और मेरे जिस्म को खाली कर रही हो। पहले तो वो आहिस्ता आहिस्ता धक्के मारने लगा और धीरे-धीरे उसकी चुदाई की स्पीड बढ़ने लगी। अब मेरी चूत एस-के के इतने बड़े और मोटे लंड को पूरी तरह से एडजस्ट कर चुकी थी और मैं मज़े लेने लगी और सिसकने और चींखने लगी, आआआहहहह ओ‍ओ‍ओहहह औंऔंऔं। मुझे इतना मज़ा पहले कभी नहीं आया था। मेरी टाँगें उसके बैक पे लिपटी हुई थी और वो नीचे खड़े-खड़े धक्के मार रहा था और लंड चूत के अंदर बाहर हो रहा था। उसी ताल में मेरे सैंडल उसकी चूतड़ों पे थाप रहे थे। जैसे ही लंड बाहर निकलता तो मुझे लगाता जैसे मेरा जिस्म खाली हो रहा हो और जैसे ही फिर से लंड चूत के अंदर घुस जाता मुझे लगाता जैसे मेरा जिस्म और चूत फिर से भर गये हों। उसके हर झटके से मेरे मुँह से हंफहंफहंफ ऊफौफऊपऊप आआआहहहह ऊऊईईईई ईंईंईंईं आंआंआं ऊंहऊंहऊंह जैसी आवाज़ें निकल रही थी और मैं फिर से झड़ने लगी। अब मेरी आँखों से आँसू भी नहीं निकल रहे थे। तकलीफ कि जगह मज़े ने ले ली थी और मैं मस्त चुदाई के पूरे मज़े ले रही थी।

एस-के अपनी गाँड हिला-हिला के लंड को पूरा बाहर तक निकाल-निकाल के मुझे गचा-गच गचा-गच चोद रहा था। कमरे में चुदाई की फच-फच-फच की आवाज़ें गूँज रही थीं। मैं एस-के के जिस्म से चिपकी हुई थी। मेरी चूचियाँ हर एक झटके से मेरे जिस्म पे डाँस करने लगती। एस-के कभी मेरी चूचियों को पकड़ के मसल देता, कभी झुक के मुँह में लेकर चूसने लगता और कभी निप्पलों को काटने लगता। लंड सुपाड़े तक पूरा बाहर निकाल-निकाल के वो मेरी टाइट चूत में घुसेड़ देता तो मेरी आँखें बाहर निकल आतीं और मुझे लगाता जैसे एस-के का मूसल जैसा लंड मेरी चूत को फाड़ के मेरी गाँड मैं से बाहर निकल जायेगा। अब मैं दर्द और मज़े से कराह रही थी। बेहद मज़ा आ रहा था और मैं एस-के के जिस्म से छिपकली की तरह चिपकी हुई थी। मैंने उसके जिस्म को टाइट पकड़ा हुआ था और वो था कि फ़ुल स्पीड से चोदे जा रहा था। मैं तो पता नहीं कितनी दफ़ा झड़ गयी। झड़ने से चूत अंदर से बेहद गीली हो गयी थी और अब लंड आसानी से अंदर-बाहर फिसल रहा था। मेरी चूत पूरी तरह से खुल चुकी थी और सूज के डबल रोटी हो गयी थी। चुदाई की स्पीड बढ़ गयी थी और मेरी चूत के अंदर फिर से लावा निकलने को बेचैन होने लगा। मेरे मुँह से मज़े की सिसकारियाँ निकलने लगी और उसी टाईम पे एस-के की चुदाई की स्पीड और बढ़ गयी और फिर एस-के ने अपना "आकाश मिसाइल" जैसा रॉकेट -लंड पूरा सुपाड़े तक बाहर निकाला और एक इतनी ज़ोर से धक्का मारा कि मैं फिर से चिल्ला उठी, आआआआआहहहहहह अल्लाहहह...आआआआआआ ऊंऊंऊंऊंऊंआआआआआआंआंआं, और मुझे लगा जैसे कमरा गोल-गोल घूम रहा हो और मुझे कुछ नज़र ही नहीं आ रहा था। सारा जिस्म पसीने से भीग चुका था। आँखें बाहर को निकल गयी थीं और फिर उसके लंड में से मलाई की पिचकारियाँ निकलने लगी। पहली पिचकारी मेरी चूत में लगते ही मेरी चूत फिर से झड़ने लगी और जो लावा चूत के अंदर उबल रहा था, बाहर निकलने लगा। उसकी पिचकारियाँ निकलती रही और उसके धक्के धीरे होते गये और थोड़ी देर में एस-के मेरे जिस्म पे गिर गया और मेरी ग्रिप भी उसके जिस्म पे लूज़ हो गयी और मेरे हाथ पैर फिर से ढीले पड़ गये।

हम दोनों गहरी-गहरी साँसें ले रहे थे। मेरी चूचियाँ हम दोनों के जिस्म के बीच में पिसी जा रही थीं और दोनों के जिस्म के बीच में दोनों चूचियाँ फ़्लैट हो गयी थीं। झड़ने के बाद भी उसका लंड मेरी चूत में फूलता रहा और फिर वो मेरे ऊपर से मेरे साईड में लेट गया तो उसका लंड एक प्लॉप की आवाज़ के साथ ही मेरी फटी चूत से बाहर निकल गया और हम दोनों थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहे। फिर हम दोनों ऊपर खिसक कर बेड के ऊपर आ गये। उसका लंड चूत से बाहर निकलते ही मेरी चूत में से दोनों की मिली जुली क्रीम निकल के बेड पे गिरने लगी। थोड़ी देर में देखा तो पता चला कि मेरी चूत से सच में खून निकल आया है। मैं हैरान रह गयी कि मेरी चूत की सील तो पहले ही टूट चुकी थी, फिर ये सेकेंड टाईम खून क्यों निकला। फिर ख़याल आया कि इतना बड़ा मूसल जैसा लंड इतनी छोटी सी चूत में घुसेगा तो खून तो निकलेगा ही और ये ख़याल आते ही मेरे मुँह पे हल्की सी मुस्कुराहट आ गयी। मेरी अंगारे की तरह से जलती और प्यासी चूत को आज इतने महीनों के बाद करार आया था। चूत की प्यास बुझ चुकी थी और चूत की आग ठंडी पड़ चुकी थी। मैं आँखें बंद किये लेटी रही और हम दोनों गहरी-गहरी साँसें लेते रहे।

एस-के ने कहा, वॉव किरन, तुम्हारी चूत तो एक दम से टाइट है.... क्या अशफाक तुम्हें चोदता नहीं है? तो मैंने कहा कि पहले तो तुम्हारा लंड देखो, कितना बड़ा, लंबा-मोटा और कितना सख्त है, जैसे कोई स्टील का पाइप हो और ये मेरी इतनी छोटी सी चूत में घुसेगा तो तुम्हें तो टाइट ही लगेगा ना, और देखो इस मूसल ने मेरी छोटी सी चूत का क्या हाल बना दिया है..... इसमें से खून भी निकाल दिया.... इसने मेरी चूत को फाड़ डाला, और दूसरे ये कि हाँ, अशफाक से मुझे कभी भी मज़ा नहीं आया..... वो तो बस मेरी चूत में आग लगा के खुद ठंडा पड़ जाता है और पलट के सो जाता है और मैं सारी रात जलती रहती हूँ। कभी-कभी ही तो उसका छोटा सा लंड जो इतना सख्त भी नहीं होता, अंदर जाता है और फ़ौरन ही उसकी मलाई निकल जाती है..... ऐसा लगाता है जैसे मेरी गरम चूत में उसकी मलाई पिघल के निकल गयी हो और कभी-कभी तो बिना अंदर घुसाये ही, ऊपर ही अपना माल गिरा देता है और आज मुझे ऐसे लग रहा है जैसे आज ही मेरी सुहाग रात हुई हो और ऐसी चुदाई ज़िंदगी में कभी नहीं हुई। मैंने आगे कहा कि, एस-के! तुम्हारी वाइफ के तो मज़े होंगे? वो बोला कि नहीं! ऐसी कोई बात नहीं..... पहली टाईम तो वो भी तुम्हारी तरह से बेहोश हो गयी थी और अब उसकी चूत मेरा लंड आसनी से ले लेटी है..... मैं तो उसकी गाँड में भी डालता हूँ और वो गाँड भी असानी से मरवा लेती है। मैंने हैरत से कहा कि उसकी गाँड में इतना मोटा और बड़ा लंड घुस कैसे जाता है तो वो बोला कि पहले टाईम ही थोड़ा सा दर्द होता है.... फिर बाद में नहीं होता और पहले टाईम डालने के लिये बहुत सा तेल लगाना पड़ा था, तब कहीं जा कर धीरे-धीरे घुसा सका था।

हम ऐसे ही बातें करते रहे और एस-के ने मेरा हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख दिया जो फिर से इरेक्ट हो चुका था। उसने फिर से मेरी चूत में अपनी उंगली डाल के क्लिटोरिस को मसलना शुरू कर दिया तो मेरी चूत फिर से गरम हो आयी और गीली हो गयी। वो मेरी चूचियों को चूस रहा था और खुद सीधा लेट के मुझे अपने ऊपर खींच लिया। फिर से उसका मूसल जैसा लंड किसी खौफनाक मिसाइल की तरह से खड़ा हो चुका था। मैं एक बार फिर से डर गयी। एस-के ने मुझे आगे की तरफ़ खींच लिया और मैं उसके मुँह पे बैठ गयी मेरे दोनों घुटने मुड़े हुए थे और मेरे पैर उसके सिर के दोनों तरफ़ थे। मैं अभी भी अपने सैंडल पहने हुए थी और मैं उसके मुँह पे अपनी चूत रगड़ रही थी। एस-के ने अपने हाथ बढ़ा के मेरे बूब्स को मसलना शुरू कर दिया। उसके दाँत मेरी चूत के अंदर बहुत मज़ा दे रहे थे और मैं झड़ने लगी। मैं इतने टाईम झड़ चुकी थी और ऐसे लगाता था जैसे मैं आज झड़ने के सारे रिकोर्ड तोड़ने वाली हूँ।

अब एस-के ने मुझे पलटा दिया और हम सिक्स्टी-नाईन पोज़िशन में आ गये। मैं झुक कर उसके मूसल जैसे लौड़े को अपने मुँह में लेने की कोशिश करने लगी पर उसके सुपाड़े से ज़्यादा मेरी मुँह में कुछ नहीं गया। मेरा मुँह उसके लंड के सिल्की सॉफ्ट चिकने सुपाड़े पे लगते ही एस-के ने अपनी गाँड उठा के लंड मेरे मुँह में घुसेड़ना चालू कर दिया जिससे वो कुछ और अंदर गया और मेरा मुँह उसके लंड से फ़ुल हो गया। मेरा मुँह पूरा खुल चुका था पर वो अपनी गाँड उचका-उचका कर मेरे मुँह में लंड घुसा रहा था। उसका लौड़ा तकरीबन आधा या उससे कुछ ज़्यादा ही अंदर घुसा होगा और अब वो मेरे हलक तक घुस चुका था और मैं उसका लंड चूसने लगी। मेरे मुँह में दर्द हो रहा था। इतना मोटा लंड इतनी देर तक नहीं ले पा रही थी। लंड में से चिकना-चिकना प्री-कम निकल रहा था जिसे मैं टेस्ट कर रही थी। उसका लंड उसके प्री-कम से और मेरे थूक से बहुत गीला हो चुका था। वो लगातार मेरी चूत को चूस रहा था और मेरी गाँड में अपनी उंगली घुसेड़ रहा था। बहुत मज़ा आ रहा था। कभी-कभी पूरी चूत को अपने दाँतों में पकड़ के काट लेता और ऐसे चबाता जैसे पान चबा रहा हो और मेरी चूत का फ़ालूदा बना के खा रहा हो। मैं इतनी मस्ती में आ गयी कि फ़ौरन ही झड़ने लगी। मेरी चूत का रसीला जूस एस-के के मुँह में जाने लगा जिसे वो शहद की तरह से चाटने लगा।

अब एस-के ने मुझे फिर पलटा दिया। मैं उसके जिस्म के दोनों तरफ़ घुटने मोड़ कर बैठी थी जैसे घोड़े की सवारी कर रही हूँ। उसका मिसाइल जैसा लंड सीधा खड़ा था। मैं थोड़ा सा ऊपर उठी और उसके लंड के सुपाड़े को अपनी चूत के सुराख में रगड़ने लगी। गीली चूत और चिकने प्री-कम से भरा हुआ लंड का सुपाड़ा मेरी चूत के अंदर आसनी से घुस गया। अब तो मेरी चूत का सुराख बहुत ही बड़ा हो चुका था। इतने बड़े मोटे और लोहे जैसे लंड से जो चुद चुकी थी। अब मैंने धीरे-धीरे उसके मूसल लंड पे बैठना शुरू किया तो वो मेरी गीली चूत के अंदर घुसने लगा उसी वक्त एस-के ने मुझे झुका लिया और मेरी चूचियों को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और निप्पलों को काटने लगा। मैं और ज़्यादा मस्ती में आ गयी और अब वो अपनी गाँड उठा के अपने लंड को मेरी चूत में अंदर बाहर करने लगा। अब उसका चिकना लंड गीली चूत में आधा ही आसनी से घुस रहा था। उसने देखते ही देखते अपनी गाँड को ज़ोर से ऊपर उठाया और लंड को जड़ तक मेरी चूत के अंदर पेल दिया और मेरी आँख में फिर से पानी आ गया और मुँह से ऊऊऊऊईईईईईई.. या अल्लाह आआआआआ निकल गया और मैं उचक के लंड को बाहर निकालने की कोशिश करने लगी। पर एस-के ने मुझे ज़ोर से पकड़ा हुआ था। अब मैं फिर गहरी-गहरी साँसें ले रही थी। बहुत दर्द हो रहा था। थोड़ी ही देर के बाद मेरी चूत फिर से उसके लंड को अपने अंदर एडजस्ट करने लगी। थोड़ी देर ऐसे ही लेटे रहने के बाद मेरी साँसें कुछ ठीक हुई तो एस-के ने अपनी गाँड उठा-उठा के मुझे चोदना शुरू कर दिया और मेरी चूचियों को चूसने लगा। मुझे भी अब मज़ा आने लगा और मैं उसके मूसल लंड पे उछलने लगी। जब उसका लंड चूत के अंदर घुसता तो लगाता जैसे चूत फाड़ के मेरे पेट तक घुस आया हो। बेतहाशा मज़ा आ रहा था। उसने मेरी डाँस करती हुई चूचियों को पकड़ के चूसना शुरू कर दिया और मैं झड़ने लगी पर उसके लंड से मलाई निकलने का नाम ही नहीं ले रही थी।

मैं झड़ चुकी थी और मेरे हाथ पैर ढीले हो गये थे। एस-के समझ गया कि अब मैं बिल्कुल खल्लास हो चुकी हूँ तो उसने मुझे पीछे को हटा दिया और अपनी फैली हुई टाँगों के बीचे में लिटा लिया और मेरे सिर को उठा के मेरे मुँह में अपना मोटा लंड घुसा दिया। उसके लंड पे लगा हुआ मेरा जूस अच्छा लग रहा था मैं उसके लंड को चूसती रही। अब मैं उसके लंड को गले तक अंदर लेकर चूस रही थी। एस-के के हाथ मेरे सर पे थे और वो मेरे सिर को पकड़ के मेरा मुँह अपने लंड पे दबा रहा था और अपनी गाँड उठा-उठा कर मेरे मुँह को चोद रहा था। मुझे लगा कि उसका मूसल जैसा लंड मेरे मुँह के अंदर फूल रहा है और इससे पहले कै मैं कुछ समझ पाती और अपना मुँह लंड पे से हटा सकती, उसने एक ज़ोर दार धक्का मारा जिससे उसके लंड का सुपाड़ा मेरे हलक में घुस गया और उसके लंड में से मलाई की पिचकारियाँ निकलने लगी, जो डायरेक्ट मेरे हलक में चली गयी। मैं उसका लंड चूसती रही और उसकी मलाई खाती रही। जब वो पूरी तरह से झड़ चुका तो मुझे अपने ऊपर खींच के मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल के फ्रेंच किस करने लगा, जिस पर उसकी मलाई का टेस्ट था। उसका लंड अब थोड़ा सा सोफ़्ट हो चुका था और हमारे जिस्मों के बीच में सैंडविच बना हुआ था। ऐसे ही हम दोनों एक दूसरे के जिस्म पे पड़े रहे। थोड़ी देर के बाद एस-के ने शॉवर लिया। मेरी तो उठने की हिम्मत नहीं थी। शॉवर से बाहर निकल कर उसने अपने कपड़े पहने और मुझे किस करने लगा। मेरे चेहरे को अपने हाथों में ले लिया और बोला कि किरन तुम बहुत ही खूबसूरत हो और ऑय लव यू वेरी मच..... यू आर द बेस्ट..... और मैं किसी कुँवारी लड़की की तरह से शरमा रही थी।

और जब एस-के जाने लगे तो मैं उनके सीने से लिपट गयी और मेरी आँख में आँसू निकलने लगे। मैं रोने लगी। मुझे एक ही दिन में एस-के से अपनी जान से ज़्यादा मोहब्बत हो गयी थी । वो मुझे किस करने लगा और कहने लगा, अरे किरन! ऐसे रोया नहीं करते, मैं हूँ ना तुम्हारे साथ, तुम किसी बात की फिक्र नहीं करना, मैं तुम्हारा ज़िंदगी भर साथ नहीं छोड़ुँगा। मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ, बस ये राज़ मेरे और तुम्हारे बीच ही रहने दो.... अशफाक को इसकी खबर न हो, नहीं तो अच्छी बात नहीं होगी..... वो क्या फ़ील करेगा मेरे बारे में। मैंने आँसू भरी आँखों से एस-के की तरफ़ देखा और अपना सर हाँ में हिला दिया। मैं एस-के को छोड़ना ही नहीं चाह रही थी और उसे कस के पकड़ा हुआ था। मैं चाह रही थी कि कम से कम आज की रात एस-के मेरे साथ ही रहे और सारी रात मुझे प्यार करता रहे और मैं उसकी बाँहों में छिप के सो जाऊँ पर क्या करती, मजबूरी थी। उसको भी अपने घर जाना था। उसके भी तो बीवी बच्चे थे। आँसू भरी आँखों से एस-के को रुखसत किया और बेड पे गिर के रोने लगी। ये एक अजीब से रिश्ते की बुनियाद थी जिसे क्या नाम दूँ, मेरी समझ में नहीं आ रहा था। थोड़ी देर उदास रही पर फिर इस ख़याल से खुश हो गयी कि अब मुझे अपने चूत की प्यास बुझाने के लिये तरसना नहीं पड़ेगा। पता नहीं कब मैं वैसे ही सिर्फ सैंडल पहने, बिल्कुल नंगी सो गयी।

सुबह उठी तो तबियत कुछ अजीब सी लग रही थी। बेड पे ही काफी देर तक लेटी रही और रात की चुदाई का सोच सोच के मुस्कुराती रही और फिर जब उठके बाथरूम जाने लगी तो पता चला कि मेरी चूत काफी सूज गयी है और चूत में बहुत दर्द हो रहा था। मैं रातभर से नंगी तो थी ही। अपने सैंडल उतार कर मैं बाथरूम में गयी और गरम-गरम पानी से शॉवर लिया और चूत में साबुन लगा के गरम पानी से धोया, तब कहीं जा कर चूत कि तकलीफ कुछ कम हुई और शॉवर से बाहर निकल के अपने जिस्म को टॉवल में लपेट के जिस्म सुखा रही थी तो सारे जिस्म में एक मीठा-मीठा सा दर्द हो रहा था जो बेहद अच्छा लग रहा था। नहाने के बाद कपड़े पहने और कॉफी बना कर पीने लगी। रात में कुछ खाया भी नहीं था और सच मानो कुछ खाने का मूड भी नहीं कर रहा था। कॉफी के साथ कुछ बिस्कुट खा लिये और मैं फ़्रेश हो गयी तो मुझे कल एस-के के साथ अपनी चुदाई का हाल याद आ गया तो मैं फिर से मुस्कुराने लगी और एस-के का खयाल आते ही मैंने ऑफिस के टेलीफोन पे एस-के का नम्बर डायल किया।

हेलो किरन, कैसी हो..... उसने पूछा। छोटी सी चूत को फाड़ के अब पूछते हो कैसी हूँ? मैंने हँसते हुए कहा तो वो भी हँसने लगा। मैंने पूछा, तुम कैसे हो? तो उसने कहा कि जब से तुम्हारे घर से वापस आया हूँ, किसी काम में दिल नहीं लग रहा है, तुम्हारी याद सता रही है और तुम्हारी बांहों में सोने का मन कर रहा है। मैंने हँस कर कहा, आ जाओ ना फिर.... देखो मैं तुम्हारा ही इंतज़ार कर रही हूँ, तो एस-के ने हँसते हुए पूछा कि तुम इंतज़ार कर रही हो या तुम्हारी चूत?? मैंने हँस के कहा, खुद ही आ के पूछ लो, वो तो ज़खमी है.... शायद उसको मसाज की ज़रूरत पड़ेगी। एस-के ने फिर से हँसते हुए कहा कि चलो अगर चूत ज़खमी है तो आज गाँड से ही काम चला लेते हैं, तो मेरे मुँह से एक दम से चींख निकल गयी नही....ईईईईईईई। वो हँसने लगा और कहा कि चलो मैं थोड़ी देर में आता हूँ और खुद ही पूछ लुँगा कि कौन मुझे याद कर रहा है। फिर एस-के ने पूछा, रात नींद कैसी आयी किरन? तो मैंने कहा बहुत वंडरफुल नींद आयी, ऐसी मस्ती में सोयी जैसे बेहोश हो गयी हूँ और बस अभी- अभी आँख खुली है। बस अभी शॉवर लेकर आयी हूँ, मुझसे तो ठीक से चला भी नहीं जा रहा है, कुछ मीठा-मीठा सा दर्द सारे जिस्म में है। एस-के हँसने लगा और कहा, अभी क्या इरादा है? मैंने कहा, आ जाओ.... अब तुम्हारे बिना एक मिनट भी दिल नहीं लग रहा है। एस-के ने कहा, मेरा भी यहीं हाल है। मैंने कहा, एस-के क्या आज कि रात मेरे साथ रुक सकते हो..... मैं अकेली हूँ और अशफाक भी शायद एक वीक के बाद ही आयेगा! तो उसने कहा, हाँ रुक तो सकता हूँ पर एक शर्त है अगर तुम रेडी हो गयी तो मैं आज की रात क्या, अशफाक के आने तक तुम्हारे पास ही रुक सकता हूँ। एक वीक तक हर रात मेरे साथ गुज़ारने का सुन के मैं तो जैसे खुशी से पागल हो गयी और कहा कि, एस-के तुम एक वीक तक मेरे साथ गुज़ारोगे तो मुझे तुम्हारी हर शर्त मंज़ूर है और अगली बार के लिये भी सारी शर्तें मंज़ूर हैं.... बस तुम आ जाओ और मेरे साथ एक वीक की सारी रातें गुज़ारो.... मैं तुम्हारे लिये कुछ भी कर सकती हूँ..... अपनी शर्त बोलने की ज़रूरत नहीं है.... ओके! तो एस-के ने कहा, देखो सोच समझ के जवाब दो और मेरी शर्त तो सुन लो, तो मैंने कहा मुझे कुछ नहीं सुनना है.... बस मैंने कह दिया ना कि मुझे तुम्हारी हर शर्त बिना सवाल के मंज़ूर है। उसने कहा, ठीक है अगर तुमहारा यहीं फ़ैसला है तो.... ओके मैं आज से एक वीक की सारी रातें तुम्हारे ही साथ गुज़ारुँगा। और हाँ! तुम आज सारा दिन रेस्ट ले लो और सो जाओ क्योंकि मैं आज की रात से एक वीक तक की रातें तुम्हें सोने नहीं दुँगा। ये सुन के मेरा दिल खुशी के मारे उछलने लगा और मैं बच्चों की तरह से खुश हो गयी

एस-के ने कहा तो ठीक है मैं ऑफिस खतम कर के सीधे तुम्हारे पास ही आ जाऊँगा और तुम डिनर तैयार नहीं करना, मैं पिज़्ज़ा हट से सूपर सुप्रीम पिज़्ज़ा लेकर आ रहा हूँ। मैंने कहा, ठीक है और वेट करने लगी। वॉव एस-के एक वीक तक मेरे साथ ही रहेगा तो खुशी के मारे मुझसे खाना भी नहीं खाया गया। मैं बेसब्री से रात का और एस-के का इंतज़ार करने लगी। जैसे-तैसे लंच किया और सोने के लिये बेड पे लेट गयी पर नींद कहाँ आती। मेरा सारा दिमाग तो एस-के के लंड में अटक के रह गया था। बस बेड पे लेटी रेस्ट करती रही और चुदाई का खयाल आते ही मुस्कुरा देती। शाम को पाँच बजे के आसपास मैं तैयार होने उठी। पहले मैंने अपनी टाँगों, बाँहों, चूत और गाँड पर वैक्सिंग की और फिर खूब अच्छे से नहाई। बालों को शैंपू करके हेयर ड्रायर से सुखाया। फिर शिफॉन का पिंक रंग का सलवार-कमीज़ पहना। कमीज़ स्लीवलेस और बेहद गहरे गले का था। साथ में मेल काते काले रंग के साढ़े-चार इंच हाई-हील के स्ट्रैपी सैंडल पहने। फिर थोड़ा सा मेक-अप किया।

तकरीबन सात बजे बेल बजी। डोर खोला तो देखा कि एस-के खड़ा मुस्कुरा रहा है। ब्लैक पैंट और व्हाइट शर्ट पे डार्क ब्लू और रेड स्ट्रैप की टाई में वो बहुत ही शानदार लग रहा था। मैं तो देखती की देखती ही रह गयी। एस-के ने हँस के कहा, अंदर आने भी दोगी या यहीं खड़ा रखोगी तो मैं चौंक गयी और कहा, ओह सॉरी, अंदर आ जाओ प्लीज़, तो एस-के अंदर आ गये और अपने पीछे डोर को लॉक कर दिया। उनके हाथ में एक बड़ा पिज़्ज़ा और एक शॉपिंग बैग में चॉकलेट आईस क्रीम थी। मैंने पूछा कि आपको कैसे पता चला कि आई लव चॉकलेट आईस क्रीम तो एस-के ने कहा सबसे पहले तो ये आप-आप करना छोड़ो और हाँ मुझे पता है कि हर स्वीट लड़की को चॉकलेट आईस ख्रीम ज़रूर पसंद होती है, बस दिल ने दिल से कहा और मैंने सुन लिया तो मैं मुस्कुरा दी और एस-के से लिपट गयी और अपना मुँह उसके सीने में छिपा कर उसके जिस्म को बे-हताशा प्यार करने लगी और बोली के आई लव यू सो मच, एस-के आई लव यू सो मच, आई नीड यू आलवेज़, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती, अब एस-के प्लीज़ तुम डेली आते रहना मेरे पास नहीं तो मैं नाराज़ हो जाऊँगी। एस-के ने मुझे अपने आप से लिपटा लिया और मेरे जिस्म पे हाथ फेरा और अपनी बांहों में जकड़ लिया और बोला कि हे किरन, आई आलसो लव यू सो मच किरन, यू डोंट वरी, मैं डेली तुम्हारे पास आऊँगा और तुम्हारी हर इच्छा पूरी करूँगा, यू आर द डार्लिंग ऑफ़ माय हार्ट एंड सोल। हम दोनों एक दूसरे से लिपटे रहे। वो मुझे प्यार करने लगा और मैंने थोड़ा सा ऊपर उठ के एस-के के लिप्स पे किस किया। फिर हम दोनों के मुँह खुल गये और हम एक दूसरे की ज़ुबान चूसने लगे। एस-के के जिस्म से आती हुई पर्फयूम की खुशबू मुझे पागल किये दे रही थी।

हम दोनों टेबल पे आ गये और पिज़्ज़ा खाने लगे। एस-के मुझे अपने हाथों से पिज़्ज़ा खिला रहे थे तो मैंने एक पिज़्ज़ा का पीस अपने मुँह में रखा और एस-के को खिलाया और उसके साथ ही किस भी हो गया। इसी तरह से हम एक दूसरे को एक दूसरे के मुँह से खिलाते रहे और एक-एक पीस के साथ किसिंग भी चलती रही। दिल कर रहा था कि एस-के और मैं तमाम ज़िंदगी एक दूसरे के साथ ही रहें और ऐसे ही एक दूसरे को प्यार करते रहें। ये ऐसी दिल थी जो पूरी नहीं हो सकती थी, ये मुझे भी मालूम था और एस-के को भी। पिज़्ज़ा खतम हो गया और हम थोड़ी देर ऐसे ही मस्ती करते रहे।

डिनर खतम होने तक तकरीबन नौ बज गये थे। थोड़ी देर के बाद एस-के ने व्हिस्की के दो पैग बनाये और हम दोनों सोफ़े पे बैठ के व्हिस्की पीने लगे। व्हिस्की पीते-पीते एस-के ने मेरी कमीज़ के स्ट्रैप मेरे कंधों से नीचे खिसका दिये और मेरी चूचियों से खेलने और दबाने लगा। पिछली रात की चुदाई के बाद और व्हिस्की के सुरूर से अब मैं भी बोल्ड हो गयी थी और मैंने अपना हाथ एस-के के लंड पे रखा तो उसका लंड फौरन उसकी पैंट के अंदर खड़ा हो गया। मैंने सोचा कि इतना बड़ा और मोटा लंड पैंट के और अंडरवीयर के अंदर अकड़ेगा तो एस-के को तकलीफ होगी। इसलिये मैं सोफ़े से उठ गयी और अंदर कमरे में जा कर अशफाक की एक लुँगी ले आयी और एस-के को दे दी। चलते वक्त मुझे महसूस हुआ कि मुझ पर व्हिस्की का नशा हावी होने लगा था क्योंकि मेरे कदम उन हाई-हील सैंडलों में थोड़े से लड़खड़ा रहे थे। एस-के सोफ़े से उठ कर खड़ा हुआ और अपनी शर्ट और बनियान निकाल दी और बोला, किरन ज़रा पैंट निकाल दो तो मैंने पैंट की बेल्ट खोली और ऊपर से हुक खोल कर ज़िप को नीचे करके पैंट उतार दी। अब लंड अंडरवीयर के अंदर तंबू बनाये हुए था। मैंने थोड़ा सा आगे को झुक कर अंडरवीयर के दोनों तरफ़ से दो हाथ डाल कर जैसे ही अंडरवीयर नीचे किया तो मैं एक दम से उछाल पड़ी। लंबा, मोटा रॉकेट जैसा लंड उछल कर मेरे मुँह के सामने लहराने लगा तो मैंने मस्ती में उसको अपने हाथ से पकड़ लिया और लंड के सुपाड़े का एक ज़बरदस्त चुंबन ले लिया और थोड़ा सा चूस लिया। एस-के ने अभी मेरे मुँह में लंड घुसाना सही नहीं समझा क्योंकि अभी-अभी हम ने खाना खाया था और मैं व्हिस्की के तीन पैग पी चुकी थी। उसने सोचा होगा कि कहीं उलटी ना हो जाये और खाना बाहर निकल ना जाये। एस-के ने लुँगी लपेट ली। फिर एस-के ने कहा कि अरे इसकी क्या ज़रूरत है और अपनी लूँगी निकाल दी और बिना शर्ट और बिना लुँगी के मेरे पास नंगा ही सोफ़े पे बैठ गया। मैं अपने लिये चौथा पैग डालने लगी तो एस-के ने मुझे रोक दिया। एस-के ने मेरे भी सारे कपड़े भी उतार दिये और अब मैं भी सिर्फ सैंडल पहने, नंगी ही उसके साथ सोफ़े पे बैठी थी और हम एक दूसरे के जिस्म से खेलने लगे। मैं उसका लंड दबाती और मसलती रही। वो मेरी चूचियों को मसलता और निप्पलों को काटता रहा और चूत का मसाज भी करता रहा।

हम तकरीबन एक घंटे तक ऐसे ही सोफ़े पे बैठे रहे। मेरा जिस्म जोश में गरम हो गया था और नशे में मुझे काफी हल्का और मदहोश महसूस हो रहा था। एस-के ने कहा कि किरन तुम्हारा जिस्म इतना गरम क्यों हो गया, तुम्हें इतनी व्हिस्की नहीं पीनी चाहिये थी क्योंकि तुम्हें आदत नहीं है। मैंने हँस के कहा कि नहीं एस-के, ये मेरे जिस्म का टेम्परेचर ज्यादा व्हिस्की पीने की वजह से नहीं है, ये तो मेरी चूत का टेम्परेचर है जो जिस्म पे महसूस हो रहा है। एस-के ने हँस के कहा कि लगाता है तुम्हारी चूत की गर्मी को निकालना पड़ेगा, बोलो तैयार हो? तो मैंने हँस कर कहा कि कल रात तुम जबसे गये हो, मैं तो तब ही से तैयार हूँ, जैसे तुम चाहो, निकाल दो इस चूत की सारी गर्मी को। एस-के ने कहा ठीक है अभी मैं चूत को ठंडा करने का इंतज़ाम करता हूँ और फ्रिज से चॉकलेट आईस ख्रीम निकाल के ले आया।

मैं उतनी देर में सोफ़े के सामने पड़ी हुई सेंटर टेबल पर से व्हिस्की की बोटल और ग्लास उठा के ले गयी। अब तो मेरे कदम ज़ाहिराना तौर से लड़खड़ा रहे थे पर मैं तो अपनी ही मस्ती में मदहोश थी। हमारी सेंटर टेबल सोफ़ा सेट के बीच में पड़ी है जो रेक्ट-‍एंगल शेप की है और अच्छी खासी बड़ी है, जिसपर एक आदमी अपनी टाँगें नीचे लटका कर आराम से लेट सकता है। टेबल बहुत ऊँची भी नहीं है और बिल्कुल नीची भी नहीं। मतलब के ऐसी हाईट की है कि कोई टेबल पे लेटा हो तो उसको बहुत मस्त तरीके से चोदा जा सकता है। हाँ तो एस-के ने मेरे सारे कपड़े तो पहले ही उतार दिये थे और मैं सिर्फ सैंडल पहने हुए थी। एस-के ने मुझे सेंटर टेबल पे लिटा दिया। मैं घुटने मोड़कर टाँगें नीचे छोड़ कर टेबल पे लेट गयी और मेरे पैर साढ़े-चार इंच ऊँची हील के सैंडल पहने होने से आसानी से फ़्लोर पे लग गये। एस-के खुद टेबल के साईड में खड़ा हो कर मेरे जिस्म पे ठंडी ठंडी चॉकलेट आईस ख्रीम डालने लगा। ठंडी आईस क्रीम जिस्म पर लगते ही सारे जिस्म में एक करंट सा दौड़ गया और मज़ा आने लगा। एस-के ने सारी क्रीम मेरे जिस्म पे डाल दी और मेरे जिस्म पे मलने लगा। चूत पे कुछ ज़्यादा ही क्रीम डाली। गरम चूत पे ठंडी क्रीम बहुत अच्छी लग रही थी और गरम चूत पे ठंडी आईस क्रीम पड़ते ही चूत की गर्मी से पिघलने लगी।

चूचियों पे आईस क्रीम डाल कर वो मसलता और दबाता रहा। मेरा तो आने वाली चुदाई का सोच के ही चूत में से जूस निकलने लगा। जब सारे जिस्म पे क्रीम फैला दी तो अब एस-के मेरे जिस्म को चाटने लगा। कुछ क्रीम मेरे मुँह पे भी लगा दी थी। पहले तो किस किया जिससे क्रीम हम दोनों के मुँह में भी गयी और मज़ा आने लगा। अब एस-के मेरे जिस्म को चाट रहा था। छूचियों को दोनों हाथों से पकड़ के मसल भी रहा था और चूस भी रहा था और आईस क्रीम के मज़े भी ले रहा था। एस-के मेरी दोनों टाँगों के बीच में खड़ा हुआ तो मेरी टाँगें खुद-ब-खुद उसके जिस्म के ऊपर कैंची बन गयीं और उसके जिस्म को अपनी टाँगों से पकड़ लिया। ऐसी पोज़िशन में उसके तने हुए लहराते लंड को देख कर मेरी चूत के मुँह में पानी आ गया। एस-के मेरी चूचियों को चूसता रहा और फिर मेरे नेवल के आसपस क्रीम डाल कर चाटता रहा। मेरा तो मस्ती के मारे बुरा हाल हो गया था। मेरी साँसें गहरी हो गयी थीं। अब एस-के नीचे फ़्लोर पे बैठ गया और मेरी टाँगों और पैरों और सैंडलों से क्रीम चाटने लगा। फिर जब वो चूत पे से क्रीम चाटने लगा तो मैंने अपने पैर उसकी गर्दन पे डाल कर अपनी चूत में उसका मुँह खींच लिया और उसका सर पकड़ के चूत के ऊपर दबा दिया और उसके मुँह से अपनी चूत को रगड़ने लगी।

ठंडी क्रीम चूत के अंदर बहुत अच्छी लग रही थी। उसकी जीभ चूत के अंदर, ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर होने लगी। मेरी आँखें बंद होने लगीं और मैं मस्ती मैं आ गयी और मेरी चूत के अंदर से जूस रेडी हो गया तो मैंने उसके सर को ज़ोर से पकड़ के अपनी चूत से रगड़ दिया। उसके दाँत मेरी चूत और क्लीटोरिस से लगते ही मैं झड़ने लगी और जैसे-जैसे मेरी चूत में से जूस निकलने लगा, मैं उतनी ही तेज़ी से उनके सर को पकड़े उनके मुँह पे अपनी चूत रगड़ती रही। थोड़ी देर के बद मेरा झड़ना बंद हुआ तो मैंने कहा, एस-के अब बर्दाश्त नहीं होता, प्लीज़ चोद डालो ना अब, कल से तड़प रही हूँ मैं तुम्हारे लंड के लिये। एस-के ने कुछ और आईस क्रीम मेरी चूत में लगायी उठ कर खड़ा हुआ और अपने लंड के सुपाड़े को चूत के सुराख में टिका कर मेरे ऊपर झुक गया और मेरी चूचियों को चूसना शुरू कर दिया। वो मेरे कंधों को पकड़ कर अपनी गाँड हिला-हिला कर लंड को चूत के अंदर बाहर करता रहा। फिर वो थोड़ा सा सीधा हुआ पर उसका लंड चूत के आधा ही अंदर रहा। उसने बहुत सारी क्रीम अपने लंड पे डाल दी और एक ज़ोर से झटका मारा तो मेरे मुँह से चींख निकल गयी आआआआईईईईईई ईंईंईंईं, और फचक-फचक की आवाज़ से उसका इतना बड़ा, मोटा ताज़ा लंड मेरी गीली चूत में आईस क्रीम के साथ घुस गया। अब फिर से वो मुझ पे झुक गया और मेरे बगल के नीचे से हाथ डाल के मेरे कंधों को पकड़ लिया और चुदाई शुरू कर दी। लंड अंदर-बाहर हो रहा था। इतना मोटा लंबा लोहे जैसा सख्त लंड छोटी सी चूत मे घुसता तो चूत के लिप्स भी लंड के साथ अंदर तक घुस जाते और फिर लंड के साथ ही बाहर निकल आते। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

एस-के नीचे फ़्लोर पे खड़ा था और अपने पैरों की ग्रिप लेकर पूरी ताकत से मुझे चोद रहा था। मेरे मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी, आआआआआहहहहहह बबब..बहुत ममम...मज़ाआआआ आआआआ रहा....आआआ है..... आआआईंईंईं ऐसे ही चोदो..... ऊऊऊफफफ आआआहहहह यूऊऊऊ आर वंदर फुलललल आआआआहहहहह ऐसे ही ओ‍ओ‍ओ‍ओ‍ओहहहह। वो पूरा लंड, सुपाड़े तक बाहर निकाल-निकाल कर चोद रहा था। बेइंतेहा मज़ा आ रहा था। एस-के के लंबा मोटा लंड मेरी बच्चे दानी को हिट कर रहा था जिससे मुझे और मज़ा आ रहा था। मेरे पैर उसकी बैक पे लिपटे हुए थे और मैं उसकी गाँड को पकड़ के चुदाई के मज़े ले रही थी। वो एक बार फिर थोड़ी और क्रीम अपने लंड पे डाल के चोदने लगा और अब उसकी चुदाई की स्पीड बढ़ गयी थी। मैंने अपने पैर उसकी बैक से हटा कर नीचे फ्लोर पे टिका दिये और सैंडल की हील्स को ज़मीन पे गड़ा कर अपने चूतड़ उठा-उठा कर उससे चुदवाने लगी। एस-के ने फिर एक इतनी ज़ोर से झटका मारा कि मेरे मुँह से फिर से चींख निकल गयी। मुझे लगा जैसे मेरी चूत फिर से फट गयी हो और सारा कमरा गोल-गोल घूमने लगा। मेरे आई बॉल्स ऊपर चड़ गये और मेरी ग्रिप एस-के के जिस्म पे टाइट हो गयी और मैंने उसको ज़ोर से पकड़ लिया। वो बहुत तेज़ी से और ज़ोर से चोद रहा था। उसका लंड मेरी छोटी सी चूत के अंदर मुझे फूलता हुआ महसूस हुआ और उसने फिर एक ज़ोर का झटका मारा तो मेरी बच्चे दानी में हलचल होने लगी और उस के साथ ही एस-के के लंड में से गाढ़ी-गाढ़ी थिक क्रीम के फुव्वारे निकलने लगे। मैं एस-के से ज़ोर से लिपटी रही और मेरी ग्रिप टाइट थी। अब उसके धक्के स्लो होने लगे और मुझे लग रहा था जैसे मेरी चूत के मसल एस-के के लंड को जैसे निचोड़ रहे हों और जैसे उसके लंड से निकली हुई क्रीम की एक एक बूँद को चूत के अंदर लेना चाहती हो। उसकी क्रीम के साथ ही मेरा जूस भी निकलने लगा और हम दोनों के क्रीम से मेरी चूत लबालब भर गयी।

थोड़ी देर तक एस-के मेरे ऊपर ऐसे ही लेटा रहा और अपने लंड को चूत के अंदर ही रहने दिया। जब हम दोनों की साँसें थोड़ी ठीक हुई तो एस-के ने अपना लंड मेरी बहती हुई चूत से बाहर निकाल लिया और फौरन ही पलट के मेरे मुँह की तरफ़ अपना लंड कर दिया, जिसमें से हम दोनों की क्रीम टपक रही थी। मैंने फौरन ही अपना मुँह खोल दिया और उसके लंड को चूसने लगी और दोनों की मिली मलाई का लेने लगी। मैंने डिब्बे से थोड़ी आईस क्रीम निकाल के एस-के के लंड पे लगाई और चूसने लगी। आआहहह क्या मज़ा आ रहा था, ऐसी आईस क्रीम पहली दफ़ा खा रही थी जिसपर आईस कि क्रीम के साथ हम दोनों की लंड और चूत की क्रीम भी थी। मैं चोको -बार की तरह से चूस रही थी उसका मोटा लंड। अब उसका लंड फिर से अकड़ गया था और मेरे मुँह में फूलने लगा था। मेरी चूत में से भी जूस निकलना शुरू हो गया था। एस-के ने मेरी चूत में उंगली करना शुरू कर दिया। अब वो जोश में मेरे मुँह को चोद रहा था और चूत को अपनी उंगली से चोद रहा था। मेरी क्लीटोरिस पे उसकी उंगली की रगड़ से मैं झड़ने लगी। एस-के मेरे मुँह को चोद रहा था। उसका इतना मोटा, लंबा लंड का सुपाड़ा मेरे हलक में टक्कर मार रहा था। मेरा जूस लगातार निकल रहा था और मैं उसी मस्ती में एस-के का लंड ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी और वो अपनी गाँड हिला-हिला कर अपना लंड पूरा बाहर निकाल-निकाल कर मेरे मुँह को चूत समझ कर चोदने लगा। मेरा तो दम ही घुटने लगा था और फिर थोड़ी ही देर में मेरे मुँह की चुदाई की स्पीड बढ़ गयी और उसके लंड के सुराख में से क्रीम के फुव्वारे निकल-निकल के मेरे हलक में डायरेक्ट उतरने लगे। मुझे लगा जैसे तकरीबन एक कप जितना गाढ़ा-गाढ़ा निकला होगा और मैं उसके लंड की सारी मलाई मज़े से खा गयी। उसके लंड से क्रीम निकलते ही मेरी चूत फिर से झड़ने लगी और मैं अपनी गाँड उठा के चूत उसके हाथ से रगड़वाने लगी। जब दोनों की मलाई निकल गयी तो दोनों शाँत हो गये। मैं बेदम हो कर वहीं लेटी रही और एस-के नीचे फ़्लोर पे लुढ़क गया। दोनों गहरी गहरी साँसें ले रहे थे और दोनों की आँखें बंद हो गयी थी।

थोड़ी देर तक ऐसे ही लेटे रहे। फिर एस-के ने मुझे उठाया और पूछा कि किरन मज़ा आया क्या तो मैंने एक ज़ोरदार चुम्मा लिया और कहा, एस-के किरन की छोटी सी चूत को अपने लंबे मोटे मूसल जैसे लंड से चोदे और किरन को मज़ा ना आये, ऐसे हो सकता है किया ?? और ये तुम्हारा ही लंड है जिसने मेरी प्यासी चूत की प्यास बुझायी है और इस में लगी आग को ठंडा किया है। एस-के हँसने लगा और मुझे उसी हालत में उठा कर बाथरूम में ले गया और शॉवर खोल दिया। दोनों ने एक दूसरे को साबुन लगाया और अच्छी तरह से एक दूसरे को साफ़ किया और नहाने लगे। नहाते-नहाते मैं एस-के के लंड को पकड़ के मसलती रही तो वो फिर से खड़ा हो गया। यही हाल मेरी चूत का भी था। एस-के जब मुझे साबुन लगा के चूत धो रहे थे तो अपनी उंगली चूत के सुराख के अंदर डाल के उंगली से चोदने लगे। मैं भी मस्ती में आ गयी और एस-के से लिपट गयी। इसी तरह से नहाते-नहाते मस्ती करते रहे और फिर हम बाथरूम के बाहर निकल आये और टॉवल से एक दूसरे के जिस्म को साफ़ किया और फिर सोफ़े पे आ के बैठ के व्हिस्की पीते हुए बातें करने लगे और एक दूसरे के जिस्म से खेलने लगे। एस-के ने अशफाक के बारे में पूछा कि वो कैसे चोदता है तो मैंने बता दिया कि शादी के कुछ ही दिनों तक तो उसका लंड मेरी चूत के अंदर गया और बस दो या तीन धक्कों में उसकी क्रीम निकल गयी। ऐसे लगाता था जैसे क्रीम उसके लंड के सुपाड़े में रेडी है, चूत की गर्मी लगी और क्रीम निकल गयी। उसके बाद से तो अब तक ऐसा है कि कभी तो उसका छोटा सा पतला लंड पूरी तरह से अकड़ता भी नहीं और कभी अकड़ भी जाता है तो चूत के अंदर घुसाने से पहले ही मेरी चूत के लिप्स के ऊपर ही अपनी क्रीम गिरा देता है जिससे मेरी चूत की आग बढ़ जाती है पर मुतमाइन कभी नहीं हुई और शादी के बाद से पहली चुदाई से लेकर आज तक मुझे उसके लौड़े से कभी सेटिसफेक्शन नहीं मिला। कल जब तुमने चोदा तो मुझे पता चला की सही मानों में चुदाई कैसे होती है और औरत को चुदाई का मज़ा कैसे आता है। जब मैं सत्रह-अठारह साल की थी तो मेरे कज़न ने मुझे चोदा था पर अब तो उस बात को भी तकरीबन दस-ग्यारह साल हो गये हैं और उस टाईम पे मुझे मेरे कज़न के लंड से चुदवाने में बहुत मज़ा आया था पर तुम्हारी चुदाई और तुम्हारा लंड तो इतना वंडरफुल है कि जी चाहता है कि तुम मुझे चोदते जाओ और मैं तुम से चुदवाती जाऊँ। एस-के ने पूछा, अच्छा तो तुमने कज़न से भी चुदवाया है तो मैंने कहा हाँ, ऐसे ही हो गया था बस और फिर उसको अपनी पहली चुदाई की दास्तान सुना डाली। एस-के मेरी कहानी सुनते-सुनते फिर से मेरे बूब्स को दबाने लगा और मेरा हाथ पकड़ के अपने लंड पे रख दिया, जो फिर से अकड़ के लोहे जैसा सख्त हो चुका था और मैं उसके लंड को दबाने लगी।

एस-के ने पूछा, अब कैसा लग रहा है किरन, तो मैंने कहा बहुत मस्त फ़ील कर रही हूँ.... इस व्हिस्की का नशा सा छाया हुआ है और सारे जिस्म में एक अजीब सा मीठा-मीठा मस्ती-भरा दर्द जैसे हो रहा है। एस-के ने कहा, चलो मैं तुम्हारे जिस्म की मालिश कर देता हूँ तो मैंने कहा, माशा अल्लाह! मालिश से तो मज़ा ही आ जायेगा.... चलो बेडरूम में चलते हैं। उसने कहा कि कोई प्लास्टिक हो तो बेड पे बिछा दो। मैंने कहा कि नहीं, ऐसा कोई प्लास्टिक तो नहीं है..... मैं कोई पुरानी वाली बेडशीट बिछा देती हूँ और अलमारी से एक पुरानी वाली बेड शीट निकाल के बेड पे बिछा दी। एस-के ने पूछा कौन सा तेल है तो मैंने कहा मालिश के लिये कौन-सा तेल अच्छा होता है। उसने पूछा कि घर में ऑलिव ऑयल है क्या? तो मैंने कहा कि हाँ, है एक डिब्बा ऑलिव ऑयल का.... क्या उससे मालिश करोगे? एस-के ने कहा कि हाँ, वो ऑलिव ऑयल ही सब से अच्छा होता है मालिश के लिये। मैं थोड़ा सा लड़खड़ाती और सैंडल खटखटाती हुई दूसरे रूम में गयी और ऑलिव ऑयल का डिब्बा लेकर आ गयी।

एस-के ने कहा कि अब तुम सीधी लेट जाओ तो मैं ऐसे ही लेट गयी। टाँगें चौड़ी करके फैला लीं । एस-के मेरी टाँगों के बीच में घुटनों के बल बैठ गया और मेरे जिस्म पे तेल डालना शुरू किया। सारे जिस्म पे तेल डाला, चूचियों की गोलाई में और नाफ़ के सुराख में और चूत के पास तक डाल दिया और डिब्बा एक तरफ़ रख कर मालिश करना शुरू कर दिया। सारे जिस्म पे हाथ से तेल को फैला दिया और मालिश करने लगा। वो चूचियों को मसलता रहा। सारा जिस्म स्लिपरी हो गया। बहुत मज़ा आने लगा और जिस्म बहुत लाईट महसूस होने लगा। जब वो मेरे पैरों पे मालिश करने लग तो मैंने कहा कि मैं सैंडल उतार देती हूँ जिससे तुम ठीक से मालिश कर सको। वो बोला कि किरन रहने दो, इन हाई हील सैंडलों में तुम्हारे ये सैक्सी पैर और भी सैक्सी लगते हैं, और फिर उसने मेरे सैंडलों और पैरों को चूम लिया तो मैं सिसक उठी। मेरी चिकनी चूत को देख कर उसका लंड फिर से टनटना कर खड़ा हो गया था और मेरी चूत देख कर उसके लंड के मुँह में से प्री-कम का पानी आने लगा था। हम दोनों एक दूसरे की आँख से आँख मिला कर एक दूसरे को घूर रहे थे। दोनों नंगे थे और बहुत अच्छा लग रहा था। एस-के बड़ी ज़बरदस्त मालिश कर रहा था। मेरे जिस्म में मस्ती छा रही थी और मेरी चूत जूस के निकलने से गीली हो चुकी थी। उसका लंड मेरी चूत के सामने था। एक टाईम जब वो झुक कर मालिश कर रहा था और उसका लंड मेरी चूत के सामने ही था तो उसका हाथ फिसल गया। मेरी टाँगें तो फैली ही थीं, जिससे चूत खुली हुई थी और जब उसका हाथ फिसला और वो बैलेंस ऑउट होने की वजह से सामने की तरफ़ फिसल गया तो उसका लंड एक ही झटके में मेरी चिकनी चूत के अंदर घुसता चला गया। मेरी आँखें एक दम से बाहर निकल आयीं। मैं उसका लंड चूत के अंदर एक्सपेक्ट नहीं कर रही थी। एस-के ने थोड़े झटके मारे और जब मेरी चूत ने उनके लंड को एडजस्ट कर लिया और मुझे मज़ा आने लगा तो एस-के ने अपना अकड़ा हुआ लंड बाहर निकाल लिया। मैंने कहा, अरे ये क्यों, एस-के..... रहने दो ना अंदर ही.... अच्छा मज़ा आ रहा है, तो उसने कहा, रुको अभी चोदता हूँ थोड़ी देर में, पहले अच्छी तरह से मालिश तो कर लूँ, तो मैंने कहा, ठीक है।

फिर एस-के ने कहा, अब तुम बेड पे उलटी लेट जाओ और तकिया निकाल दो और अपने हाथों को अपने मुँह के सामने फ़ोल्ड करके रख लो, तो मैं वैसे ही लेट गयी जैसा एस-के ने बोला था। अब मैं उलटी लेटी हुई थी और इसी लिये एस-के को नहीं देख सकती थी। एस-के ने फिर मेरे पीछे पीठ पे ऑलिव ऑयल डाला और कंधों के पास और फिर पीठ पे फैला दिया और फिर मेरे गोल-गोल चूतड़ों पे तेल डाल के फैला दिया ताकि तेल नीचे ना गिरे और फिर मेरी टाँगें फैला करके वो मेरी टाँगों के बीच में फिर से घुटनों के बल बैठ गया और झुक कर दोनों हाथों से मेरे कंधों की मालिश करने लगा। ऑयल बहुत चिकना था और उसके हाथ आसानी से फिसल रहे थे। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जिस्म में मस्ती छा रही थी। मेरी आँखें बंद हो रही थी। एस-के ने मेरे पेट से थोड़ा नीचे चूत के पास फिर से तकिया रख दिया जिससे मेरे चूतड़ ऊपर उठ गये। अब एस-के मेरे दोनों चूतड़ों को मसल रहा था और ज़ोर-ज़ोर से दबा रहा था। थोड़ा और तेल डालकर उसने थोड़ा तेल मेरी गाँड खोल के उसके सुराख में भी डाल दिया। अब एस-के मेरी टाँगों के बीच में अपने पैर फ़ोल्ड करके बैठा था। ऐसी पोज़िशन में उसके लंड का सुपाड़ा कभी मेरी चूत से टकराता तो कभी गाँड से। वो आधा उठ-उठ के मालिश कर रहा था और चूतड़ों को ज़ोर-सोर से मसल रहा था और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। दोनों चूतड़ खोल-खोल के गाँड में भी तेल डाल के अपनी उंगली गाँड में अंदर बाहर करता तो मुझे और ज़्यादा मज़ा आता।

एस-के ने अपना लंड तेल के डिब्बे में डाल कर पूरी तरह से तेल से भर लिया। फिर वो मेरे ऊपर आ गया और चूतड़ों के बीच में लंड रख कर मेरे ऊपर झुक गया और मेरे कंधों को मालिश करने लगा। उसका लंड दोनों चूतड़ों के बीच में ऊपर-नीचे ऊपर-नीचे हो रहा था। कभी-कभी लंड का सुपाड़ा फिसल के चूत के सुराख में घुस जाता तो मुझे बहुत मज़ा आता और कभी फिसल के गाँड के सुराख में अटक जाता तो मुझे तकलीफ होती पर मैंने कुछ कहा नहीं क्योंकि तकलीफ उतनी ज़्यादा नहीं होती थी। उसका लंड बिना गाँड के सुराख में घुसे, चूतड़ों की खायी में ऊपर नीचे हो रहा था। अब वो फिर से मेरे जिस्म पे झुका हुआ था और पीठ की मालिश कर रहा था जिससे उसका लंड गाँड के सुराख से टकरा रहा था। उसने बहुत सा तेल फिर से मेरी गाँड में डाल दिया और अपने लंड के सुपाड़े को गाँड के सुराख में घुसा कर ऊपर से तेल टपकाने लगा जिससे तेल डायरेक्ट उसके सुपाड़े पर और गाँड के छेद में गिरता हुआ मुझे महसूस हो रहा था। ऐसे ही करते-करते वो प्रेशर दे रहा था तो सुपाड़ा पूरा अंदर चला गया। मेरी गाँड खुलने-बंद होने लगी। उसने कहा, रिलैक्स किरन! तो मैं चौंकी और कहा, नहीं एस-के प्लीज़..... गाँड मे नहीं डालना नहीं तो मैं मर जाऊँगी। एस-के ने कहा तुम फिक्र ना करो किरन, तुम्हें कोई तकलीफ नहीं होगी.... मैं गारंटी देता हूँ, तो मैंने कहा, नहीं प्लीज़! तो एस-के ने कहा कि तुम हमारी शर्त को भूल रही हो। मैंने पूछा कैसी शर्त? एस-के ने कहा, ओह तुम मेरी शर्त भूल गयी क्या? रात यहीं गुज़ारने की? तो मुझे अचानक याद आ गया और मैं घबरा गयी। तब समझ में आया कि ये किस शर्त की बात कर रहा है। पर अब क्या हो सकता था और अब मुझे यकीन हो गया कि आज मेरी गाँड की खैर नहीं। एस-के मेरी गाँड मारे बिना छोड़ने वाला नहीं। मैं डर रही थी पर कुछ कर भी नहीं सकती थी।

मैं एस-के की मिन्नतें करने लगी कि प्लीज़ गाँड मारने को छोड़ के कोई भी शर्त मंज़ूर है तो उसने कहा, अब नहीं हो सकता.... तुमने कहा था कि तुम्हें मेरी हर शर्त बिना सुने ही मंज़ूर है। एस-के ने कहा, देखो किरन, आज तो मैं तुम्हारी गाँड ज़रूर मारूँगा और अगर तुम अपनी गाँड को टाइट करोगी तो तुम्हें तकलीफ होगी। तुम्हारी गाँड में फ़ुल तेल लगा हुआ है और अगर तुम अपनी गाँड को बिल्कुल रिलैक्स कर दोगी तो बिल्कुल भी तकलीफ नहीं होगी और लंड आसानी गाँड के अंदर फिसल जायेगा क्योंकि मैं मेरे लंड को और तुम्हारी गाँड को तेल से चिकना कर चुका हूँ..... तो बेहतर यही है कि तुम रिलैक्स हो जाओ और गाँड में लंड लेने का मज़ा लो। मैंने सोचा कि आज तो मेरी गाँड इस लौड़े से नहीं बच सकती तो क्यों ना एस-के जैसे कहता है, मैं वैसे ही करती रहूँ। ये खयाल आते ही मैंने अपनी गाँड को रिलैक्स कर दिया और गहरी-गहरी साँस लेने लगी जिससे मेरी गाँड कुछ रिलैक्स हुई। मैंने फिर कहा, देखो एस-के बहुत धीरे करना, नहीं तो मेरी गाँड फट जायेगी। एस-के ने हँस कर कहा, तो क्या हुआ..... चूत भी तो फट चुकी है तुम्हारी.... अब अगर गाँड भी फट जायेगी तो क्या प्रॉबलम है। मैंने कहा, मुझे बहुत दर्द होगा तो उसने कहा कि तुम गाँड को रिलैक्स रखो इससे तुम्हें कोई दर्द नहीं होगा, ओके? तो मैंने भी कहा, ओके।

अब वो फिर से मालिश करने लगा। लंड का सुपाड़ा ऐसे ही गाँड के छेद में ही टिका हुआ था। उसने थोड़ा सा और तेल खुली हुई गाँड में टपकाया और लंड के सुपाड़े को अंदर-बाहर करने लगा। अब उसका लंड और मेरी गाँड, बहुत ही चिकने हो चुके थे और सुपाड़ा आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। एस-के अब मेरे ऊपर फिर से झुक कर करीब लेट गया और मेरे कंधों को ऐसे पकड़ लिया कि उसके दोनों हाथ मेरी दोनों चूचियों के बीच में थे, जिससे मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। उसने धीरे-धीरे अपनी गाँड उठा-उठा कर लंड के सुपाड़े को मेरी गाँड के अंदर-बाहर अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। दोनों के जिस्म चिकने होने से फिसल रहे थे। तकिया मेरी गाँड के नीचे होने से गाँड ऊपर उठ गयी थी और लंड को अंदर आने की दावत दे रही थी। एस-के ने सुपाड़ा अंदर-बाहर करते-करते एक जम के झटका दिया तो लंड तकरीबन आधा गाँड के अंदर घुस गया और मेरे मुँह से एक चींख निकल गयी हाय.... मैं मर गयीईईईईईई..... निकाल लो इसे आआआआहहहह। वो थोड़ी देर ऐसे ही आधा लंड अंदर घुसेड़ कर मेरे ऊपर लेटा रहा। मेरी गाँड एस-के के लंड से कुछ एडजस्ट हुई तो फिर एस-के थोड़ा सा ऊपर उठ गया और फिर से अपने लंड पे, जो आधा मेरी गाँड के अंदर घुसा हुआ था, उसके डंडे पे तेल उढ़ेलने लगा और लंड को अंदर बाहर करने लगा। तेल उढ़ेलने से लंड का डंडा और स्लिपरी हो चुका था और गाँड का सुराख भी स्लिपरी हो गया था।

एस-के ने कहा, किरन अब तुम थोड़ा सा ऊपर उठ कर अपने नीचे से तकिया निकल लो..... अब उसकी ज़रूरत नहीं है...... ऐसे ही नीचे रहेगा तो तुम्हें और दर्द होगा। मैं थोड़ा सा उठी और एस-के ने मेरे नीचे से तकिया निकाल लिया। एस-के ने कहा, किरन अब तुम अपनी गाँड को थोड़ा सा ऊपर उठा लो तो मैंने अपने चूतड़ों को थोड़ा ऊपर उठा लिया। अब मैं बेड पे उलटी लेटी थी और मेरी गाँड थोड़ी सी ऊपर उठी हुई थी और एस-के का मूसल लंड गाँड में आधा अंदर घुसा हुआ था। एस-के ने फिर से अपने हाथ मेरे जिस्म के नीचे से डाल के कंधों को पकड़ लिया और उसके हाथ मेरी चूचियों से लगने लगे। दोनों हाथ दोनों चूचियों के बीच में थे। दोनों थोड़ी देर तक ऐसे ही चिपके हुए लेटे रहे। अब मेरी गाँड उसके लंड से पूरी तरह एडजस्ट हो चुकी थी और मेरी गाँड अपने आप ही थोड़ी सी उठ गयी और गाँड के सुराख के मसल थोड़े रिलैक्स हुए तो एस-के ने समझ लिया कि अब मैं अच्छी तरह से गाँड मरवाने के लिये रेडी हूँ। उसने अपने लंड को आधा ही अंदर-बाहर अंदर-बाहर करके मेरी गाँड मारनी शुरू कर दी। अब मुझे भी अच्छा लगने लगा और मैं मज़े लेने लगी। लंड और गाँड दोनों बहुत ही चिकने और स्लिपरी हो चुके थे। मेरी साँसें अब ठीक से चलने लगी थी। एस-के ऐसे ही गाँड के अंदर आधा लंड घुसा के धक्के मारता रहा और फिर मेरे कंधों को ज़ोर से पकड़ कर इतनी ज़ोर से झटका मारा कि मैं चिल्ला पड़ी, ऊऊऊईईईई अल्लाहहह....आआआआ मर गयी...ईईईईईई ऊऊऊऊऊऊऊ निकाल लो!! पर अब उसका लंड पूरा जड़ तक मेरी गाँड में घुस चुका था और मुझे उसका लंड गाँड फाड़ कर पेट में से घुस कर मुँह से बाहर तक निकलता हुआ महसूस होने लगा। दर्द से मेरी आँखें बाहर निकल गयी और साँसें रुक गयीं और मेरे सामने अंधेरा छाने लगा। शायद मैं फिर से बेहोश हो गयी थी।

एस-के मेरी गाँड में अपना रॉकेट जैसा लंड घुसेड़ कर थोड़ी देर ऐसे ही मेरे ऊपर लेटा रहा। कुछ ही देर के बाद मेरी गाँड अब पूरी तरह से रेडी हो गयी थी और अब गाँड में लंड अच्छा लग रहा था तो एस-के ने पीछे बेड से पैर टिकाकर उछल-उछल के मेरी गाँड मारनी शुरू कर दी। कभी आधा लंड बाहर तक खींच लेता तो कभी सुपाड़े तक बाहर निकाल कर ज़ोर का झटका मारता तो मेरी जान ही निकल जाती और अंदर की साँस अंदर और बाहर की बाहर रह जाती। थोड़ी देर तक तो तकलीफ होती रही लेकिन थोड़ी ही देर में मुझे गाँड मरवाने में बहुत ही मज़ा आने लगा और मैं अपनी गाँड से लंड को पीछे से धक्के मारने लगी। तेल लगा होने से फच-फचक-फचक की आवाज़ें आ रही थी और एस-के का मूसल जैसा लंड मेरी गाँड में घुसा हुआ था। वो ज़ोर-ज़ोर से खचाखच मेरी गाँड मार रहा था और मैं मज़े से मरवा रही थी। मैं अपनी गाँड पीछे धकेल कर उसका मोटा लंड अपनी गाँड में ले रही थी। बहुत मज़ा आने लगा था और उसी वक्त मेरा जिस्म काँपने लगा और मेरी चूत में से जूस निकलने लगा। मेरा ऑर्गेज़म चलता रहा और मैं बे-दम हो कर बेड पे गिर गयी। एस-के अपनी गाँड उठा-उठा कर लंड को पूरा सुपाड़े तक बाहर निकाल-निकाल के मेरी गाँड मार रहा था। उसकी स्पीड बढ़ गयी और वो दीवानों की तरह से मेरी गाँड के अंदर अपना मूसल लंड घुसेड़ रहा था और तेज़ी से मेरी गाँड मार रहा था। फिर उसने एक बहुत ही ज़ोरदार झटका मारा तो मेरे मुँह से फिर से चींख निकल गयी आंआंआंआंआं मर गयी....ईईईई और फिर फौरन ही उसके लंड से मलाई की पिचकारियाँ मेरी फटी हुई गाँड में निकल कर गिरने लगी। पहली पिचकारी के साथ ही मेरी चूत से जूस निकलने लगा और मैं भी झड़ने लगी। एस-के के लंड में से मलाई निकलती गयी और मुझे लगने लगा जैसे उसकी मलाई से मेरी गाँड और मेरा पेट दोनों भर जायेंगे। अभी उसका लंड मेरी गाँड के अंदर ही घुसा हुआ था और वो मेरे जिस्म पे गिर गया। हम दोनों गहरी गहरी साँसें ले रहे थे। थोड़ी ही देर के बाद जब हमारी साँसें ठीक हुई तो एस-के मेरे ऊपर से मेरी साईड में लुढ़क गया और उसका लंड मेरी गाँड में से निकलते ही मेरी गाँड में से उसकी मनि बाहर निकलने लगी और मेरी चूत की दरार में से होता हुई नीचे बेड शीट पर गिरने लगी।

मैं भी अब सीधी हो कर लेट गयी और करवट लेकर एस-के को प्यार करने लगी। दोनों करवट से लेटे थे, एक दूसरे की तरफ़ मुँह करके। फिर हम दोनों एक दूसरे से लिपट के गहरी नींद सो गये। सुबह उठी थो चूत और गाँड में मीठा-मीठा दर्द हो रहा था। हम दोनों ने साथ ही शॉवर लिया और दोनों एक दूसरे को साबुन लगा कर नहलाने लगे। एस-के ने मेरी चूत और गाँड में साबुन लगाया और मैंने एस-के के लंड पे साबुन लगायी और धोने लगी। एस-के के लंड पे हाथ लगते ही उसका लंड एक बार फिर से खड़ा हो गया और मेरे नंगे जिस्म को और मेरी चिकनी मक्खन जैसी चूत को सेलयूट करने लगा जैसे हाथी अपनी सूँड से सेलयूट करता है। मैंने हँस कर कहा, वॉव एस-के.... ये तो फिर से अकड़ने लगा..... तो उसने कहा, किरन तुम्हारी मक्खन जैसी चिकनी और प्यारी चूत शायद मेरे लंड को पसंद आ गयी है और फिर से ये उस में घुसना चाहता है। मैं हँसने लगी और बोली कि एस-के, मैं तुम्हारे लिये और तुम्हारे इतने शानदार लंड के लिये हमेशा ही रेडी हूँ। फिर शॉवर के अंदर ही एस-के ने मुझे अपनी गोदी में उठा लिया और दीवार से टिका कर मेरी चूत में लंड एक ही झटके में पेल दिया और चोदने लगा। मेरी बैक, दीवार से टिकी हुई थी और पैर एस-के की बैक पे लिपटे हुए थे और मैं अपने हाथ एस-के की गर्दन में डाल कर उसके जिस्म से झूल रही थी और उसका लंड मेरी चूत में तूफान मचा रहा था। वो गचागच चोद रहा था और उसका लंड चूत के अंदर ऐसे जा रहा था जैसे हथोड़े से दीवार में सुराख कर रहा हो। मुझे लग रहा था कि मेरी चूत और गाँड फाड़ कर उसका लंड दीवार में घुस जायेगा। उसके एक-एक झटके से मेरी चूचियाँ डाँस करने लगी। एस-के के हाथ मेरे चूतड़ों पे थे और मेरी बैक दीवार से टिकी थी। वो इसी तरह चोदता रहा और मैं दो बार झड़ चुकी थी। अब मुझे लगा कि एस-के भी झड़ने वाला है तो मैंने उसको कस कर पकड़ लिया। एस-के के झटके बहुत ही तेज़ हो गये और मेरी ज़बरदस्त चुदाई होने लगी और फिर उसने एक इतनी ज़ोर से झटका मारा कि मेरी चींख निकल गयी, ऊऊऊऊईईईईईई ईईईईईईई, और मेरा मुँह खुला का खुला रह गया और मैंने महसूस किया कि एस-के का लंड मेरी चूत में फूल रहा है और उसके लंड से गरम-गरम मलाई की पिचकारियाँ निकल रही हैं और मैं फिर से झड़ने लगी। चुदाई होने के बाद उसने मुझे नीचे उतारा और हम ने फिर से शॉवर लिया।

बाथरूम से बाहर निकल कर मैंने फिर से हाई-हील के सैंडल पहने और फिर जब कपड़े पहनने लगी तो एस-के ने कहा, नहीं किरन..... मैं और तुम जितनी देर घर में अकेले रहेंगे, तुम और मैं कोई कपड़ा नहीं पहनेंगे और हम दोनों नंगे ही रहेंगे.... तुम सिर्फ ये सैक्सी सैंडल पहने रहो..... तो मैंने मुस्कुराते हुए कहा, ओक एस-के..... मैं तो तुम्हारी गुलाम हो गयी हूँ..... तुम जैसा कहोगे, मैं वैसा ही करुँगी। फिर मैंने सिर्फ सैंडल पहने, नंगी ही किचन में गयी और ब्रेकफास्ट बनाया और हम दोनों ने नंगे ही डायनिंग टेबल पे बिठ कर खाया। वो शनिवार का दिन था तो एस-के ने ऑफिस फोन कर दिया कि वो किसी और जगह काम से जा रहा है और ऑफिस नहीं अयेगा और फिर अपनी सेक्रेटरी को कुछ इंस्ट्रक्शन दे दिये और सारा काम समझा दिया। शनिवार और इतवार को मेरी जम कर चुदाई हुई। अब मैं अशफाक को भूल चुकी थी और मुझे अशफाक की याद भी नहीं आ रही थी। मैं तो ये सोच रही थी कि एस-के ही मेरा शौहर है और मैं उसकी बीवी ।

मंडे को एस-के को ऑफिस जाना था तो मैंने फिर उससे लिपट कर कहा कि मैं कैसे रहुँगी तुम्हारे बिना तो एस-के मुझे से लिपट गया और किस करने लगा और कहा कि मैं कहीं नहीं जा रहा हूँ.... शाम को फिर आ जाऊँगा और मैंने तुम से प्रामिस भी तो किया हुआ है कि मैं अशफाक के आने तक तुम्हारे साथ ही रहुँगा और फिर आज अपनी वाइफ को एक वीक के लिये उसके मायके जाने के लिये कह दुँगा और बता दुँगा कि मैं किसी काम से मुंबई जा रहा हूँ और एक वीक के बाद आऊँगा। एस-के ने कहा, किरन.... कहीं अशफाक को हमारे रिलेसन के बारे में पता चल गया तो मुश्किल हो जायेगी। मैंने कहा, एस-के तुम अशफाक की फिक्र ना करो..... आई एम श्योर कि अगर उसको मालूम भी हो गया तो वो कुछ नहीं कहेगा क्योंकि उसको खुद ही पता है कि वो मुझे मुतमाइन नहीं कर पा रहा है और उसके लौड़े में अब दम नहीं है और ये कि वो मुझे जब भी चोदने की कोशिश करता है और मुझे गरम करके मेरी चूत के ऊपर ही अपना माल गिरा देता है तो उसकी नज़रें खुद ही नीचे हो जाती हैं और उसको पता है कि मैं उससे मुतमाइन नहीं हूँ..... इसलिये तुम उसकी बिल्कुल भी फिक्र ना करो और वो तुम्हारा अच्छा दोस्त भी है और हमेशा तुम्हारी तारीफ ही किया करता है कि तुम बहुत अच्छे इंसान हो और हमेशा दूसरों की मदद करते रहते हो। एस-के हँसने लगा और कहा कि, हाँ मैं तुम्हारी मदद ही तो कर रहा हूँ, और फिर हम दोनों मिल के हँसने लगे।

इसी तरह से पूरा एक वीक, एस-के मेरे साथ ही रहा। हम दिन-रात अलग-अलग स्टाईल में चुदाई करते रहे और मस्ती में टाईम गुजरता रहा। उस पूरे वीक में मैं सिर्फ हाई-हील के सैंडल ही पहने, बिल्कुल नंगी रही। एक वीक के बाद अशफाक वापस आ गये तो उन्होंने पूछा कि मेरा काम कैसे चल रहा है तो मैंने कह कि, हाँ ठीक ही चल रहा है.... एस-के यहाँ ही आ कर मुझे सब कुछ सिखा देते हैं। अशफाक ने आँख मार कर कहा कि कुछ हमें भी तो बताओ कि अब तक क्या क्या सिखा दिया है हमारी प्यारी सी किरन जान को.... तो मेरे मुँह पे खुद-ब-खुद शरम आ गयी और अशफाक मुझे गौर से देखने लगा और कहा कि, किरन! एस-के मेरा सबसे प्यारा दोस्त है.... देखना कि उसको कोई तकलीफ ना हो और जब वो घर पे ही आता है काम सिखाने के लिये तो उसका पूरा खयाल भी रखा करो। मैंने मुस्कुरा कर सर हिला दिया और कहा कि ठीक है, मैं एस-के के पूरा खयाल रखुँगी, तुम फिक्र ना करो। ऐसी ही दो मतलब की बातें हुई जिससे मुझे एक आयडिया तो हो गया कि अगर एस-के मुझे चोद भी दे तो अशफाक कोई फ़ील नहीं करेगा और मुझे ख़याल आया के शायद अशफाक चाहता भी यही हो के एस-के मुझे चोदे और मुझे मुतमाइन करे। खैर ये मेरा और एस-के कि चुदाई का सिलसिला चलता रहा। अब तो जैसे एस-के ही मेरा शौहर था। वो ही मुझे चोदता था और मैं उसके चोदने से बिल्कुल मुतमाइन थी।

एक टाईम हमने एस-के को डिनर पे बुलाया। हम तीनों ने खाना खाया। डिनर के बाद सोफ़े पे बैठे व्हिस्की पी रहे थे तो अशफाक ने एस-के से कहा कि एस-के! किरन तुम्हारी बहुत तारीफ करती है कि तुम उसको काम अच्छी तरह से समझा रहे हो और उसकी पूरी मदद कर रहे हो। मैंने देखा कि एस-के के चेहरे पे एक रंग आ के चला गया। उसने समझा कि शायद अशफाक को उसके और मेरे रिश्ते का किसी तरह से पता चल गया पर एस-के ने कुछ कहा नहीं तो मैंने ही कहा कि हाँ अशफाक! एस-के बहुत ही अच्छी तरह से मुझे काम समझा रहे हैं, तुम फिक्र ना करो और मैं उनका पूरा खयाल भी रख रही हूँ जैसा तुम ने कहा था। मैंने देखा कि अशफाक के चेहरे पे इतमिनान दिखने लगा और फिर एस-के ने भी कहा कि यार अशफाक! किरन एक बहुत ही अच्छी लड़की है उसने काम बहुत ही जल्दी सीख लिया और अच्छी तरह से कर भी रही है और हाँ वो मेरा अच्छी तरह से खयाल भी रखती है। फिर अशफाक ने कहा, देखो किरन! एस-के कि खिदमत में किसी किस्म की कमी ना रह जाये, तो फिर मैंने कहा कि हाँ, तुम फिक्र ना करो मैं सब देख लूँगी। अशफाक की बातों से ऐसे अंदाज़ा होता था कि हमारे बारे में वो कुछ समझ गया था या हमें आपस में चुदाई का सुझाव दे रहा था। हमारी कुछ समझ में नहीं आ रहा था। खैर हमने सोचा कि अगर अब अशफाक को पता भी चल जाये तो कोई बात नहीं...... जब ऐसी कोई बात आयेगी तो देखा जायेगा।

व्हिस्की पीते-पीते हम ऐसे ही बैठे बातें कर रहे थे तो एस-के ने कहा कि कुछ महीनों बाद उसको दो हफतों के लिये न्यू-यॉर्क जाना पड़ रहा है। एस-के ने मज़ाक में कहा कि यार अशफाक! अगर तुम इजाज़त दो तो मैं किरन को भी न्यू-यॉर्क की सैर करा लाऊँ तो अशफाक ने कहा, अरे इसमें पूछने की क्या बात है.... ये तो बड़ी अच्छी बात है.... ले जाओ..... वो यहाँ अकेले में बोर होती रहती है और मेरा कोई ठिकाना भी तो नहीं है.... कभी भी मुझे बिज़नेस के सिलसिले में बिना प्रोग्राम के ही कहीं भी चले जाना पड़ता है तो एस-के ने कहा, नहीं यार! मैं तो मज़ाक कर रहा था तुम तो सीरियस हो गये। अशफाक ने कहा, अरे नहीं यार! मैं सच में संजीदा हूँ.... अगर तुम्हें कोई प्रॉबलम ना हो.... आई मीन कि कोई बिज़नेस की प्रॉबलम..... तो एस-के ने कहा, नहीं यार! मुझे किया प्रॉबलम हो सकती है। अशफाक ने कहा, तो फिर क्या प्रॉबलम है ले जाओ किरन को अपने साथ यार..... मैं कह रहा हूँ ना। अशफाक और एस-के ऐसे ही बातें कर रहे थे और मैं कभी अशफाक की सूरत देखती तो कभी एस-के की और समझने की कोशिश कर रही थी कि कहीं ये दोनों वाकय संजीदा हैं या दोनों ही मज़ाक कर रहे हैं।

एस-के ने कहा, देखो यार मुझे ले जाने में कोई ऐसी प्रॉबलम तो नहीं है पर तुम्हें तो पता है कि वहाँ कान्फ्रेंस में जा रहा हूँ और कान्फ्रेंस वाले जिस फाइव-स्तार होटल में कान्फ्रेंस होती है उअसी होटल मेरं एक कमरा देते हैं। एक तो उसी होटल में दूसरा कमरा मिलना मुश्किल होगा और मिला भी तो एक दिन का किराया ही बीस-हज़ार रुअप्ये के हिसाब से दो हफ्तों के डेढ़-लाख लग जायेंगे... वैसे भी डबल बेड के रूम में एक ही बेड होता है, रहने दो.... मैं तो ऐसे ही मज़क कर रहा था। अशफाक ने कहा अरे यार..... ऐसी भी क्या बात है.... एक ही रूम में रह लेना और मेरी तरफ़ मुड़ कर अशफाक ने पूछा कि क्यों किरन.... तुम रह सकती हो ना एस-के के साथ एक ही रूम में?? बेड के एक तरफ़ तुम सो जाना और एक तरफ़ एस-के सो जायेगा तो मैंने शरम से लाल लाल हो के कहा, तुम भी कैसी बातें करते हो अशफाक..... बिना सोचे समझे.... तुम्हें कुछ पता भी है कि तुम क्या कह रहे हो? उसने कहा, अरे यार किरन.... जाओ थोड़ा घूम फिर कर आओ.... बाहर की दुनिया देख लो..... इंडिया में कहाँ-कहाँ फिरोगी.... मैं तो तुम्हें नहीं ले जा सकता..... एस-के के साथ जाने में क्या प्रॉबलम है? मैंने कहा, क्या अशफाक.... तुम भी ना ऐसे-ऐसे प्रपोज़ल दे रहे हो जो तुम भी जानते हो कि कभी नहीं हो सकता, तो अशफाक ने कहा, क्यों नहीं हो सकता??? अरे बाबा मैं तुम्हें परमिशन दे रहा हूँ ना और एस-के मेरा बचपन का दोस्त है और हम दोनों ने बहुत मस्तियाँ भी की हैं.... मैं एस-के को अच्छी तरह से जानता हूँ। फिर अशफाक और एस-के दोनों साथ में हँसने लगे और एस-के ने कहा, क्या यार अशफाक.... जाने दो ना.... किरन के सामने क्या हमारी पुरानी बातें लगाये बैठे हो तुम.... वो भी क्या सोचेगी हमारे बारे में। मैंने हँस के कहा, नहीं मैं कुछ नहीं सोचने वाली.... जवानी में तो हर कोई इंजॉय करता ही है.... हो सकता है आप लोगों ने भी कुछ ऐसे ही इंजॉय किया होगा, मैंने आँख मारते हुए कहा तो अशफाक ने कहा कि, हाँ बाबा! तुम भी तो जवान हो जाओ और थोड़ा इंजॉय कर के आओ... कमरे की फिक्र मत करो... मैं खर्चा उठाने को तैयार हूँ। एस-के ने बात खतम करते हुए कहा कि यार..... अभी तो टाईम पड़ा है..... तुम दोनों मिल के सोर्ट ऑउट कर लो..... मुझे तो कोई प्रॉबलम नहीं है.... किरन मेरे साथ जा सकती है..... ऐसी कोई बात नहीं। जब तुम लोग निर्णय करलो तो बता देना..... मैं सारे इंतज़ाम कर लूँगा। फिर अशफाक से हाथ मिला कर और मेरे कंधे पे हाथ रख कर अपनी तरफ़ थोड़ा सा खींचा और गूड-बॉय कह कर वो चला गया।

एस-के के चले जाने के बाद हम सोने के लिये अपने बेडरूम में चले गये। मुझे टोटल अंधेरे में नंगी सोने की आदत है, इसी लिये सोने के टाईम पे हम नाइट लैंप नहीं लगाते। और ये सोच कर नंगी सोती हूँ कि कभी अशफाक की आँख खुल जाये और उसका मूड आ जाये तो हो सकता है कि कभी मुझे सही तरीके से चोद दे, जब कि ऐसा कभी हुआ नहीं। अंधेरे में लेटे-लेटे अशफाक ने मेरी चूचियों को दबाना और मसलना शुरू किया तो मैंने उसका आधा उठा हुआ लंड अपने हाथ में पकड़ लिया और दबाने लगी। अशफाक का एक हाथ मेरी चूत का मसाज कर रहा था और मैं गरम होने लगी और चूत में से जूस निकलने लगा। अशफाक को हमेशा ही चुदाई की जल्दी होती है, चाहे उसका लंड पूरी तरह से खड़ा हुआ हो या नहीं। तो आज भी यही हाल था उसका। लंड अभी पूरी तरह से सख्त भी नहीं हुआ था और वो मेरे जिस्म पे चढ़ आया और टाँगों के बीच बैठ कर अपने आधे खड़े लंड को मेरी चूत में रगड़ने लगा। उसके लंड से थोड़ा प्री-कम निकल रहा था, जिससे मेरी चूत स्लिपरी तो हो गयी थी पर उसके लंड में अभी भी सखती नहीं आयी थी। वो मेरे ऊपर झुक आया और लंड को चूत में घुसाने की कोशिश करने लगा और लंड का सुपाड़ा तो अंदर घुस ही गया किसी तरह से। शायद चूत बहुत गीली हो गयी थी उसके प्री-कम से। खैर लंड का सुपाड़ा तो अंदर घुसा और उसने एक झटका मारा और लंड अंदर घुसेड़ने की कोशिश की, पर उसी वक्त उसके लंड में से मलाई निकल गयी और थोड़ी चूत के अंदर और थोड़ी चूत के बाहर ही निकल गयी। मेरे मुँह से "ओह शिट" निकल गया। अशफाक गहरी साँस लेता हुआ मेरे ऊपर से लुढ़क के मेरे बाजू में लेट गया।

मैं पूरी तरह से गरम हो चुकी थी और साथ ही खाने के बाद पिये हुए तीन पैग व्हिस्की का नशा-सा भी छाया हुआ था। मेरा मस्ती के मारे बुरा हाल था और चूत में आग लगी हुई थी पर क्या करती। अशफाक अपनी मलाई मेरी चूत के बाहर ही गिरा के बाथरूम चला गया तो मैंने अपनी उंगली चूत में घुसेड़ के अंदर बाहर-करना शुरू कर दिया और एस-के का लंड और उसकी चुदाई का सोचते-सोचते मैं बहुत ज़ोर से झड़ गयी। अशफाक ने बाथरूम से बाहर निकलते-निकलते मुझे अपनी उंगली चूत में डाल कर अंदर-बाहर करते देख लिया पर कुछ बोला नहीं। शायद खुद ही कुछ समझ गया होगा कि मैं ऐसा क्यों कर रही हूँ, क्योंकि वो अच्छी तरह से नहीं चोद सका और मैं प्यासी रह गयी थी, इसी लिये अपने ही हाथों अपनी चूत का मसाज कर रही हूँ।

थोड़ी देर के बाद मैंने न्यू-यॉर्क की बात छेड़ दी। मैं तो दिल से चाहती थी कि मैं एस-के के साथ जाऊँ और हर स्टाईल में खूब चुदवाऊँ। मैंने पूछा, अशफाक.... क्या तुम संजीदा हो मुझे एस-के के साथ भेजने के लिये, तो उसने कहा, हाँ किरन... जा कर आओ.... तुम्हारी भी थोड़ी आऊटिंग हो जायेगी.... कब तक घर में ही पड़ी रहोगी तो मैंने कहा, अशफाक तुमने सोचा है कि तुम क्या कह रहे हो.... अगर मैं चली गयी तो लोग क्या कहेंगे और खुद तुम कैसा फ़ील करोगे कि मैं किसी और मर्द के साथ उसके रूम में अकेली रहुँगी तो....? अशफाक ने कहा, नहीं किरन, मैं फ्री खयालात का आदमी हूँ और ये ऐसी क्या बात है.... तुम फिक्र ना करो, मैं कुछ सोचने वाला नहीं हूँ। मैंने शरारत से उसके लंड को पकड़ के दबाया और कहा कि अगर एस-के ने मुझे ये दिखा दिया तो मैं क्या करूँ? अशफाक ने कहा, किरन तुम्हें पता है.... एस-के का लंड इतना मोटा और बड़ा है.... उसने अपने हाथ में अंगुलियों को मिला के कहा जो मुझे अंधेरे में नज़र आ गया। मैंने पूछा, मुझे क्या करना है.... पर तुम्हें कैसे मालूम एस-के के लंड के बारे में? तो उसने बताया कि पहली दफ़ा तो उसने कॉलेज में ही इंटरवल के टाईम पे क्लास में ही अपना लंड निकाल कर सारी क्लास को दिखाया था। मैंने कहा, क्या बात करते हो.... ऐसे कैसे कोई क्लास में सबके सामने दिखा सकता है.... लेक्चरर नहीं थे क्या? तो उसने कहा कि, एक दिन हम कॉलेज में थे तो बारिश होने लगी और बहुत ज़ोर की होने लगी। उस दिन लेक्चरर क्लास में नहीं आये और फिर एस-के को पिशाब करना था.... बाहर जाना मुश्किल था तो किसी ने मज़ाक से कहा कि अरे यार खिड़की में खड़े हो जाओ और मूत दो तो उसने सच में ऐसे ही किया और अपने बेंच पे खड़ा हो गया और विंडो में खड़े हो कर पैंट में से लंड बाहर निकाला और मूतने लगा। सारे लड़के और लड़कियाँ हैरत से देखने लगे और जितनी देर तक वो मुतता रहा, सारे लड़के और लड़कियाँ उसके इतने मोटे और बड़े लंड को देखते रहे। फिर अशफाक ने कहा कि, अगर तुम्हें भी कभी चाँस मिले तो तुम भी देखना.... मैंने तो कभी किसी का इतना बड़ा और इतना मोटा लंड नहीं देखा। अब मैं अशफाक से कैसे कहती कि मैं उस लंड को जिसकी वो इतनी तारीफ कर रहा है, मैं अपने जिस्म के हर छेद में वो वंडरफुल लंड डलवा चुकी हूँ और उसकी क्रीम खा के पेट भी भर चुकी हूँ। मैंने कहा, धत्त मैं क्या करुँगी उसका लंड देख कर??? मुझे तो बस तुम्हारा ही लंड चाहिये.... मुझे किसी और के लंड से क्या लेना देना है, तो वो हँसने लगा और कहा कि, वो तो है ही पर अगर कभी चाँस मिले तो ट्राई ज़रूर कर लेना। मैंने बात खतम करने के लिये कहा कि, ठीक है.... देखेंगे और फिर हम दोनों सो गये।

उस रात हम देर तक एस-के की बातें करते रहे थे। इसी लिये सुबह देर से उठे और शॉवर लिया और ब्रेकफॉस्ट तैयार करके टेबल पे बैठ के नाश्ता करने लगे। नाश्ता करते-करते तकरीबन दस बज चुके थे तो अशफाक ने कहा कि उसको देर हो रही है.... और वो रेडी होने के लिये चला गया। इतनी देर में मैं कॉफी बना कर ले आयी। अशफाक रेडी हो के आये तो कॉफी रेडी थी। हम दोनों कॉफी पीने लगे। इतने में ही बेल बजी। मैंने डोर खोला तो एस-के खड़ा था। अंदर आते ही कहा, अरे इतनी देर से नाश्ता कर रहे हो.... क्या बात है? तो हमने कहा कि हाँ रात देर तक बातें कर रहे थे और सोने तक बहुत रात हो गयी थी, इसी लिये सुबह देर से आँख खुली। मैं एक और कप कॉफी लेकर आ गयी और एस-के को दे दिया तो वो भी कॉफी पीने लगा और बोला कि वाह.... क्या मस्त कॉफी बनायी है आज किरन ने! अशफाक ने कहा कि सुनो एस-के, रात हमने फैसला कर लिया है और किरन तुम्हारे साथ जाने के लिये रेडी हो गयी है.... तो बाकी के इंतज़ामात मैं तुम पर छोड़ देता हूँ.... तुम जैसे चाहो कर लो... मुझे एक्सपेंस बता देना और हाँ! शायद मुझे भी कुछ दिनों के लिये मुंबई जाना पड़े। मैं मुंबई चला जाऊँगा और तुम दोनों न्यू-यॉर्क चले जाना। एस-के ने कहा, ठीक है अगर तुम दोनों ने मिल के फैसला किया है तो मुझे क्या प्रॉबलम हो सकती है.... मैं सारे इंतज़ाम कर लूँगा।

अशफाक ने दोनों को गूड-बॉय किया और चला गया। उसके जाने के बाद डोर लॉक किया और मैं दौड़ती हुई आयी और एस-के से लिपट गयी। मैं बे-इंतहा खुश थी कि अब सही मायेने में हनीमून का मज़ा आयेगा। उस दिन ऑफिस का काम तो खाक होता, बस चुदाई ही हुई सारा दिन। एस-के की वाइफ भी अपने मायके चली गयी थी तो वो भी फ्री था। सुबह से रात तक मेरे साथ ही रहा और हर स्टाईल में चुदाई की। वो अपने साथ स्कॉच व्हिस्की लाया था और हमने पी कर मदहोशी में इतनी चुदाई की कि उसने मेरी चूत का भोंसड़ा बना डाला। चूत के लिप्स सूज गये थे और चूत डबल रोटी की तरह लग रही थी।

बाद में एस-के ने बताया कि उसने न्यू-यॉर्क जाने के इंतज़ाम शुरू कर दिये हैं। वहाँ के होटल को ई-मेल दे दिये हैं और सब काम होने के बाद वो मुझे बता देगा।

एक दिन एस-के ने बताया कि उसको एक वीक के लिये कहीं टूर पे जाना पड़ रहा है और हो सकता है कि थोड़े दिन ज़्यादा भी हो सकते हैं। इत्तेफ़ाक से अशफाक ने भी रात में आ कर बताया कि वो भी एक वीक के लिये कहीं बाहर जा रहा है तो मैं बहुत उदास हो गयी और सोचने लगी कि क्या करना चाहिये एक वीक तक।

दूसरे दिन अशफाक और एस-के दोनों बाहर चले गये। मैं घर में अकेली रह गयी। मैं बहुत ही उदास थी। इतने में बेल बजी, डोर खोला तो देखा कि सलमा आँटी डोर पे खड़ी मुस्कुरा रही हैं। सलमा आँटी अपने मायके से आ गयी थी और मेरे पास मिलने आ गयी। एस-के के साथ इतना टाईम गुज़ारने के बाद मुझे सलमा आँटी कि ज्यादा याद भी नहीं आयी थी। अब उन्हें देखा तो मेरे चेहरे पे मुस्कुराहट आ गयी और मैंने दिल में सोचा कि चलो कुछ तो इंजॉय कर सकते हैं। सलमा आँटी को बिठाया और मैं व्हिस्की की बोतल और ग्लास, पानी वगैरह ले आयी क्योंकि ये हम दोनों का रूटीन बन गया था कि हम दोनों चाय-कॉफी की जगह व्हिस्की पी कर ही मस्ती करते थे। दोनों व्हिस्की पीने लगे और इधर-उधर की बातें करने लगे। मैंने आँटी को आँख मार कर पूछा कि, आँटी! क्या कुछ खाने को मिला या मायके से भूखी ही वापस आयी हो तो वो हंसने लगी। कुछ बताया नहीं और इतना कहा कि तुम्हारी बहुत याद आती थी। मैंने भी कहा कि हाँ, मुझे भी आपकी बहुत याद आती थी जबकि हक़ीकत तो ये थी कि एस-के के साथ रहते हुए मुझे आँटी की इतनी ज्यादा भी याद नहीं आयी। फिर जब थोड़ा नशा सवार हुआ तो हमने वही सिक्स्टी-नाईन वाले स्टाईल में एक दूसरे की चूतों को चूसा और अपनी चूतों की प्यास बुझायी। आँटी की चूत में से ढेर सारा जूस निकला तो मैंने हँस के कहा कि, वॉव आँटी! इतना ढेर सारा जूस.... लगाता है कोई मिला नहीं तो फिर वो हंसने लगी। मैं भी अकेली थी इसी लिये आँटी देर रात तक मेरे साथ ही रही और रात में जाते-जाते भी एक बार और हमने अपनी चूतें आपस में एक दूसरे से रगड़ी और फिर चूस कर एक दूसरे का जूस पिया और आँटी के चले जाने के बाद मैं अपने रूम में सोने चली गयी।

दूसरे दिन जब सलमा आँटी आयी तो उनके साथ एक लड़की भी थी। होगी कोई तकरीबन सत्रह या अठारह साल की। काफी खूबसूरत थी। मैंने दोनों को अंदर आने के लिये कहा। मैंने अपने और आँटी के लिये पैग बनाये और उस लड़की के लिये कॉफी बनाने किचन में चली गयी। आँटी तो मेरे साथ फ्री थी ही.... वो भी किचन में आ गयी तो उनके साथ ही वो लड़की भी आ गयी। हम व्हिस्की पीते हुए बातें करने लगीं। आँटी ने बताया कि इस लड़की का नाम डॉली है... इसके पेरेंट्स भी उनके साथ वाली बिल्डिंग में ही रहते हैं। इसकी मम्मी सायरा और डैडी जॉन, दोनों रेलवे में काम करते हैं। इसके डैडी एंगलो-इंडियन क्रिसचन हैं लेकिन मम्मी मुस्लिम हैं। उनकी लव मैरिज थी ये मुझे बाद में पता चला। खैर, आँटी को डॉली की मम्मी ने बोला था कि मुझसे पूछें कि क्या मैं डॉली को उसके बारहवीं के इग्ज़ैम के लिये कुछ मदद कर सकती हूँ। मैंने कहा कि, आँटी आप को पता नहीं कि अब मैं जॉब करने लगी हूँ और ऑफिस से काम घर में ला कर यहीं पे डेटा एंट्री करती हूँ जिसके लिये ऑफिस से मेरे घर में एक कंप्यूटर भी आ गया है और मैं उसको फ़ुल टाईम नहीं दे सकती.... बस इतना कर सकती हूँ कि उसको थोड़ा सा गाईड कर सकती हूँ और उसके होमवर्क में या कोई मुश्किल हो तो समझा सकती हूँ पर फ़ुल टाईम नहीं पढ़ा सकती।

सलमा आँटी ने कहा कि ठीक है, ये कल से तुम्हारे पास आ जायेगी इसको इसके इग्ज़ैम तक ही मदद कर दो... बारहवीं का इंपोर्टेंट साल है। मैंने कहा कि कोई बात नहीं.... ये कल शाम से आ जाये.... सुबह का टाईम मैं एस-के के लिये फ्री रखना चाहती थी। डॉली बहुत ही खूबसूरत लड़की थी, एक दम से गुड़िया जैसी। शायद इसका नाम इसी लिये डॉली रखा होगा। अभी जवानी की दहलीज पर कदम रख रही थी। क्रीम जैसा गोरा रंग, लाईट ब्राऊन कलर के बालों की पोनी टेल जो उसके सर से लटकती हुई बहुत अच्छी लग रही थी। जैसे इस उम्र की लड़कियों में सजने-संवरने क नया जोश होता है वैसे ही उसने मेक-अप वगैरह किया हुआ था। नये स्टाईल का शॉर्ट स्कर्ट और ब्लाऊज़ पहना हुआ था। नाखुनों पे नेल-पॉलिश, होंठों पर लिपस्टिक और पैरों में स्ट्रैपी सैंडल। चूचियाँ थोड़ी छोटी ही थी, संतरे जितनी होंगी। उसके ब्लाऊज़ में से उसके निप्पलों का छोटा सा उभार साफ़ नज़र आ रहा था। मीडियम-बिल्ट थी उसकी लेकिन सब मिलकर वो एक बे-इंतहा खूबसूरत डॉल जैसी थी और मुझे पक्का यकीन था कि रास्ते चलते कितने लोग उसको देख के अपने पैंट मैं ही झड़ जाते होंगे। डॉली डाँस क्लास भी अटेंड करती थी। इसी लिये उसकी टाँगें और जाँघें भी बहुत ही शेप में थीं और जब वो मुस्कुराती तो उसके गालों में छोटे-छोटे डिंपल पड़ते बहुत ही मस्त दिखायी देते थे।

एक हफ्ता आँटी तकरीबन रोज़ाना आती रहीं और हम मिलकर घंटों लेस्बियन-चुदाई करते। बाद में सुबह एस-के आ जाता और एक-दो पैग पी कर फिर हम दो या तीन रॉऊँड मस्त चुदाई करते और फिर वो ऑफिस चला जाता। कभी तो डायरेक्ट लंच से थोड़ा पहले आता और चुदाई के बाद लंच करके चला जाता। डॉली तकरीबन डेली शाम को पाँच बजे के करीब आ जाती और अपना काम करती रहती। कभी उसे कुछ पूछना होता तो मैं उसको समझा देती.... कभी मैथ तो कभी सायंस। डॉली एक एवरेज स्टूडेंट थी लेकिन समझाने पर जल्दी ही समझ जाती। मैं उसको अक्सर देखती रहती थी.... वो थी ही इतनी खूबसूरत।

एक दिन अच्छी खासी बारिश हो रही थी। एस-के भी नहीं आ सका था और अशफाक हमेशा की तरह कहीं बाहर टूर पे गये हुए थे। सलमा आँटी भी कहीं मसरूफ थीं। दो दिन से चुदाई नहीं हुई थी तो मैं थोड़ा सा उदास थी और मौसम भी ऐसा ही था कि मैंने अकेले ही बैठ कर व्हिस्की के दो तगड़े पैग पी लिये। फिर जैसे मैं एस-के के लिये मेक-अप वगैरह करती हूँ, वैसे ही मेक-अप किया और हाई-हील सैंडल पहने और एस-के को याद करते हुए नशे में अपनी चूत को एक केले से खूब चोदा। थोड़ी देर बाद, शाम के वक़्त जब डॉली ने बेल बजायी तो मैंने फटाफट एक नाईटी और उसके ऊपर गाऊन पहन लिया और डोर खोला। वो अच्छी खासी भीग चुकी थी। मैंने कहा कि अरे डॉली.... तुम तो भीग चुकी हो.... चलो अंदर, मैं तुम्हें टॉवल देती हूँ... अपने जिस्म ड्राई कर लो और तुमको इतनी बारिश में आने की क्या ज़रूरत थी.... कल आ जाती ना! उसने कहा, नहीं आँटी मुझे कुछ आप से समझना था.... कल हमारी क्लास में सायंस का टेस्ट है.... इसी लिये आना ज़रूरी था, तो मैंने कहा, ठीक है पहले तुम चलो और अपना जिस्म पौंछ लो.... फिर पढ़ लेना। मैं डॉली को लेकर अपने रूम में आ गयी और उसको बड़ा सा टॉवल दिया और कहा कि तुम अपने कपड़े उतार दो और ये टॉवल लपेट लो.... कपड़े जब सूख जायें तो पहन लेना। तो उसने कहा, ठीक है आँटी! डॉली कुछ हिचकिचा कर रही थी कपड़े चेंज करने के लिये क्योंकि मैं कमरे में ही थी लेकिन मैंने कोई खास ध्यान नहीं दिया। मैं समझ रही थी कि वो कपड़े चेंज कर लेगी पर उसने नहीं किये तो मैंने पूछा क्या हुआ? तुमने चेंज नहीं किया? वो थोड़ा शर्मायी तो मैं समझ गयी कि शायद मेरे सामने चेंज नहीं करना चाह रही है तो मैंने हँस कर कहा, अरे डॉली हम दोनों ही फीमेल हैं और पता है लड़कियाँ हमेशा एक दूसरे के सामने कपड़े चेंज करने में शर्माती नहीं.... चलो बदल लो। फिर मैंने कहा कि अच्छा चलो.... मैं भी तुम्हारे सामने ही अपने कपड़े चेंज कर लेती हूँ ताकि तुमको अगली बार शरम नहीं आये और मैंने अपनी नाइटी और गाऊन उतार दिये। मैं अब उसके सामने बिल्कुल नंगी थी। सिर्फ हाई-हील सैंडल पहने हुए थे। एक-दो मिनट मैं ऐसे नंगी हालत में ही अलमारी में कपड़े टटोलती रही और फिर बिना पैंटी और ब्रेज़ियर के एक पतली सी झीनी नाइटी पहन ली। इतनी देर तक डॉली मेरे जिस्म को गौर से देखती रही। फिर डॉली ने भी अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये और शर्मा कर मेरी तरफ़ देखने लगी। मैंने देखा कि उसकी चूचियाँ तो अच्छी खासी हैं। बड़ी मस्त लग रही थी डॉली.... नंगी खड़ी हुई। उसने भी सैंडल पहने हुए थे पर उसकी हील मेरे सैंडल जैसी ऊँची नहीं थी, ढाई-तीन इंच ऊँची ही रही होगी। उसकी चूचियों भी अच्छी खासी थीं, ऐसा लगाता था के जब चूचियाँ कुछ और बड़ी हो जायेंगी तो इस शेप में आ जायेंगी। मैंने देखा कि डॉली ने स्कर्ट के अंदर पैंटी पहनी हुई थी और पैंटी भी भीग चुकी थी और उसकी गोरी-गोरी बगैर बालों की चूत साफ़ नज़र आ रही थी। वो पैंटी नहीं उतार रही थी। मैंने कहा कि डॉली, पैंटी भी उतार दो.... ये गीली रहेगी तो तुम्हें सर्दी लगेगी! तो उसने शर्माते हुए पैंटी भी उतार दी और पूरी नंगी हो गयी। मैंने गौर से देखा तो वो आसमान से उतरी हुई कोई हूर लग रही थी और इतना पर्फ़ेक्ट जिस्म किसी तराशी हुई मूर्ती में ही दिख सकता था।

मैंने डॉली की स्कर्ट, ब्लाऊज़, ब्रा और पैंटी लेकर बालकोनी में सूखने के लिये फैला दिये। मैंने कहा कि तुम मेरे बाथरूम में जा के गरम पानी से शॉवर लेकर आ जाओ और टॉवल लपेट लो और हाँ अंदर से लॉक नहीं करना क्योंकि शायद अंदर से तुमसे ना खुले.... उसका बोल्ट कुछ टाइट है। मैं उसके साथ बाथरूम में आ गयी। मेरे बाथरूम में बड़े साईज़ का बाथ टब है जिसमें कभी मैं ड्रेन होल को बंद करके गरम पानी भर करके उसमें कोई पर्फयूम डाल कर बैठ जाती हूँ और बाथ टब में जकूज़ी भी लगा हुआ है जिसके बुलबुलों से मेरा जिस्म रिलैक्स हो जाता है और जिस्म में पर्फयूम की महक भी आ जाती है। मैंने ऐसा ही उसके लिये भी किया और बाथ टब में गरम और ठंडा पानी मिक्स करके डाल दिया और थोड़ा सा पर्फयूम भी डाल दिया और उसमें पानी उतना ही डाला जितना डॉली के जिस्म को बर्दाश्त हो सके और डॉली से कहा कि थोड़ी देर वो इसमें ऐसे ही बैठ जाये... उसके बाद ड्रेन होल खोल दे तो सारा पानी निकल जायेगा और फिर बाहर आ जाये। उसने ऐसा ही किया। वो सैंडल उतार कर बाथ टब में बैठ गयी। बाथरूम का डोर खुला हुआ था। मैं अपने रूम में आकर बिस्तर पर बैठ गयी। मेरा सिर नशे में हल्का महसूस हो रहा था और मेरा सारा ध्यान एस-के की तरफ़ था। वो दो दिनों से नहीं आ सका था। कुछ तो बारिश का असर था कुछ उसको काम भी ज़्यादा था। मैं यही सोच रही थी और फिर एक और पैग बना कर पीते हुए एस-के के साथ अपने न्यू-यॉर्क के ट्रिप के बारे में सोचने लगी और यही सोच-सोच कर मेरे होंठों पे मुस्कुरहाट भी आ रही थी।

बाथरूम से डॉली के चींखने की आवाज़ से मैं अपने न्यू-यॉर्क के ख्वाब से बाहर आ गयी और बाथरूम कि तरफ़ दौड़ के गयी तो देखा कि डॉली टब के बाहर के हिस्से में नीचे गिरी हुई है। उसने शायद टब से बाहर निकल कर सैंडल पहने होंगे और फर्श थोड़ा गीला होने से उसका पैर फिसल गया था। मैं उसको नंगी ही उठा कर सहारा देकर अपने बेडरूम में लेकर आ गयी और बेड पे बड़ा सा टॉवल बिछा कर वैसे ही उसको टॉवल पे लिटा दिया और उसके जिस्म को उसी टॉवल से सुखाते वक्त देखा कि उसकी चूत तो मक्खन जैसी चिकनी और मलाई जैसी गोरी है। उसकी बिना बालों वाली और मोटे लिप्स की चूत, जिसके दोनों लिप्स एक दूसरे से थोड़े से अलग हुए थे और अंदर से पिंक कलर, बहुत सैक्सी लग रही थी। मेरा दिल कर रहा था कि बस मैं इसकी चूत को चूम लूँ और अपनी ज़ुबान उसकी चूत के अंदर डाल के चाट डालूँ। मैंने उसके जिस्म को सुखा कर के ऐसे ही टॉवल से लपेट दिया और पूछा कि क्या हुआ तो वो बोली कि आँटी, मैंने बाहर निकल कर सैंडल पहने ही थे कि मेरा पैर फिसल गया और मैं गिर गयी! मैंने कहा कि तुम फिक्र न करो मैं तुम्हारे जाँघों पे ऑलिव ऑयल कि मालिश कर दूँगी तो थोड़ी ही देर में तुम ठीक हो जाओगी! तो उसने कहा ठीक है आँटी और बोली कि यू आर सो स्वीट आँटी.... आप बहुत अच्छी हो.... कितना खयाल रखती हो मेरा.... मेरी मम्मी के पास तो मेरे लिये टाईम ही नहीं है। मैं अपनी तारीफ सुन कर थोड़ा सा शरमा गयी और कहा नहीं डॉली, ऐसी बात नहीं.... तुम देखो कि तुम्हारे मम्मी और डैडी दोनों काम करते हैं, ताकि तुम को अच्छी तालीम दे सकें और तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरी कर सकें। उसने कुछ कहा नहीं, बस अपना सिर हिला दिया।

मैं ऑलिव ऑयल लेकर आ गयी और डॉली से कहा कि मैं तुम्हारी जाँघों पे तेल लगा कर थोड़ी सी मालिश कर दूँगी तो तुम ठीक हो जाओगी पर ये टॉवल तुम्हारे नीचे रहा तो ये खराब हो जायेगा। मैं इसको निकाल देती हूँ और एक पुरानी बेडशीट बिछा देती हूँ। उसने कहा, ठीक है आँटी तो मैंने टॉवल निकाल दिया और एक पुरानी बेडशीट उसके नीचे बिछा कर उसको नंगी ही लिटा दिया और मैं उसकी दोनों टाँगों को फैला के बैठ गयी। उसने अपने हाथों से अपनी चूत को छुपा लिया तो मैं हँस पड़ी और कहा कि अभी तो तुम से कहा था कि लड़कियाँ एक दूसरे से नहीं शर्माती तो फिर भी उसने अपना हाथ नहीं हटाया तो मैंने कहा कि देखो दोनों हाथ यहाँ रखने से तुम्हारी मौसंबी जैसी चूचियाँ मुझे दिखायी दे रही हैं तो उसने दोनों हाथ चूत पे से हटा के चूचियों पे रख लिये तो मैंने कहा कि देखो अब ये नज़र आ रही है तो वो हँसने लगी और बोली कि आँटी.... आप भी तो नाईटी पहने हुए हैं... वो भी तो खराब हो जायेगी, अगर उसको तेल लग गया तो! मैंने हँस के कहा, क्या मतलब है तुम्हारा?? मैं भी अपनी नाईटी उतर दूँ क्या?? वैसे भी इसमें से तुम्हें मेरा सब कुछ तो दिख रहा है। तो वो कुछ बोली नहीं, बस हँसने लगी तो मुझे भी कुछ शरारत सूझी और कहा, ठीक है! तुम्हें शरम आती है तो मैं भी अपनी नाईटी निकाल देती हूँ। ये कहते हुए अपने हाथ से बैठे-बैठे नाइटी को ऊपर उठा के जिस्म से निकल दिया और नंगी हो गयी और बोली कि, लो मैं भी तुम्हारी तरह अब सिर्फ सैंडल पहने हुए हूँ।

डॉली ने मेरा जिस्म देखा तो बोली कि, वॉव आँटी आप बहुत ब्यूटीफुल हो तो मैंने कहा कि तुम्हारी मम्मी भी तो ब्यूटीफुल है। उसने कहा कि हाँ! है तो सही पर आप जितनी ब्यूटीफुल नहीं... आप तो बहुत ही ब्यूटीफुल हो और मेरी चूचियों की तरफ़ इशारा करके बोली कि मेरी मम्मी के ये भी ढीले हैं, आपके देखो कैसे शेप में हैं और फिर मेरी चूत कि तरफ़ इशारा करके बोली कि ये देखो आपके यहाँ तो एक भी बाल नहीं है और मेरी मम्मी के यहाँ तो बहुत बाल हैं। मैंने कहा कि जैसे मैं तुमसे करीब दस साल बड़ी हूँ वैसे ही तुम्हारी मम्मी भी मुझसे दस-बारह साल बड़ी होंगी... इसलिये उम्र के हिसाब से इतना फर्क़ तो आ ही जाता है... वैसे तुमने कब और कैसे देखा तुम्हारी मम्मी को? तो उसने बतया कि बचपन से कईं दफ़ा देखा है... बाथरूम से बाहर आते हुए और कपड़े चेंज करते हुए। मैं समझ गयी कि डॉली के घर का माहौल बिल्कुल फ्री है तो मैंने पूछा, डैडी का भी कुछ देखा? तो उसने कहा कि हाँ, कईं दफ़ा देखा है कपड़े चेंज करते वक्त और कभी सोने के टाईम पे क्योंकि आँटी, मेरे मम्मी और डैडी दोनों बिल्कुल नंगे सोते हैं बेड में। मैं हैरान रह गयी। फिर सोचा कि हो सकता है और फिर नंगे सोने में कुछ गलत बात भी तो नहीं है। मैं भी तो नंगी ही सोती हूँ। मैंने पूछा और क्या-क्या देखा है तुमने तो उसने कहा कि मैंने तो बहुत कुछ देखा है आँटी। दोनों रात को ड्रिंक करके नशे में खुल्लमखुल्ला सब करते हैं। कभी डैडी को मम्मी के ऊपर और कभी मम्मी को डैडी के ऊपर चढ़े हुए भी देखा है और कभी जब उनके जिस्म से ब्लैंकेट हट जाती है तो देखा कि दोनों नंगे एक दूसरे के ऊपर चढ़ कर चुदाई करते हैं। मैंने पूछा तुमने कैसे देखा? तो डॉली ने कहा कि नशे में वो बेडरूम बंद नहीं करते और मैंने छुप कर सब देखा। मुझे अपनी चुदाई याद आ रही थी जैसे कभी मैं एस-के पे और कभी एस-के मुझ पर चढ़ कर उछल-उछल के चोद रहे होते हैं। मैं यही सोचती रही और अपने खयालों में गुम हो गयी।

डॉली ने कहा कि क्या हुआ आँटी ?? तो मैं अपने सपनों से बाहर आ गयी और उससे कहा कि नहीं कोई खास बात नहीं.... मैं तुम्हारी मम्मी और डैडी के बारे में सोच रही थी.... तुम बहुत शरारती हो... अपने मम्मी-डैडी की चुदाई देखती हो.... और तुम्हें कैसे पता ये चुदाई है? वो बोली, आँटी, <